Thursday, April 16, 2026
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नासिक TCS बीपीओ विवाद ने पकड़ा तूल, यौन उत्पीड़न के आरोपों के बीच देशभर में विरोध की तैयारी

नासिक। नासिक में टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS) से जुड़े एक बीपीओ सेंटर में कथित यौन उत्पीड़न, छेड़छाड़, ब्लैकमेल और धर्म परिवर्तन के दबाव के आरोपों ने राष्ट्रीय स्तर पर गंभीर विवाद खड़ा कर दिया है। 18 से 25 वर्ष की आयु की आठ महिला कर्मचारियों द्वारा लगाए गए इन आरोपों ने पूरे देश का ध्यान अपनी ओर खींचा है। मामले की गंभीरता को देखते हुए बजरंग दल ने 16 और 17 अप्रैल को देशभर में बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन करने की घोषणा की है। संगठन ने इस घटना को बेहद चिंताजनक बताते हुए लोगों से एकजुट होकर पीड़ितों के लिए न्याय और जवाबदेही की मांग करने की अपील की है। नासिक में TCS कार्यालय के बाहर विरोध प्रदर्शन शुरू भी हो चुके हैं। इस बीच विश्व हिंदू परिषद के प्रवक्ता विनोद बंसल ने कहा कि समाज में कथित “लव जिहाद” और उत्पीड़न जैसे मुद्दों को लेकर जागरूकता बढ़ी है और दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई आवश्यक है। विवाद बढ़ने पर TCS ने 13 अप्रैल को आधिकारिक बयान जारी कर यौन उत्पीड़न के मामलों में अपनी “जीरो टॉलरेंस” नीति दोहराई। कंपनी ने पुष्टि की कि आरोपित कर्मचारियों को जांच पूरी होने तक निलंबित कर दिया गया है। साथ ही नासिक यूनिट में कामकाज तत्काल प्रभाव से रोक दिया गया है और कर्मचारियों को वर्क फ्रॉम होम के निर्देश दिए गए हैं। भर्ती प्रक्रियाएं भी अस्थायी रूप से स्थगित कर दी गई हैं। कानूनी कार्रवाई के तहत नासिक पुलिस ने इस मामले में नौ एफआईआर दर्ज की हैं। मुख्य आरोपियों में आसिफ अंसारी, तौसीफ अत्तर, दानिश शेख, रज़ा मेमन, शाहरुख कुरैशी, शफी शेख और एचआर मैनेजर निदा खान शामिल हैं। पुलिस को संदेह है कि निदा खान इस पूरे मामले की मुख्य सूत्रधार हो सकती हैं, जो फिलहाल फरार बताई जा रही हैं। पुलिस कमिश्नर संदीप कार्णिक के निर्देश पर एसीपी संदीप मितके के नेतृत्व में विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया गया है, जबकि कई आरोपियों को गिरफ्तार भी किया जा चुका है। मामले में राष्ट्रीय महिला आयोग ने भी संज्ञान लेते हुए 15 अप्रैल को एक फैक्ट-फाइंडिंग टीम गठित की है, जो 17 अप्रैल को नासिक पहुंचकर घटनास्थल का निरीक्षण करेगी और पीड़ितों की स्थिति का आकलन करेगी। 16 अप्रैल तक TCS कार्यालय के बाहर बजरंग दल और अन्य संगठनों का विरोध प्रदर्शन जारी है, जहां महिलाओं की सुरक्षा और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग उठाई जा रही है। इस बीच महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस सहित राज्य सरकार के मंत्रियों ने मामले में सख्त कार्रवाई का आश्वासन दिया है। फिलहाल पुलिस जांच जारी है और आरोपों की सत्यता अदालत में साबित होना बाकी है, लेकिन इस घटना ने कार्यस्थल पर महिलाओं की सुरक्षा और कॉर्पोरेट जवाबदेही को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

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