
पुणे। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा कि पुणे भविष्य में अत्याधुनिक प्रौद्योगिकी (डीप-टेक) और ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर (जीसीसी) का देश का प्रमुख केंद्र बनने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। वर्ष 2030 तक पुणे देश के सबसे आधुनिक शहरों में शामिल होगा और महाराष्ट्र के आर्थिक विकास का प्रमुख ग्रोथ इंजन बनेगा। उन्होंने कहा कि शहर की बढ़ती ट्रैफिक समस्या को स्थायी रूप से खत्म करने के लिए राज्य सरकार ने पुणे-शिरूर, तलेगांव-चाकण-शिक्रापुर और हडपसर-यवत एलिवेटेड कॉरिडोर परियोजनाओं को मंजूरी देकर उनके निर्माण कार्य की शुरुआत कर दी है। शनिवार को पुणे के गणेश कला क्रीड़ा मंच में आयोजित तीनों एलिवेटेड कॉरिडोर परियोजनाओं के भूमिपूजन समारोह में मुख्यमंत्री ने कहा कि महाराष्ट्र राज्य सड़क विकास महामंडल (एमएसआरडीसी) इन परियोजनाओं को ‘बिल्ड, यूज एंड ट्रांसफर (बीओटी)’ मॉडल पर विकसित करेगा। इससे सरकार को अग्रिम रूप से 950 करोड़ रुपये की आय होगी। उन्होंने कहा कि इन परियोजनाओं के पूरा होने के बाद पुणे की ट्रैफिक जाम की समस्या काफी हद तक समाप्त हो जाएगी और औद्योगिक क्षेत्रों तक पहुंच पहले से कहीं अधिक आसान हो जाएगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए तीनों एलिवेटेड कॉरिडोर पर आगे चलकर मेट्रो रेल चलाने की व्यवस्था भी अभी से डिजाइन में शामिल की गई है। इससे जब भविष्य में मेट्रो का निर्माण होगा तो अलग से ढांचा तैयार करने की आवश्यकता नहीं पड़ेगी और मेट्रो निर्माण की लागत में लगभग 40 प्रतिशत तक बचत होगी। उन्होंने बताया कि राज्य सरकार का ध्यान केवल सड़क निर्माण तक सीमित नहीं है, बल्कि प्रस्तावित पुरंदर अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे को बेहतर सड़क और मेट्रो कनेक्टिविटी देने पर भी काम किया जा रहा है। दिवे घाट में दोहरी सुरंग बनाकर सड़क और मेट्रो दोनों को जोड़ने की योजना पर विचार किया जा रहा है, जिससे एयरपोर्ट तक पहुंचने का समय काफी कम होगा। उन्होंने बताया कि पुरंदर एयरपोर्ट के लिए 50 प्रतिशत से अधिक भूमि अधिग्रहण पूरा हो चुका है, जो देश में सबसे तेज भूमि अधिग्रहण का उदाहरण है। मुख्यमंत्री ने कहा कि 173 किलोमीटर बाहरी रिंग रोड और 86 किलोमीटर आंतरिक रिंग रोड का निर्माण अगले दो वर्षों में पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। इसके पूरा होने के बाद पुणे में ट्रैफिक जाम में लगभग 30 प्रतिशत की कमी आने की उम्मीद है। उन्होंने कहा कि पुणे पहले से ही शिक्षा, इंजीनियरिंग, आईटी और स्टार्टअप का प्रमुख केंद्र है। आने वाले समय में यह डीप-टेक और ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर (जीसीसी) का राष्ट्रीय हब बनेगा। वर्तमान में देश के लगभग 35 प्रतिशत जीसीसी अकेले पुणे में स्थापित हो रहे हैं। भविष्य की आबादी और उद्योगों की जरूरतों को देखते हुए जल प्रबंधन, सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) और पुनर्चक्रित पानी के उपयोग पर भी सरकार विशेष ध्यान दे रही