
मुंबई। महाराष्ट्र विधान परिषद में नेता प्रतिपक्ष अंबादास दानवे ने मंगलवार को राज्य सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए दावा किया कि वह 328 नई शराब दुकानों के लाइसेंस जारी करने की तैयारी में है, जिससे सीधा फायदा महायुति सरकार के करीबी लोगों को होगा। विधानमंडल परिसर में मीडिया से बात करते हुए शिवसेना (यूबीटी) नेता ने कहा कि सरकार राजस्व बढ़ाने के नाम पर समाज के हितों की अनदेखी कर रही है। दानवे ने आरोप लगाया कि इस योजना के जरिए शराब की खपत को बढ़ावा दिया जाएगा, जो समाज के लिए घातक है और इससे कई परिवार प्रभावित होंगे। उन्होंने कहा, “1972 में भी जब ऐसा ही निर्णय लिया गया था तो समाजवादी नेता मृणाल गोरे ने इसका विरोध किया था। आज फिर इतिहास खुद को दोहरा रहा है। इस मुद्दे पर राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरद पवार गुट) के विधायक जितेंद्र आव्हाड ने पहले ही चेताया था कि सरकार ‘मुख्यमंत्री लाडकी बहिन योजना’ जैसी योजनाओं की वित्तीय जरूरतें पूरी करने के लिए शराब लाइसेंसों के जरिए राजस्व जुटाना चाहती है। इस योजना के अंतर्गत पात्र महिलाओं को 1500 रूपए मासिक सहायता दी जाती है। हालांकि, इन आरोपों के बाद उपमुख्यमंत्री अजीत पवार ने यह आश्वासन दिया था कि सरकार ने स्पष्ट नियम बनाए हैं कि विधानसभा को विश्वास में लिए बिना कोई नया शराब दुकान लाइसेंस नहीं दिया जाएगा। इसके बावजूद विपक्ष इस मुद्दे को लेकर हमलावर है। दानवे ने छत्रपति संभाजीनगर के एक शिवसेना नेता पर 12 शराब दुकानों के संचालन का आरोप लगाते हुए कहा, “एक तरफ सरकार ‘लाडकी बहन’ योजना शुरू करती है और दूसरी तरफ शराब की दुकानों का विस्तार कर रही है – यह दोहरा चरित्र है। हम इसका विरोध सदन से लेकर सड़क तक करेंगे। इसके साथ ही, दानवे ने विधान भवन परिसर की ‘आकाशवाणी विधायक छात्रावास’ कैंटीन से जुड़ा विवाद भी उठाया। उन्होंने सवाल किया कि जब कैंटीन संचालक का लाइसेंस सालों पहले समाप्त हो गया था, तो वही कंपनी कैसे अब तक संचालन करती रही? और अब उसे फिर से क्यों शुरू किया गया?
यह मामला तब सुर्खियों में आया जब शिवसेना विधायक संजय गायकवाड़ ने पिछले सप्ताह कथित तौर पर बासी भोजन परोसने को लेकर कैंटीन कर्मचारी को थप्पड़ मार दिया। इसके बाद खाद्य एवं औषधि प्रशासन ने कैंटीन का लाइसेंस अस्थायी रूप से निलंबित कर दिया था। शिवसेना प्रमुख और उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे द्वारा विधायकों और मंत्रियों को उनके व्यवहार पर फटकार लगाने पर टिप्पणी करते हुए दानवे ने तीखा तंज कसा, ये लोग मोटी चमड़ी के हैं, आप उनके व्यवहार में कोई बदलाव नहीं देखेंगे।
विपक्ष के अनुसार, सरकार का यह निर्णय सामाजिक दृष्टि से अविवेकपूर्ण है और यह राज्य के नागरिकों के हितों के विरुद्ध है। आने वाले दिनों में यह मुद्दा राजनीतिक गर्मी का केंद्र बनने की संभावना है।




