
मुंबई। उच्च व तकनीकी शिक्षा मंत्री चंद्रकांत पाटील ने कहा है कि विद्यार्थियों के शैक्षणिक हितों की रक्षा करना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है और छात्रों के साथ किसी भी प्रकार की धोखाधड़ी या उनके भविष्य से खिलवाड़ बिल्कुल भी सहन नहीं किया जाएगा। उन्होंने प्रशासन को निर्देश दिए हैं कि छात्रों को गुमराह करने वाली संस्थाओं के खिलाफ तत्काल आपराधिक मामले दर्ज किए जाएं। मुंबई के वांद्रे स्थित डॉ. बळीराम हिरे महाविद्यालय में 132 से अधिक विद्यार्थियों को फर्जी पाठ्यक्रम और डिग्रियां देकर ठगे जाने के मामले को गंभीरता से लेते हुए मंत्री पाटील ने विस्तृत समीक्षा बैठक की। जांच में सामने आया कि मान्यता प्राप्त वास्तुशास्त्र पाठ्यक्रम चलाने वाली संस्था ने विश्वविद्यालय अनुदान आयोग की मान्यता के बिना पाठ्यक्रम संचालित कर छात्रों को भ्रमित किया। इस पर मंत्री ने विश्वविद्यालय कानून की संबंधित धाराओं के तहत संस्थान की मान्यता पर कार्रवाई करने के निर्देश दिए।उन्होंने महाराष्ट्र राज्य कृषि, पशु व मत्स्य विज्ञान, स्वास्थ्य विज्ञान, उच्च, तकनीकी एवं व्यवसायिक शिक्षा क्षेत्र की अनधिकृत संस्थाओं एवं पाठ्यक्रमों (प्रतिबंध) अधिनियम 2013 के तहत भी कार्रवाई करने को कहा। मंत्री ने चेतावनी दी कि कई अनधिकृत संस्थाएं और फर्जी विश्वविद्यालय छात्रों को झूठे वादों और मान्यता प्राप्त होने का भ्रम दिखाकर प्रवेश दिलाते हैं, जिसके बाद विद्यार्थियों को ठगी का एहसास होता है। चंद्रकांत पाटील ने छात्रों और अभिभावकों से अपील की कि किसी भी संस्थान में प्रवेश लेने से पहले संबंधित पाठ्यक्रम और संस्था की मान्यता की जांच अवश्य करें। उन्होंने कहा कि उच्च शिक्षा संचालनालय, तकनीकी शिक्षा संचालनालय तथा सक्षम प्राधिकरणों की आधिकारिक वेबसाइट पर संस्था और पाठ्यक्रम की जानकारी जांचने के बाद ही प्रवेश लेना चाहिए। भविष्य में ऐसे मामलों को रोकने के लिए मंत्री ने विभाग को विशेष कार्यप्रणाली विकसित करने के निर्देश भी दिए। साथ ही डॉ. बळीराम हिरे महाविद्यालय में प्रवेश लेने वाले 132 विद्यार्थियों के शैक्षणिक हितों की रक्षा के लिए राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के अंतर्गत “रिकग्निशन ऑफ प्रायर लर्निंग” प्रावधान का अध्ययन कर आवश्यक कार्रवाई करने को कहा गया है, ताकि छात्रों का शैक्षणिक नुकसान न हो। बैठक में उच्च व तकनीकी शिक्षा विभाग के प्रधान सचिव बी.वेणुगोपाल रेड्डी, तकनीकी शिक्षा संचालक डॉ. विनोद मोहितकर, उच्च शिक्षा संचालक डॉ. शैलेंद्र देवळाणकर, मुंबई विश्वविद्यालय के कुलगुरु डॉ. रवींद्र कुलकर्णी सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।




