
इंद्र यादव/मुंबई। कल्याण पश्चिम के संदीप होटल से खड़कपाड़ा इलाके के बीच रविवार दोपहर एक आवारा सफेद कुत्ते ने जमकर आतंक मचाया। करीब सात घंटे तक कुत्ते ने इलाके में कई लोगों को अपना शिकार बनाया। स्थानीय जानकारी के मुताबिक, इस दौरान 125 से 130 से अधिक लोगों को कुत्ते के काटने की घटनाएं सामने आईं, जिनमें बच्चे, बुजुर्ग और राहगीर भी शामिल हैं। घटना के बाद पूरे इलाके में दहशत का माहौल बन गया और लोग घरों से निकलने में भी घबराने लगे। कुत्ते के हमले में घायल लोगों की बड़ी संख्या अस्पताल पहुंची। रुक्मिणीबाई अस्पताल में अकेले 48 लोगों के पहुंचने की जानकारी सामने आई, जबकि कई अन्य लोगों ने निजी अस्पतालों में उपचार कराया। कुछ बच्चों को गंभीर चोटें आईं। एक नाबालिग बच्ची को बेहतर उपचार के लिए सायन अस्पताल रेफर किए जाने की जानकारी है। अन्य घायलों को चिकित्सकीय सलाह के अनुसार एंटी-रेबीज इंजेक्शन दिए गए। घटना के बाद प्रशासन, पुलिस और स्थानीय लोगों ने कुत्ते की तलाश शुरू की। बताया गया कि कई घंटे की मशक्कत के बाद देर रात करीब 1:30 बजे कुत्ते को पकड़ लिया गया। हालांकि, इस घटना ने शहर में आवारा कुत्तों की समस्या और उनके नियंत्रण को लेकर प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि आवारा कुत्तों की नसबंदी, टीकाकरण और नियंत्रण के लिए लगातार योजनाएं चलाए जाने के बावजूद जमीनी स्तर पर प्रभावी व्यवस्था नजर नहीं आती। लोगों का सवाल है कि यदि एक आवारा कुत्ता इतने लंबे समय तक लगातार लोगों पर हमला करता रहा, तो उसे समय रहते पकड़ने के लिए तत्काल कार्रवाई क्यों नहीं हो सकी। घटना के बाद मुंबई और आसपास के इलाकों में भी आवारा कुत्तों को लेकर कार्रवाई की चर्चा तेज हो गई है। नागरिकों का कहना है कि केवल किसी घटना के बाद कुत्तों को पकड़ना पर्याप्त नहीं है, बल्कि नियमित नसबंदी, टीकाकरण, निगरानी और शिकायतों पर तत्काल कार्रवाई की स्थायी व्यवस्था जरूरी है। कल्याण की इस घटना ने एक बार फिर आवारा कुत्तों के हमलों से नागरिकों, विशेषकर बच्चों और बुजुर्गों की सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंता पैदा कर दी है। अब स्थानीय लोगों की मांग है कि प्रशासन घटना से सबक लेते हुए पूरे इलाके में प्रभावी अभियान चलाए, ताकि भविष्य में ऐसी घटना दोबारा न हो।

