
जयपुर, राजस्थान। राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा जारी किए गए सख्त दिशा-निर्देशों को लेकर राजस्थान पत्रकार परिषद ने कड़ा विरोध जताया है। आयोग के आदेश क्रमांक 922 के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए परिषद ने इसे लोकतंत्र के चौथे स्तंभ की स्वतंत्रता पर सीधा अंकुश करार दिया है। परिषद ने राज्य निर्वाचन आयुक्त राजेश्वर सिंह को पत्र लिखकर नियमों में तत्काल संशोधन और शिथिलता देने की मांग की है। पत्रकार परिषद के प्रदेशाध्यक्ष रोहित कुमार सोनी, कार्यकारी अध्यक्ष गिरिराज अग्रवाल और प्रदेश महामंत्री रमेश यादव ने संयुक्त रूप से आयोग का ध्यान आकर्षित करते हुए कहा कि मतदान बूथों और मतगणना कक्षों में फोटोग्राफी और वीडियोग्राफी पर पूर्ण प्रतिबंध तर्कसंगत नहीं है। परिषद का कहना है कि डिजिटल युग में बिना विजुअल्स के चुनाव जैसी महत्वपूर्ण लोकतांत्रिक प्रक्रिया की निष्पक्ष और प्रभावी कवरेज असंभव है। साथ ही, मोबाइल फोन पर पूर्ण पाबंदी से त्वरित समाचार प्रेषण में गंभीर बाधाएं आएंगी।
चार प्रमुख बिंदुओं पर आपत्ति
- पंचायत मुख्यालय पर मीडिया प्रवेश पर रोक
आयोग द्वारा पंचायत मुख्यालयों पर मतगणना के दौरान मीडिया की उपस्थिति पर प्रतिबंध लगाए जाने पर परिषद ने आपत्ति जताई है। परिषद का कहना है कि ग्रामीण चुनावों में पंचायत मुख्यालय ही सूचना का केंद्र होता है, जहां मीडिया की अनुपस्थिति से अफवाहों और भ्रामक खबरों को बढ़ावा मिल सकता है। - मीडियाकर्मियों की सीमित संख्या
आदेश के तहत एक समाचार पत्र से केवल एक पत्रकार और एक फोटोग्राफर को ही अनुमति दिए जाने पर भी परिषद ने असहमति जताई है। परिषद ने मांग की है कि बड़े मीडिया संस्थानों और डिजिटल मीडिया की जरूरतों को देखते हुए यह संख्या कम से कम चार की जाए। - अधिकारियों को असीमित अधिकार
रिटर्निंग और पीठासीन अधिकारियों को मीडियाकर्मियों को बाहर करने के जो अधिकार दिए गए हैं, उस पर परिषद ने चिंता जताई है। परिषद का कहना है कि इससे फील्ड में कार्यरत पत्रकारों के साथ दुर्व्यवहार और कार्य में अनावश्यक हस्तक्षेप की आशंका बढ़ जाती है। - गोपनीयता बनाम पारदर्शिता
परिषद ने स्पष्ट किया है कि मतदान की गोपनीयता का सम्मान करते हुए भी परिसर और मतगणना प्रक्रिया की रिकॉर्डिंग की अनुमति दी जानी चाहिए, ताकि चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता बनी रहे।
राजस्थान पत्रकार परिषद ने अपने पत्र में कहा है कि चुनाव की निष्पक्षता और पारदर्शिता जनता तक पहुंचाने के लिए प्रेस की स्वतंत्रता अनिवार्य है। आयोग से आग्रह किया गया है कि वह व्यावहारिक दृष्टिकोण अपनाते हुए पत्रकारों को उनके संवैधानिक दायित्वों के निर्वहन में सहयोग करे और नियमों में आवश्यक संशोधन कर लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा सुनिश्चित करे।



