
मुंबई। उद्धव ठाकरे गुट छोड़कर शिवसेना (शिंदे गुट) में शामिल हुए लोकसभा सांसद संजय दिना पाटिल द्वारा पत्रकारों के खिलाफ कथित आपत्तिजनक टिप्पणी और धमकी भरे बयान को लेकर महाराष्ट्र की राजनीति में नया विवाद खड़ा हो गया है। पाटिल ने पत्रकारों से बातचीत के दौरान कथित तौर पर कहा था, “अगर दोबारा यहां आए तो मारकर भगा दूंगा, इसे कैमरे में रिकॉर्ड कर लो। मैं यह बात पुलिस के सामने कह रहा हूं, जो करना है कर लो।” इस बयान के बाद राजनीतिक और पत्रकारिता जगत में तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आईं। मामले पर अब शिवसेना प्रमुख एवं उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे और मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने भी प्रतिक्रिया दी है।
शिंदे बोले- पत्रकारों को ठेस पहुंचाने की मंशा नहीं थी
उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने कहा कि उन्होंने इस मामले में संजय दिना पाटिल से बात की है। शिंदे के अनुसार, पाटिल ने स्पष्ट किया कि उनकी मंशा पत्रकारों का अपमान करने या उनकी भावनाओं को ठेस पहुंचाने की नहीं थी। शिंदे ने कहा, “मेरे और पत्रकारों के संबंध हमेशा अच्छे रहे हैं। पत्रकारों के बारे में गलत टिप्पणी करने का उनका कोई इरादा नहीं था। हालांकि किसी भी जनप्रतिनिधि को पत्रकारों के प्रति ऐसी भाषा का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए। यदि उनसे कोई अपमानजनक शब्द निकल गए हैं, तो उन्हें सार्वजनिक रूप से खेद व्यक्त करना चाहिए।” उन्होंने यह भी कहा कि लगातार हो रही राजनीतिक बयानबाजी और व्यक्तिगत हमलों के कारण पाटिल के मन में नाराजगी हो सकती है, लेकिन इसका अर्थ यह नहीं कि पत्रकारों के प्रति उनके मन में कोई व्यक्तिगत विरोध है।
फडणवीस ने जताई सख्त नाराजगी
दूसरी ओर मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने इस पूरे प्रकरण को गंभीर बताते हुए उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के साथ हुई बैठक में नाराजगी व्यक्त की। उन्होंने शिवसेना नेताओं और मंत्रियों द्वारा हाल के दिनों में दिए गए विवादित बयानों का ब्यौरा रखते हुए स्पष्ट संदेश दिया कि महायुति सरकार ऐसे बयानों को स्वीकार नहीं करेगी। फडणवीस ने कहा कि अब संजय दिना पाटिल महायुति के सांसद हैं और भविष्य में किसी भी सांसद, विधायक या मंत्री द्वारा इस प्रकार की भाषा का प्रयोग किया गया तो उसे बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने पार्टी नेतृत्व को निर्देश देते हुए कहा कि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए विशेष सावधानी बरती जाए।
राजनीतिक और पत्रकारिता जगत में चर्चा तेज
संजय दिना पाटिल के बयान के बाद पत्रकार संगठनों और विपक्षी दलों ने भी कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। इस विवाद ने एक बार फिर जनप्रतिनिधियों की भाषा, मीडिया के प्रति व्यवहार और राजनीतिक शिष्टाचार को लेकर बहस छेड़ दी है। पत्रकार संगठनों का कहना है कि लोकतंत्र में मीडिया की स्वतंत्रता और पत्रकारों के सम्मान पर किसी भी प्रकार का हमला स्वीकार नहीं किया जा सकता। संगठनों ने आरोप लगाया कि एक जनप्रतिनिधि द्वारा पत्रकारों के प्रति धमकीपूर्ण भाषा का प्रयोग न केवल पत्रकारिता का अपमान है, बल्कि लोकतांत्रिक मूल्यों के भी खिलाफ है। वही पत्रकार संगठनों ने सामूहिक रूप से निर्णय लेते हुए संजय दिना पाटिल की प्रेस कॉन्फ्रेंस में शामिल न होने का फैसला किया और उनसे सार्वजनिक रूप से माफी मांगने की मांग की है।



