
मुंबई। तेजी से बदलती तकनीकी दुनिया में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) और मशीन लर्निंग की बढ़ती भूमिका पर चिंता और संभावनाओं दोनों को रेखांकित करते हुए राज्यपाल जिष्णु देव वर्मा ने कहा कि एआई का विकास केवल तकनीकी प्रगति तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि इसे अधिक संवेदनशील और समावेशी बनाया जाना आवश्यक है, ताकि समाज के अंतिम व्यक्ति तक इसका लाभ पहुँच सके। शुक्रवार को मुंबई के बीकेसी स्थित एटलस स्किलटेक यूनिवर्सिटी में ‘सेंटर फॉर प्रमोशन’ के उद्घाटन अवसर पर राज्यपाल संबोधित कर रहे थे। इस मौके पर ओ.पी.जिंदल ग्लोबल यूनिवर्सिटी के ‘सिरिल श्रॉफ सेंटर ऑफ एआई, लॉ एंड रेगुलेशन’ के सहयोग से आयोजित ‘गवर्निंग एआई: कानून, प्रौद्योगिकी और समाज’ विषयक सेमिनार का भी शुभारंभ किया गया। राज्यपाल ने कहा कि यदि तकनीक के साथ स्पष्ट उद्देश्य और मानवीय मूल्य नहीं जुड़े, तो उसका दुष्प्रभाव भी हो सकता है। उन्होंने एआई के नियमन में दया, करुणा और सहानुभूति जैसे मानवीय मूल्यों को शामिल करने की आवश्यकता पर जोर दिया। साथ ही विद्यार्थियों में समाज के कमजोर वर्गों के प्रति संवेदनशीलता विकसित करने का आह्वान किया। उन्होंने भारत के विकास मंत्र को रेखांकित करते हुए कहा कि ‘जय जवान, जय किसान, जय विज्ञान और जय अनुसंधान’ के माध्यम से देश विज्ञान और नवाचार के युग में आगे बढ़ रहा है। ‘विकसित भारत’ की अवधारणा को उन्होंने केवल आर्थिक प्रगति तक सीमित न मानते हुए ‘सर्वे भवन्तु सुखिनः’ की भावना से जोड़ते हुए समग्र विकास पर बल दिया।
पारंपरिक कलाओं के संरक्षण पर जोर
राज्यपाल ने आधुनिकता के दौर में लुप्त होती पारंपरिक कला और हस्तशिल्प पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि इनका संरक्षण अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने विश्वविद्यालयों से अपील की कि वे इन कलाओं को नया जीवन देने के लिए आगे आएँ। इस अवसर पर एआई गवर्नेंस पर आधारित रिपोर्ट का विमोचन भी किया गया। कार्यक्रम में विश्वविद्यालय की संस्थापिका डॉ. इंदु शहानी, कुलपति प्रो. सी.राज कुमार, कार्यकारी अध्यक्ष सिद्धार्थ शहानी, कुलपति डॉ. राजन वेळूकर, उद्योग जगत से सिरिल श्रॉफ और रोनी स्क्रूवाला सहित कई गणमान्य अतिथि, प्राध्यापक और छात्र बड़ी संख्या में उपस्थित रहे। कार्यक्रम की शुरुआत में राज्यपाल ने इनोवेशन सेंटर का दौरा कर विद्यार्थियों के नवाचारों की जानकारी ली और उनके प्रयासों की सराहना की।




