
उन्नाव, उत्तर प्रदेश। परिषदीय विद्यालयों में Learning by Doing (LBD) को व्यवहारिक शिक्षा का प्रभावी माध्यम बनाते हुए उच्च प्राथमिक विद्यालय रामपुर गढ़ौवा, विकास क्षेत्र औरास में शनिवार को नो बैग डे के अंतर्गत जापानी मॉडल पर आधारित गतिविधियों का आयोजन किया गया। विद्यार्थियों ने गमलों एवं विद्यालय की चयनित दीवारों की रंगाई, स्वच्छता और सौंदर्यीकरण स्वयं कर सीखने को प्रत्यक्ष अनुभव से जोड़ा। इस दौरान उन्होंने श्रम के सम्मान, अनुशासन, सहयोग, समय प्रबंधन और उत्तरदायित्व जैसे महत्वपूर्ण जीवन कौशल आत्मसात किए। विद्यालय में पिछले एक वर्ष से प्रत्येक शनिवार एलबीडी के अंतर्गत जापानी मॉडल आधारित गतिविधियाँ नियमित रूप से संचालित की जा रही हैं। इनका उद्देश्य विद्यार्थियों को पुस्तकीय ज्ञान तक सीमित न रखकर वास्तविक जीवन की परिस्थितियों से जोड़ना, कार्यसंस्कृति विकसित करना तथा आत्मनिर्भर बनने के लिए प्रेरित करना है।
कार्यक्रम का संचालन विद्यालय में एलबीडी आधारित जापानी मॉडल को लागू करने वाले शिक्षक प्रदीप वर्मा के नेतृत्व में हुआ। उन्होंने कहा कि शिक्षा तभी सार्थक होती है, जब विद्यार्थी स्वयं कार्य करके सीखें। ऐसे अनुभव उनमें आत्मविश्वास, नेतृत्व क्षमता, समस्या समाधान, टीम भावना और जिम्मेदारी का विकास करते हैं।
इस अवसर पर शिक्षक रमनजीत एवं इंद्रपाल ने विद्यार्थियों के साथ मिलकर श्रमदान किया। वहीं आस्था, अंकिता, शगुन, पूनम, आशिकी, अंजली, सीरत और परी सहित अन्य विद्यार्थियों ने पूरे उत्साह के साथ सहभागिता निभाकर विद्यालय परिसर को आकर्षक स्वरूप प्रदान किया। यह पहल राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 की अनुभवात्मक, कौशल-आधारित और विद्यार्थी-केंद्रित शिक्षा की अवधारणा को सशक्त रूप से साकार करती है। रामपुर गढ़ौवा का यह नवाचार दर्शाता है कि एलबीडी, नो बैग डे और जापानी मॉडल के समन्वय से परिषदीय विद्यालय भी व्यवहारिक शिक्षा, कार्यसंस्कृति और नवाचार के प्रेरक केंद्र बन सकते हैं।

