अतिक्रमण हटाने के लिए बीएमसी पर निर्भर एसआरए

मुंबई। झोपड़पट्टी पुनर्वासन प्राधिकरण (एसआरए) में सीईओ के पद पर डॉ. महेंद्र कल्याणकर के आने के बाद से एसआरए कार्यालय को चमकाने पर करोड़ों रुपये खर्च किए गए हैं। हालांकि, एसआरए एक प्लानिंग अथॉरिटी होने के बावजूद अतिक्रमण निष्कासन के लिए इसके पास स्वयं का तोड़क दस्ता और आवश्यक यंत्रणा उपलब्ध नहीं है। इस कारण एसआरए के अधिकारी आज भी कार्रवाई के लिए बृहन्मुंबई महानगर पालिका (बीएमसी) पर निर्भर हैं। बीएमसी से तोड़क दस्ता और संसाधन न मिलने के कारण कई बार अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई अटक जाती है। ताजा मामला बीएमसी के एच/पूर्व विभाग से जुड़ा है, जहां एसआरए के सक्षम प्राधिकारी डॉ. मोहन नलदकर ने सांताक्रूज पूर्व, वकोला स्थित डिसूजा एंड मिरांडा चाल सहकारी गृहनिर्माण संस्था में डेवलपर मे.अजीब इन्वेस्टमेंट द्वारा किए गए अतिक्रमण को हटाने के लिए बीएमसी एच/पूर्व विभाग की सहायक आयुक्त को दिनांक 25 फरवरी 2026 को पत्र लिखकर 17 मार्च 2026 के लिए तोड़क दस्ता और कामगारों की मांग की, लेकिन उन्हें उपलब्ध नहीं कराया गया। इसके बाद 30 मार्च 2026 को पुनः पत्र लिखकर 16 अप्रैल 2026 के लिए तोड़क दस्ता और कामगारों की मांग की गई, जिसपर काफी मशक्कत के बाद सहायक आयुक्त मृदुला अंडे ने स्टॉप व तोड़क दस्ता उपलब्ध कराए। जिसके बाद बिल्डर के अतिक्रमण पर एसआरए की टीम ने कार्रवाई की। मतलब एक अतिक्रमण को हटाने के लिए एसआरए को एक महीने से अधिक का समय लगा। इससे यह अंदाजा लगाया जा सकता हैं कि एसआरए की कार्यप्रणाली कितनी तेजी से गतिशील है। इस स्थिति से यह सवाल उठता है कि झोपड़पट्टी के विकास और ‘झोपड़पट्टी मुक्त मुंबई’ का लक्ष्य कैसे पूरा होगा। एसआरए के सीईओ महेंद्र कल्याणकर द्वारा किए जा रहे बड़े-बड़े दावों की हकीकत अब सामने आती दिख रही है। यह भी उल्लेखनीय है कि वर्षों से लंबित एसआरए परियोजनाओं में झोपड़ियों की जगह अब अवैध इमारतें खड़ी हो गई हैं। इन पर कार्रवाई नहीं हो पाती, क्योंकि योजना प्राधिकरण एसआरए है, जबकि एसआरए के पास खुद का तोड़क दस्ता नहीं है। ऐसे में अवैध निर्माणों को अप्रत्यक्ष रूप से संरक्षण मिलना स्वाभाविक माना जा रहा है।




