
मुंबई। महाराष्ट्र सरकार ने अन्न एवं औषध प्रशासन (एफडीए) विभाग को अधिक सशक्त बनाने के लिए मानव संसाधन बढ़ाने, अत्याधुनिक प्रयोगशालाएं स्थापित करने और मिलावटी खाद्य पदार्थों के खिलाफ कार्रवाई को और प्रभावी बनाने का निर्णय लिया है। बुधवार को यह जानकारी अन्न एवं औषध प्रशासन मंत्री नरहरी झिरवाळ ने विधानसभा में एक ध्यानाकर्षण प्रस्ताव के जवाब में दी। यह मुद्दा विधायक काशीनाथ दाते द्वारा उठाया गया था। चर्चा में सुधीर मुनगंटीवार, नाना पटोले, अर्जुन खोतकर, अतुल भातखळकर, अनंत (बाला) नर, आमश्या पाडवी, मिलिंद नरोटे, जितेंद्र आव्हाड, प्रशांत बंब, रईस शेख, अभिजित पाटील, सिद्धार्थ शिरोळे और सुनील शेळके सहित कई सदस्यों ने भाग लिया।
11.93 करोड़ रुपये का मिलावटी सामान जब्त
मंत्री झिरवाळ ने बताया कि राज्यभर में दूध, दुग्ध उत्पाद, पेयजल, गुड़, मूंगफली, चाय पाउडर, खाद्य तेल, गुटखा, तंबाकू, सुगंधित सुपारी और मावा जैसे मिलावटी खाद्य पदार्थों के खिलाफ व्यापक अभियान चलाया गया। इस कार्रवाई के दौरान करीब 11.93 करोड़ रुपये मूल्य का माल जब्त किया गया। उन्होंने बताया कि विभिन्न खाद्य नमूनों की जांच की गई है और खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए नियमित निरीक्षण अभियान चलाए जा रहे हैं। इसके अलावा सर्जिकल ग्लव्स से जुड़े एक मामले में भी कार्रवाई करते हुए 74.85 लाख रुपये मूल्य का माल जब्त किया गया।
अत्याधुनिक प्रयोगशालाओं के लिए 27.30 करोड़ रुपये की मांग
मंत्री ने कहा कि राज्य की खाद्य एवं औषध परीक्षण प्रयोगशालाओं के आधुनिकीकरण के लिए केंद्र सरकार से 27.30 करोड़ रुपये की वित्तीय सहायता मांगी गई है। इस संबंध में लगातार प्रयास किए जा रहे हैं और प्रयोगशालाओं में आधुनिक उपकरण उपलब्ध कराने को लेकर सरकार सकारात्मक है। विभाग में कर्मचारियों की कमी का उल्लेख करते हुए मंत्री झिरवाळ ने बताया कि खाद्य सुरक्षा अधिकारियों के रिक्त पदों को भरने के लिए महाराष्ट्र लोकसेवा आयोग (एमपीएससी) से संपर्क किया गया है।
उन्होंने बताया कि राज्य में औषध निरीक्षकों के 200 स्वीकृत पदों में से केवल 41 अधिकारी कार्यरत हैं। वहीं, केंद्र सरकार के मानकों के अनुसार महाराष्ट्र में लगभग 1,100 खाद्य सुरक्षा अधिकारियों और 400 औषध निरीक्षकों की आवश्यकता है। इसके लिए नए प्रशासनिक ढांचे का प्रस्ताव सरकार के विचाराधीन है।
जांच रिपोर्ट मिलने में अब कम समय
मंत्री ने बताया कि पीपीपी मॉडल के तहत 22 मान्यता प्राप्त प्रयोगशालाओं के साथ समझौता किया गया है। इसके परिणामस्वरूप जांच रिपोर्ट प्राप्त होने का समय 90 दिनों से घटकर 30 से 35 दिन रह गया है। इसके अलावा छत्रपति संभाजीनगर, नाशिक, नागपुर और रायगढ़ में नई प्रयोगशालाएं स्थापित करने की प्रक्रिया चल रही है, जिनका कार्य अगले तीन से छह महीनों में पूरा होने की उम्मीद है।
शिकायतों पर होगी त्वरित कार्रवाई
मंत्री झिरवाळ ने कहा कि विभाग को मजबूत करने के लिए अधिकारियों को किराये पर वाहन उपलब्ध कराने तथा जिला स्तर पर नए कार्यालय स्थापित करने की योजना बनाई गई है। उन्होंने स्पष्ट किया कि खाद्य मिलावट, खाद्य तेलों में मिलावट, खुले में मांस बिक्री तथा अन्य अनियमितताओं से संबंधित शिकायतों की तत्काल जांच कर दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। साथ ही विभागीय अधिकारियों के खिलाफ प्राप्त शिकायतों की भी निष्पक्ष जांच कर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।



