
मुंबई। महाराष्ट्र सरकार चंद्रपुर जिले में मत्स्य पालन को नई दिशा देने और ग्रामीण क्षेत्रों के मछली पालकों की आय बढ़ाने के लिए झींगा (प्रॉन्स) पालन को प्रोत्साहन देने की तैयारी कर रही है। मत्स्यव्यवसाय एवं बंदरगाह मंत्री नितेश राणे ने कहा कि बल्लारपुर विधानसभा क्षेत्र के तालाबों में जंबो प्रॉन्स प्रजाति के झींगा बीज छोड़कर उत्पादन बढ़ाने के प्रस्ताव पर सरकार सकारात्मक विचार करेगी। गुरुवार को मंत्रालय में चंद्रपुर जिले में झींगा पालन व्यवसाय को बढ़ावा देने के लिए टाइगर प्रॉन्स प्रजाति के लगभग 3 करोड़ झींगा बीज विशेष योजना के तहत उपलब्ध कराने के प्रस्ताव पर समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक में विधायक सुधीर मुनगंटीवार, मत्स्यव्यवसाय आयुक्त एवं महाराष्ट्र मेरीटाइम बोर्ड के मुख्य कार्यकारी अधिकारी पी. प्रदीप, महाराष्ट्र मत्स्योद्योग महामंडल के प्रबंध निदेशक प्रकाश खपले सहित संबंधित विभागों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे। बैठक में मंत्री नितेश राणे ने बताया कि स्थानीय जनप्रतिनिधियों और पदाधिकारियों ने चंद्रपुर जिले में झींगा पालन को बढ़ावा देने के लिए सरकार से लगभग 3 करोड़ झींगा बीज उपलब्ध कराने की मांग की है। इस पहल का उद्देश्य जिले के तालाबों और उपलब्ध जल संसाधनों का अधिक प्रभावी उपयोग कर मत्स्य उत्पादन में वृद्धि करना है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार का लक्ष्य मत्स्य किसानों की आय बढ़ाना, ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के नए अवसर पैदा करना तथा आंतरिक जलाशयों की मत्स्य उत्पादन क्षमता को विकसित करना है। चंद्रपुर जैसे जिलों में उपलब्ध तालाबों का वैज्ञानिक तरीके से उपयोग कर झींगा पालन को बढ़ावा देने से स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे और मत्स्य व्यवसाय को आर्थिक मजबूती मिलेगी। मंत्री राणे ने बताया कि फिलहाल राज्य में मीठे पानी के झींगा बीज उपलब्ध कराने की अलग योजना नहीं है, लेकिन नवाचार योजनाओं के तहत जिला नियोजन समिति अथवा जिला खनिज प्रतिष्ठान (DMF) के माध्यम से आवश्यक वित्तीय सहायता उपलब्ध कराने के विकल्पों पर विचार किया जा सकता है।
उन्होंने कहा कि राज्य सरकार मत्स्य क्षेत्र के समग्र विकास के लिए प्रतिबद्ध है और मत्स्य उत्पादन बढ़ाने, मूल्य संवर्धन, प्रसंस्करण उद्योग, विपणन सुविधाओं तथा झींगा पालन जैसे उच्च मूल्य वाले व्यवसायों को प्रोत्साहित करने के लिए विभिन्न योजनाएं लागू कर रही है। उन्होंने विश्वास जताया कि यदि चंद्रपुर का यह मॉडल सफल रहा तो यह विदर्भ के अन्य जिलों में भी झींगा पालन को बढ़ावा देने के लिए एक आदर्श मॉडल साबित होगा।



