
मुंबई। महाराष्ट्र की राजनीति में नया तूफान खड़ा हो गया है। एनसीपी (एसपी) के विधायक रोहित पवार ने शिंदे गुट के मंत्री एवं पूर्व सिडको अध्यक्ष संजय शिरसाठ पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि उन्होंने नवी मुंबई की करीब 5,000 करोड़ रुपये की कीमत वाली 15 एकड़ ज़मीन नियमों की अनदेखी कर बिवलकर परिवार के उत्तराधिकारियों को सौंप दी। रोहित पवार का दावा है कि यह ज़मीन गरीबों और किसान समुदाय के लिए प्रस्तावित आवास परियोजनाओं के लिए आरक्षित थी, लेकिन 2024 में शिरसाठ की अध्यक्षता में हुई पहली बैठक में ही इसे बिवलकर परिवार को वापस दे दिया गया। पवार ने इस कदम को “स्थानीय भूमिपुत्रों के साथ विश्वासघात” बताते हुए कहा कि वर्षों से हज़ारों लोग भूमि अधिकार पाने के लिए संघर्ष कर रहे हैं, जबकि उनका हक़ छीनकर सत्ताधारी लोगों ने औपनिवेशिक काल के इनामदारों को लाभ पहुंचाया। पवार ने एक्स पर पोस्ट करते हुए लिखा- बिवलकर परिवार को अंग्रेजों ने मराठा साम्राज्य के खिलाफ भूमिका निभाने के लिए 4,000 एकड़ से अधिक ज़मीन दी थी। समय-समय पर उनके दावों को खारिज किया गया, लेकिन शिरसाठ साहब ने नियमों की अनदेखी कर 15 एकड़ ज़मीन उन्हें सौंप दी। एनसीपी विधायक ने यह भी कहा कि इस ज़मीन का इस्तेमाल किया जाता तो कम-से-कम 10,000 किफ़ायती मकान बनाए जा सकते थे, जिससे हज़ारों ज़रूरतमंद परिवारों को लाभ होता। लेकिन सरकार ने यह अवसर छीनकर गरीबों का वाजिब हिस्सा औपनिवेशिक ताक़तों से जुड़े परिवार के वारिसों को दे दिया। महा विकास अघाड़ी (एमवीए) ने इस मुद्दे को लेकर 20 अगस्त, बुधवार सुबह 11 बजे नवी मुंबई स्थित सिडको कार्यालय पर ‘विरोध मार्च’ निकालने की घोषणा की है। विपक्ष की ओर से मांग की गई है कि जमीन आवंटन तुरंत रद्द किया जाए और मंत्री संजय शिरसाठ को पद से हटाया जाए। रोहित पवार ने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से भी इस पूरे मामले का संज्ञान लेने और आवश्यक कार्रवाई करने की अपील की है।




