
मुंबई। मुख्यमंत्री देवेन्द्र फडणवीस की अध्यक्षता में मंगलवार को हुई मंत्रिमंडल बैठक में आदिवासी क्षेत्रों में शिक्षा के विस्तार को लेकर बड़ा निर्णय लिया गया। इसके तहत स्वयंसेवी संस्थाओं द्वारा संचालित 5 प्राथमिक आश्रमशालाओं को माध्यमिक स्तर तक तथा 19 माध्यमिक आश्रमशालाओं को उच्च माध्यमिक (जूनियर कॉलेज) स्तर तक उन्नत करने को मंजूरी दी गई है। इस निर्णय के साथ आवश्यक शिक्षक एवं कर्मचारियों के पद सृजन और खर्च की स्वीकृति भी प्रदान की गई है। इस फैसले के पीछे सरकार का उद्देश्य दूरदराज, पहाड़ी और नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में रहने वाले आदिवासी विद्यार्थियों को उनके ही क्षेत्र में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराना है। राज्य में 1972-73 से संचालित आश्रमशाला योजना के अंतर्गत वर्तमान में 556 अनुदानित आश्रमशालाएं कार्यरत हैं, जिनमें लाखों छात्र शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं। आर्थिक कठिनाइयों के कारण विशेषकर लड़कियां आगे की पढ़ाई के लिए बाहर नहीं जा पातीं, जिससे ड्रॉपआउट की समस्या बढ़ती है।
क्या बदलेगा इस फैसले से?
इस निर्णय के बाद 5 प्राथमिक आश्रमशालाओं में अब कक्षा 8 से 10 तक की पढ़ाई शुरू होगी, जबकि 19 माध्यमिक आश्रमशालाओं में कक्षा 11 और 12 (कला एवं विज्ञान) के जूनियर कॉलेज संचालित किए जाएंगे। इससे छात्रों को अपने ही क्षेत्र में लगातार शिक्षा जारी रखने का अवसर मिलेगा।
शिक्षा के साथ रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे
सरकार ने इस उन्नयन के लिए 5 स्कूलों में 30 शिक्षक और 25 कर्मचारियों के पद तथा 19 जूनियर कॉलेजों के लिए 148 शिक्षकों के पद सृजित करने को मंजूरी दी है। इससे स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे और शिक्षा व्यवस्था मजबूत होगी।
ड्रॉपआउट कम करने पर फोकस
सरकार का मानना है कि इस पहल से माध्यमिक और उच्च माध्यमिक स्तर पर पढ़ाई छोड़ने वाले छात्रों की संख्या में कमी आएगी, खासकर आदिवासी लड़कियों को इसका बड़ा लाभ मिलेगा।
सामाजिक-आर्थिक बदलाव की दिशा में कदम
यह निर्णय केवल शिक्षा तक सीमित नहीं है, बल्कि आदिवासी समाज के सामाजिक और आर्थिक सशक्तिकरण की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है। इससे आने वाले समय में इन क्षेत्रों के युवाओं को बेहतर अवसर मिलेंगे और उनका समग्र विकास संभव हो सकेगा।