है। इस अवसर पर केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने कहा कि पुणे की ट्रैफिक और प्रदूषण की समस्या को दूर करने में ये तीनों एलिवेटेड कॉरिडोर बेहद महत्वपूर्ण साबित होंगे। उन्होंने बताया कि आधुनिक अल्ट्रा हाई परफॉर्मेंस फाइबर रिइन्फोर्स्ड कंक्रीट तकनीक के उपयोग से कम पिलरों पर सड़क, फ्लाईओवर और मेट्रो जैसी बहुस्तरीय संरचनाएं तैयार की जा सकेंगी, जिससे लागत भी कम होगी और निर्माण कार्य अधिक मजबूत होगा। गडकरी ने कहा कि सूरत-नासिक-अहिल्यानगर-सोलापुर नए राष्ट्रीय राजमार्ग के बनने से उत्तर भारत से दक्षिण भारत जाने वाले लगभग 40 से 45 प्रतिशत वाहन पुणे और मुंबई में प्रवेश किए बिना अपने गंतव्य तक पहुंच सकेंगे। उन्होंने बताया कि नासिक फाटा से खेड तक लगभग 8 हजार करोड़ रुपये की परियोजना की निविदा प्रक्रिया पूरी हो चुकी है, जबकि खंबाटकी घाट की नई सुरंग का निर्माण अंतिम चरण में है। वहीं ठाणे-पुणे-शिरूर-छत्रपति संभाजीनगर नए एक्सप्रेस हाईवे की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) भी तैयार की जा रही है। उपमुख्यमंत्री सुनेत्रा अजित पवार ने कहा कि पुणे-शिरूर, तलेगांव-चाकण-शिक्रापुर और हडपसर-यवत एलिवेटेड कॉरिडोर पुणे के विकास के लिए वास्तविक अर्थों में ‘गेम चेंजर’ साबित होंगे। इन परियोजनाओं से औद्योगिक क्षेत्रों को बेहतर सड़क संपर्क मिलेगा, माल परिवहन तेज होगा, रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे और नागरिकों की यात्रा अधिक सुरक्षित व सुगम बनेगी। उन्होंने नासिक फाटा से राजगुरूनगर तक एलिवेटेड हाईवे परियोजना को भी शीघ्र शुरू करने की आवश्यकता बताई। सार्वजनिक निर्माण मंत्री शिवेंद्रसिंहराजे भोसले ने कहा कि आधुनिक और विश्वस्तरीय आधारभूत ढांचे के बिना महाराष्ट्र को एक ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने का लक्ष्य हासिल नहीं किया जा सकता। उन्होंने बताया कि इन परियोजनाओं के पूरा होने के बाद महाराष्ट्र में देश का सबसे लंबा एलिवेटेड रोड नेटवर्क तैयार होगा। साथ ही पुणे में 300 किलोमीटर से अधिक लंबाई के साइकिल ट्रैक विकसित करने की दिशा में भी सरकार तेजी से काम कर रही है।
तीनों एलिवेटेड कॉरिडोर की प्रमुख विशेषताएं
पुणे-शिरूर कॉरिडोर : लगभग 54 किलोमीटर लंबा होगा। पहले 31 किलोमीटर हिस्से में छह लेन एलिवेटेड रोड और समानांतर चार लेन सर्विस रोड बनाई जाएगी। यात्रा समय डेढ़-दो घंटे से घटकर 45-50 मिनट रह जाएगा।
हडपसर-यवत कॉरिडोर : लगभग 31.5 किलोमीटर लंबा होगा। इसमें 25 किलोमीटर एलिवेटेड हाईवे और छह लेन सड़क विकसित होगी। यह मार्ग प्रस्तावित पुरंदर अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे, राष्ट्रीय राजमार्ग-65 और पुणे रिंग रोड से जुड़ेगा।
तलेगांव-चाकण-शिक्रापुर कॉरिडोर : लगभग 53 किलोमीटर लंबा होगा। इसमें 26 किलोमीटर एलिवेटेड मल्टीलेवल हाईवे और चार लेन सड़क बनेगी। इससे चाकण औद्योगिक क्षेत्र, पुणे रिंग रोड और राष्ट्रीय राजमार्गों की बेहतर कनेक्टिविटी मिलेगी तथा उद्योग, व्यापार और लॉजिस्टिक्स क्षेत्र को बड़ी मजबूती मिलेगी।

