
1 लाख रुपये से अधिक देने में जताई असमर्थता
मुंबई। बॉम्बे हाई कोर्ट ने मंगलवार को गैंगस्टर अबू सलेम को पैरोल देने से इनकार कर दिया, जब उसने एस्कॉर्ट चार्ज के लिए 1 लाख रुपये से अधिक देने में असमर्थता जताई। सलेम ने नवंबर 2025 में अपने भाई की मौत के बाद उत्तर प्रदेश के आज़मगढ़ स्थित अपने गृहनगर जाने के लिए 14 दिन की पैरोल की मांग की थी। जस्टिस अजय गडकरी और श्याम चंदक की खंडपीठ ने सलेम से कहा कि या तो वह अपनी याचिका वापस ले, अन्यथा कोर्ट इसे खारिज कर देगा। सलेम 1993 के मुंबई सीरियल ब्लास्ट मामले में अपनी भूमिका के लिए सज़ा काट रहा है। कोर्ट की यह टिप्पणी उस समय आई, जब सलेम की वकील फरहाना शाह ने दलील दी कि उनका मुवक्किल एस्कॉर्ट चार्ज के लिए 1 लाख रुपये से अधिक देने की स्थिति में नहीं है। उन्होंने कहा कि सलेम कई वर्षों से जेल में है, उसकी आर्थिक स्थिति खराब है और वह इतने अधिक एस्कॉर्ट खर्च वहन नहीं कर सकता। इस पर कोर्ट ने सख्त टिप्पणी करते हुए कहा, “मैडम, मोलभाव का कोई सवाल ही नहीं है। आपको सरकारी चार्ज देने होंगे। राज्य सरकार ने सलेम की पैरोल याचिका का विरोध करते हुए उसके गृहनगर आज़मगढ़ की कानून-व्यवस्था की स्थिति का हवाला दिया। पिछली सुनवाई में राज्य ने कहा था कि वह दो दिन की पैरोल देने को तैयार है, लेकिन एस्कॉर्ट के साथ, जिसका खर्च सलेम को उठाना होगा। राज्य ने 25 एस्कॉर्ट कर्मियों का सुझाव दिया था, जिससे लाखों रुपये का खर्च आने की बात कही गई। हालांकि, फरहाना शाह ने तर्क दिया कि सलेम को पहले दो मौकों पर पैरोल दी गई थी, जब उसकी मां और पालक मां का निधन हुआ था। उन्होंने कहा कि उस समय भी उसे एस्कॉर्ट के साथ भेजा गया था, लेकिन उससे कोई एस्कॉर्ट चार्ज नहीं लिया गया था और पैरोल का कोई दुरुपयोग भी नहीं हुआ था।जब शाह ने दोहराया कि सलेम 1 लाख रुपये से अधिक नहीं दे सकता, तो कोर्ट ने राज्य और केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) द्वारा जताई गई आशंकाओं का हवाला दिया। बेंच ने कहा, “राज्य ने आशंका व्यक्त की है। हम इसे नजरअंदाज नहीं कर सकते। शाह ने यह भी कहा कि आपत्तियां इसलिए उठाई जा रही हैं क्योंकि सलेम अपनी 25 साल की सज़ा पूरी करने के करीब है। उन्होंने तर्क दिया कि पहले वह उसी स्थान (उत्तर प्रदेश) गया था और तब कोई समस्या नहीं हुई थी। उन्होंने यह भी कहा कि पहले 10 से 12 पुलिसकर्मी एस्कॉर्ट में थे और 25 एस्कॉर्ट की जरूरत नहीं है। हालांकि, बेंच ने स्पष्ट किया कि यदि सलेम एस्कॉर्ट का पूरा खर्च उठाने को तैयार नहीं है, तो उसे पैरोल नहीं दी जाएगी। कोर्ट ने कहा, “आप कैसे तय कर सकते हैं कि कितने एस्कॉर्ट की जरूरत है? इसके बाद फरहाना शाह ने सलेम से निर्देश लेने के लिए समय मांगा, जिसे कोर्ट ने स्वीकार करते हुए मामले की अगली सुनवाई 5 फरवरी को तय की। उल्लेखनीय है कि अबू सलेम ने नवंबर 2025 में अपने बड़े भाई अबू हाकिम अंसारी की मौत के बाद सांप्रदायिक रूप से संवेदनशील आज़मगढ़ जाने के लिए 14 दिन की पैरोल मांगी थी। जेल अधिकारियों द्वारा उसकी पैरोल अर्जी खारिज किए जाने के बाद उसने हाई कोर्ट का रुख किया था और दिसंबर 2025 में हाई कोर्ट में पैरोल याचिका दाखिल की थी।

