Wednesday, April 22, 2026
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रेस्टॉरेंट, होटल और फास्ट फूड में ‘चीज़ एनालॉग’ के उपयोग पर एफडीए की सख्ती

पनीर और ‘चीज़ एनालॉग’ में फर्क छुपाना अब अपराध, एफडीए आयुक्त श्रीधर डूबे पाटिल ने दिए सख्त निर्देश

मुंबई। महाराष्ट्र में रेस्टॉरेंट, होटल, केटरर्स और फास्ट फूड विक्रेताओं द्वारा ‘चीज़ एनालॉग’ के उपयोग को लेकर अब सख्त नियम लागू किए गए हैं। अन्न व औषध प्रशासन ने उपभोक्ताओं के स्वास्थ्य और पारदर्शिता को ध्यान में रखते हुए यह कदम उठाया है। खाद्य सुरक्षा आयुक्त श्रीधर डूबे पाटिल ने 20 अप्रैल 2026 को जारी प्रेस नोट में स्पष्ट किया कि ‘पनीर’ और ‘चीज़ एनालॉग’ दो अलग-अलग उत्पाद हैं, लेकिन कई स्थानों पर ग्राहकों को बिना सही जानकारी दिए इन्हें एक-दूसरे के रूप में परोसा जा रहा है, जिससे उपभोक्ताओं की दिशाभूल हो रही है। विभाग के अनुसार पनीर पूरी तरह दूध से बना उत्पाद है, जबकि ‘चीज़ एनालॉग’ वनस्पति तेल, स्टार्च, इमल्सीफायर सहित अन्य घटकों से तैयार किया जाता है। यह पनीर का विकल्प तो हो सकता है, लेकिन इसे पनीर के रूप में बेचना कानूनन गलत है। प्रशासन ने निर्देश दिया है कि यदि किसी खाद्य व्यवसाय में ‘चीज़ एनालॉग’ का उपयोग किया जा रहा है, तो उसका स्पष्ट उल्लेख बिल, मेन्यू कार्ड और इलेक्ट्रॉनिक डिस्प्ले बोर्ड पर करना अनिवार्य होगा। इसके साथ ही पैकेजिंग और लेबलिंग में भी वास्तविक उत्पाद की सही जानकारी देना जरूरी है। अन्न व औषध प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम 2006 और लेबलिंग एवं डिस्प्ले नियम 2020 के तहत इन निर्देशों का पालन अनिवार्य है। नियमों का उल्लंघन करने वाले व्यवसायों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। अधिकारियों ने यह भी चेतावनी दी है कि ग्राहकों को भ्रमित करने या गलत जानकारी देने पर संबंधित प्रतिष्ठानों पर दंडात्मक कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।वहीं, उपभोक्ताओं को भी सतर्क रहने की सलाह दी गई है। उन्हें पनीर खरीदते समय उत्पाद का लेबल ध्यान से पढ़ने, ‘एनालॉग’ शब्द की जांच करने और ढीले पनीर की गुणवत्ता सुनिश्चित करने की हिदायत दी गई है। होटल और रेस्टॉरेंट संचालकों को भी निर्देशित किया गया है कि वे खरीद के समय बिल में उत्पाद का स्पष्ट उल्लेख देखें और बिना सही जानकारी के किसी भी सामग्री का उपयोग न करें।खाद्य सुरक्षा आयुक्त ने कहा कि उपभोक्ताओं के स्वास्थ्य के साथ किसी भी प्रकार का समझौता बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। यदि किसी उपभोक्ता को इस संबंध में शिकायत हो, तो वह विभाग के टोल-फ्री नंबर पर संपर्क कर सकता है। प्रशासन ने दोहराया है कि बाजार में पारदर्शिता बनाए रखने और उपभोक्ताओं को सही जानकारी उपलब्ध कराने के लिए नियमों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित किया जाएगा।

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