
मुंबई। महाराष्ट्र विधानसभा के मानसून सत्र के पहले दिन सोमवार को किसानों की कर्जमाफी के मुद्दे को लेकर विपक्षी दलों ने जोरदार प्रदर्शन किया। विधानसभा परिसर में शिवसेना (यूबीटी) के नेता आदित्य ठाकरे, कांग्रेस विधायक दल के नेता विजय वडेट्टीवार तथा अन्य विपक्षी विधायकों ने राज्य सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते हुए किसानों को व्यापक राहत देने की मांग की। प्रदर्शन के दौरान विपक्षी नेताओं ने मराठी में नारे लगाते हुए किसानों के 7/12 भूमि रिकॉर्ड (सातबारा उतारा) को कर्जमुक्त करने की मांग उठाई और आरोप लगाया कि घोषित ऋणमाफी योजना से बड़ी संख्या में किसान वंचित रह सकते हैं। उल्लेखनीय है कि 2 जून को राज्य मंत्रिमंडल ने ‘पुण्यश्लोक अहिल्यादेवी होल्कर किसान कर्ज राहत योजना’ को मंजूरी दी थी। इस योजना के तहत किसानों को 2 लाख रुपये तक के कृषि ऋण की माफी प्रदान की जाएगी। सरकार के अनुसार योजना में भूमि स्वामित्व की कोई अनिवार्य शर्त नहीं रखी गई है और पात्र किसानों को इसका लाभ मिलेगा। हालांकि विपक्ष का आरोप है कि योजना के मौजूदा स्वरूप में अनेक किसान इसके दायरे से बाहर रह जाएंगे। योजना को लेकर उठी आलोचनाओं के बीच राज्य सरकार ने 19 जून को इसके प्रभावी क्रियान्वयन और पात्रता संबंधी मुद्दों की समीक्षा के लिए तीन समितियों का गठन किया है। इनमें मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की अध्यक्षता वाली एक मंत्रिमंडलीय उपसमिति भी शामिल है, जिसे आवश्यक संशोधन और निगरानी की जिम्मेदारी सौंपी गई है। विधानसभा सत्र के पहले दिन मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस, उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे, उपमुख्यमंत्री सुनेत्रा अजित पवार तथा अन्य नेताओं ने विधानसभा परिसर में छत्रपति शिवाजी महाराज की प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित कर सत्र की शुरुआत की। इससे एक दिन पहले मुख्यमंत्री फडणवीस ने विपक्ष के आरोपों का जवाब देते हुए कहा था कि ऋणमाफी कोई राजनीतिक हथियार नहीं, बल्कि संकटग्रस्त किसानों को राहत देने और उन्हें दोबारा संस्थागत ऋण व्यवस्था से जोड़ने का माध्यम है। उन्होंने बताया कि राज्य सरकार की प्रस्तावित ऋणमाफी योजना के तहत लगभग 36,585 करोड़ रुपये की सहायता प्रदान की जाएगी, जिससे करीब 56 लाख किसानों को लाभ मिलेगा। मुख्यमंत्री के अनुसार यह महाराष्ट्र के इतिहास की सबसे बड़ी कृषि ऋणमाफी योजना होगी।



