Thursday, March 19, 2026
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मुंबई में नाला सफाई घोटाला उजागर: फर्जी रजिस्ट्री, वीडियो साक्ष्य और लॉग शीट में हेरफेर, EOW की जांच शुरू

मुंबई। मुंबई में भारी बारिश और जलभराव के बीच नगर प्रशासन की पोल खोलती एक बड़ी अनियमितता सामने आई है। नाला सफाई के नाम पर भ्रष्टाचार और फर्जीवाड़े का एक संगठित नेटवर्क उजागर हुआ है, जिसमें फर्जी रजिस्ट्रियां, हस्ताक्षरित लॉग शीट्स, और एक पेनड्राइव में संग्रहीत वीडियो साक्ष्य के ज़रिए गंभीर आरोप लगाए गए हैं। शिकायतकर्ता गणेश घाडगे द्वारा सौंपी गई इन सामग्रियों के आधार पर आर्थिक अपराध शाखा (EOW) ने नगर निगम अधिकारियों के खिलाफ औपचारिक जांच शुरू कर दी है। यह घोटाला ऐसे वक्त में सामने आया है जब मुंबई मूसलाधार बारिश और जलभराव से बुरी तरह प्रभावित है, जिससे यातायात, लोकल ट्रेनें और सामान्य जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया है। आरोपों के अनुसार, एक ठेकेदार के सहयोगी ने बीएमसी अधिकारियों के लॉगिन क्रेडेंशियल्स का दुरुपयोग करते हुए, लॉग शीट में यह दिखाया कि निर्माण सामग्री (ब्लैक माल) नाले की कीचड़ और कचरे के रूप में हटाई गई है। इन फर्जी लॉग शीट्स पर संबंधित अधिकारियों के हस्ताक्षर भी पाए गए हैं, जिससे उनके संलिप्त होने की संभावना प्रबल होती है। इस पूरे मामले का स्टिंग ऑपरेशन द्वारा भंडाफोड़ हुआ, जिसमें यह सामने आया कि EOW और मुंबई पुलिस को की गई शिकायत में व्यापक साक्ष्य—वीडियो फुटेज, रिकॉर्डिंग्स और दस्तावेज—उपलब्ध कराए गए हैं। विशेष रूप से एस वॉर्ड के तहत, 14 जूनियर इंजीनियरों के मोबाइल फोन, लॉग डेटा और डंपिंग ग्राउंड पर तौल काँटों (Weigh Bridges) के गड़बड़ी की जांच की गई। मुंबई नगर आयुक्त भूषण गगरानी द्वारा गठित एक विशेष जांच समिति ने शुरूआती रिपोर्ट में केवल तीन इंजीनियरों को दोषी पाया है, जबकि मुख्य ठेकेदार भूपेंद्र पुरोहित को काली सूची (Blacklist) में डालने की प्रक्रिया प्रारंभ कर दी गई है। हालांकि, विभागीय जांच अभी जारी है और बाकी अधिकारियों की संलिप्तता या दोषसिद्धि स्पष्ट नहीं हो सकी है। गौरतलब है कि आर्थिक अपराध शाखा पहले से ही मीठी नदी सफाई घोटाले की जांच कर रही थी और अब इस नए नाला सफाई घोटाले को भी उसी जांच दायरे में शामिल कर लिया गया है। घाडगे ने यह आशंका भी जताई है कि एस वॉर्ड में देखी गई यह धोखाधड़ी केवल एक मामला नहीं, बल्कि यह पूरे मुंबई में फैले व्यापक भ्रष्टाचार का हिस्सा हो सकती है, जिसकी गहन और बहुस्तरीय जांच आवश्यक है। यह घोटाला न केवल बीएमसी की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करता है, बल्कि यह भी दर्शाता है कि किस प्रकार जनता की सुरक्षा और करदाताओं के धन से जुड़े बुनियादी कार्यों में भी भ्रष्टाचार की गहरी पैठ है।

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