
मुंबई। औद्योगिक, व्यावसायिक और संस्थागत उपभोक्ताओं के लिए अब खुदरा पेट्रोल पंपों से बड़े पैमाने पर पेट्रोल और डीजल खरीदना प्रतिबंधित कर दिया गया है। ऐसे उपभोक्ताओं को ईंधन की खरीद केवल थोक ग्राहकों के लिए निर्धारित ईंधन केंद्रों से ही करनी होगी। इसके साथ ही किसी भी वाहन को प्रतिदिन 200 लीटर से अधिक डीजल की बिक्री नहीं की जा सकेगी तथा खरीदे गए ईंधन की पुनर्विक्रय (रीसेल) पर भी रोक लगा दी गई है। राज्य सरकार ने स्पष्ट किया है कि तेल विपणन कंपनियों और पेट्रोल पंप संचालकों को इन निर्देशों का कड़ाई से पालन करना होगा। यह आदेश अधिकतम 90 दिनों तक अथवा अगले आदेश जारी होने तक प्रभावी रहेगा। सरकार के अनुसार, हाल की वैश्विक भू-राजनीतिक परिस्थितियों के कारण ऊर्जा आपूर्ति श्रृंखला प्रभावित हुई है, जिससे देश में पेट्रोलियम उत्पादों की उपलब्धता पर दबाव बढ़ा है। कुछ क्षेत्रों में औद्योगिक, व्यावसायिक और संस्थागत ग्राहकों द्वारा खुदरा पेट्रोल पंपों से बड़ी मात्रा में ईंधन खरीदे जाने की घटनाएं सामने आई थीं, जिसके चलते यह कदम उठाया गया है। इसी पृष्ठभूमि में केंद्र सरकार ने 11 जून 2026 को “मोटर स्पिरिट एवं हाई स्पीड डीजल (खुदरा विक्रय केंद्रों के माध्यम से आपूर्ति का अस्थायी विनियमन) आदेश, 2026” जारी कर पेट्रोल और डीजल की बिक्री पर अस्थायी प्रतिबंध लागू किए हैं। इसके बाद महाराष्ट्र सरकार ने 12 जून 2026 को संबंधित आदेश जारी कर इन निर्देशों को राज्य में लागू करने के निर्देश दिए। इससे पहले 5 जून 2026 को जारी परिपत्र में राज्य सरकार ने पेट्रोलियम उत्पादों की जमाखोरी, कालाबाजारी, पेट्रोल पंपों से टैंकर या बाउजर में अनधिकृत ईंधन भराई, ईंधन में मिलावट, रिसाव, अवैध हस्तांतरण, अधिक कीमत वसूली तथा घटिया गुणवत्ता का ईंधन बेचने जैसे मामलों में सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए थे। आदेशों के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए मंडल आयुक्त, जिलाधिकारी, अतिरिक्त जिलाधिकारी, नियंत्रक राशन वितरण, नागरिक आपूर्ति विभाग के अधिकारी, उपविभागीय अधिकारी, तहसीलदार तथा पुलिस उपाधीक्षक स्तर या उससे ऊपर के पुलिस अधिकारियों को जांच और कार्रवाई के अधिकार प्रदान किए गए हैं। राज्य सरकार ने सभी संबंधित विभागों को निर्देश दिया है कि ईंधन की जमाखोरी, कालाबाजारी और अन्य अनियमितताओं पर कड़ी निगरानी रखी जाए तथा नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ तत्काल और कठोर कार्रवाई की जाए।



