
मुंबई। महाराष्ट्र सरकार ने मराठी भाषा के प्रचार-प्रसार, संरक्षण और सरकारी कामकाज में इसके अधिकाधिक उपयोग को बढ़ावा देने के लिए कई महत्वाकांक्षी योजनाओं की घोषणा की है। राज्य के पुणे, नाशिक, रत्नागिरी, छत्रपति संभाजीनगर, अमरावती, नागपुर, चंद्रपुर और कोल्हापुर में अगले एक वर्ष के भीतर अत्याधुनिक मराठी भाषा विकास केंद्र स्थापित किए जाएंगे। यह घोषणा मराठी भाषा मंत्री डॉ. उदय सामंत ने विधानसभा में सदस्य सुधीर मुनगंटीवार द्वारा उठाई गई आधे घंटे की चर्चा के उत्तर में की। चर्चा में कैलास पाटील और दिलीप लांडे ने भी भाग लिया।
लंदन में बनेगा ‘मराठी भाषा वैश्विक केंद्र’
डॉ. सामंत ने बताया कि मराठी भाषा को शास्त्रीय (अभिजात) भाषा का दर्जा मिलने के बाद केंद्र सरकार को भेजे गए प्रस्ताव को अगले दो महीनों में मंजूरी मिलने की उम्मीद है। हालांकि राज्य सरकार मराठी भाषा के वैश्विक प्रसार के लिए स्वतंत्र रूप से भी कई कदम उठा रही है। उन्होंने बताया कि लंदन स्थित महाराष्ट्र मंडल की ऐतिहासिक इमारत का स्वामित्व महाराष्ट्र सरकार ने अपने अधीन ले लिया है। यहां छत्रपति शिवाजी महाराज के नाम पर ‘मराठी भाषा वैश्विक केंद्र’ स्थापित किया जाएगा, जो दुनिया भर के मराठी भाषियों के लिए एक महत्वपूर्ण केंद्र बनेगा।
बालासाहेब ठाकरे जन्मशताब्दी वर्ष में विशेष पहल
हिंदूहृदयसम्राट बालासाहेब ठाकरे की जन्मशताब्दी के अवसर पर राज्य के आठ प्रमुख शहरों में आधुनिक सुविधाओं से युक्त मराठी भाषा विकास केंद्र स्थापित करने का निर्णय लिया गया है। मंत्री ने बताया कि मराठी भाषा के विकास के लिए आवश्यक विभिन्न समितियों का गठन अगले तीन महीनों में किया जाएगा। यशवंतराव चव्हाण के नाम पर स्थापित अनुवाद समिति भारतीय भाषाओं के श्रेष्ठ साहित्य का मराठी में अनुवाद करने के साथ-साथ आर्थिक रूप से कमजोर साहित्यकारों को सहायता भी प्रदान करेगी।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़ेगी मराठी की पहुंच
राज्य सरकार वर्तमान में संचालित 39 अंतरराष्ट्रीय मराठी मंचों की संख्या बढ़ाकर 75 करने जा रही है। इसी प्रकार देश के भीतर भी 75 मंच स्थापित किए जाएंगे। उन्होंने दावा किया कि एक वर्ष में 75 मातृभाषा मंच स्थापित करने वाला महाराष्ट्र देश का पहला राज्य बनेगा।
हर जिले में होगा मराठी भाषा अधिकारी
सरकार ने प्रत्येक जिले में एक मराठी भाषा अधिकारी नियुक्त करने तथा उन्हें स्वतंत्र कार्यालय उपलब्ध कराने का निर्णय लिया है। साथ ही सरकारी कार्यालयों में मराठी नामपट्ट, सूचना पट्ट और अन्य फलक अनिवार्य रूप से लागू करने के लिए जिलाधिकारियों और पुलिस अधीक्षकों की बैठक आयोजित की जाएगी। डॉ. सामंत ने बताया कि मराठी भाषा सीखने के लिए जल्द ही एक मोबाइल ऐप विकसित किया जाएगा। परिवहन विभाग द्वारा रिक्शा चालकों और गैर-मराठी नागरिकों को मराठी सिखाने की पहल को भी मराठी भाषा विभाग आर्थिक और शैक्षणिक सहयोग प्रदान कर रहा है। इसके अलावा संत वारकरी सम्मेलन, महिला साहित्य सम्मेलन और युवा साहित्य सम्मेलन जैसे कार्यक्रम भी आयोजित किए जाएंगे। भविष्य में विश्व मराठी सम्मेलन विदेश में आयोजित करने की भी योजना है।
जेएनयू में लगेगी शिवाजी महाराज की प्रतिमा
मंत्री ने बताया कि जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू), दिल्ली में छत्रपति शिवाजी महाराज की अश्वारूढ़ प्रतिमा स्थापित की जाएगी। साथ ही कुसुमाग्रज के नाम पर मराठी अध्ययन केंद्र शुरू किया गया है। शिवाजी महाराज की गुरिल्ला युद्ध नीति (गनिमी कावा) पर आधारित पाठ्यक्रम भी शुरू किया गया है। डॉ. सामंत ने कहा कि मुंबई में निर्माणाधीन मराठी भाषा भवन का काम तेजी से चल रहा है और यह एशिया का सर्वश्रेष्ठ मातृभाषा भवन बनेगा। वहीं ऐरोली में साहित्यकारों के लिए 34 करोड़ रुपये की लागत से उपकेंद्र भी विकसित किया जा रहा है।
हिंदी परीक्षा की अनिवार्यता समाप्त
मंत्री ने एक महत्वपूर्ण घोषणा करते हुए कहा कि वर्ष 1956 के परिपत्र के आधार पर अधिकारियों के लिए लागू हिंदी भाषा परीक्षा की अनिवार्यता समाप्त करने का निर्णय लिया गया है और संबंधित परिपत्र रद्द किया जाएगा। उन्होंने आश्वासन दिया कि मराठी भाषा के संरक्षण और विकास के लिए विधानसभा सदस्यों द्वारा दिए गए सभी सुझावों पर सकारात्मक विचार कर उन्हें लागू किया जाएगा।



