
मुंबई। महाराष्ट्र में सर्पदंश से होने वाली मौतों पर प्रभावी रोक लगाने के लिए राज्य सरकार ने व्यापक कार्ययोजना तैयार की है। जनजागरूकता बढ़ाने, समय पर उपचार सुनिश्चित करने, सभी सरकारी अस्पतालों में एंटी स्नेक वेनम की उपलब्धता और विभिन्न विभागों के बीच बेहतर समन्वय के जरिए इस समस्या से निपटा जाएगा। यह जानकारी राज्य के सार्वजनिक स्वास्थ्य मंत्री प्रकाश आबिटकर ने बुधवार को विधानसभा में दी। विधानसभा में सदस्य विक्रम पाचपुते द्वारा उठाई गई ध्यानाकर्षण सूचना का जवाब देते हुए मंत्री आबिटकर ने कहा कि इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (ICMR) की गाइडलाइन के अनुसार जिला अस्पतालों, ग्रामीण अस्पतालों और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में एंटी स्नेक वेनम की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित की गई है। साथ ही डॉक्टरों और स्वास्थ्य कर्मियों को विशेष प्रशिक्षण भी दिया गया है। उन्होंने कहा कि सर्पदंश के बाद घबराहट और अंधविश्वास के कारण कई मरीज समय पर अस्पताल नहीं पहुंच पाते, जिससे जान का खतरा बढ़ जाता है। इसलिए लोगों को ‘गोल्डन ऑवर’ के भीतर अस्पताल पहुंचने के लिए व्यापक जनजागरूकता अभियान चलाया जाएगा। स्वास्थ्य मंत्री ने बताया कि सर्पदंश को नोटिफाइड बीमारी घोषित करने के लिए विधि एवं न्याय विभाग को प्रस्ताव भेजा गया है। राज्य में फिलहाल एंटी स्नेक वेनम का पर्याप्त भंडार उपलब्ध है और प्रशिक्षण कार्यक्रमों के लिए आवश्यक बजट भी उपलब्ध कराया गया है। जहां भी कोई कमी सामने आएगी, उसे तत्काल दूर किया जाएगा। उन्होंने कहा कि विषैले और गैर-विषैले सर्पदंश की त्वरित पहचान के लिए एंटी स्नेक वेनम किट उपलब्ध कराने का निर्णय लिया गया है। इन किटों का वितरण प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में किया जा रहा है, जिससे मरीजों का तुरंत सही उपचार शुरू किया जा सकेगा। आबिटकर ने बताया कि सभी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों और ग्राम पंचायतों में सर्पदंश से बचाव और उपचार संबंधी जानकारी प्रदर्शित करना अनिवार्य किया गया है। यदि इसमें किसी प्रकार की लापरवाही पाई गई तो संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कहा कि बरसात के मौसम में सर्पदंश की घटनाएं बढ़ जाती हैं। इसे देखते हुए स्वास्थ्य विभाग को अलर्ट रहने के निर्देश दिए जाएंगे तथा जरूरत पड़ने पर मेडिकल एजुकेशन विभाग के समन्वय से अतिरिक्त आईसीयू और आपातकालीन उपचार सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। इस दौरान सदस्य श्वेता महाले, बाबासाहेब देशमुख, अर्जुन खोतकर और जयंत पाटील ने भी चर्चा में भाग लेकर सर्पदंश से होने वाली मौतों को रोकने के लिए प्रभावी कदम उठाने की आवश्यकता पर जोर दिया।



