
मुंबई। जनस्वास्थ्य की सुरक्षा सुनिश्चित करने के उद्देश्य से खाद्य एवं औषध प्रशासन (एफ़डीए), महाराष्ट्र ने प्रतिबंधित खाद्य पदार्थों तथा दूध में मिलावट (टैम्परिंग) के खिलाफ राज्यभर में व्यापक अभियान चलाते हुए बड़ी कार्रवाई की है। खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम 2006 के तहत की गई इस कार्रवाई में करोड़ों रुपये का प्रतिबंधित माल जब्त किया गया है। बुधवार को खाद्य व औषध प्रशासन के अन्न विभाग (मुख्यालय) के सह आयुक्त महेश चौधरी ने प्रेस विज्ञप्ति जारी कर इसकी जानकारी दी। उन्होने ने बताया कि खाद्य सुरक्षा आयुक्त, महाराष्ट्र द्वारा जारी आदेश के अनुसार गुटखा, पान मसाला, सुगंधित तंबाकू, मावा, खैनी तथा तंबाकू और निकोटीन युक्त अन्य उत्पादों के उत्पादन, भंडारण, वितरण, परिवहन और बिक्री पर राज्य में प्रतिबंध लागू है। इसके बावजूद इन प्रतिबंधित पदार्थों की अवैध बिक्री और भंडारण की शिकायतों के आधार पर खाद्य एवं औषध प्रशासन ने 1 अप्रैल 2026 से 30 अप्रैल 2026 के बीच राज्यभर में विशेष अभियान चलाया। इस दौरान कुल 290 स्थानों पर खाद्य प्रतिष्ठानों की जांच की गई और लगभग ₹2 करोड़ 52 लाख 23 हजार 684 मूल्य का प्रतिबंधित माल जब्त किया गया। कार्रवाई के तहत विभिन्न पुलिस थानों में 261 एफआईआर दर्ज की गईं तथा 288 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया। इसी क्रम में दूध में मिलावट के खिलाफ भी विशेष कार्रवाई की गई। 9 अप्रैल 2026 को अपराध प्रकटीकरण शाखा यूनिट-9, मुंबई तथा खाद्य एवं औषध प्रशासन, बृहन्मुंबई की संयुक्त टीम ने वर्सोवा क्षेत्र में छापा मारकर दूध टैम्परिंग करने वाले गिरोह का भंडाफोड़ किया। जांच में पाया गया कि नामी कंपनियों के दूध पैकेट खोलकर उनमें पानी मिलाया जा रहा था और फिर उन्हें दोबारा बाजार में बेचा जा रहा था। कार्रवाई के दौरान चार स्थानों पर छापेमारी कर 5 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया तथा वर्सोवा पुलिस स्टेशन में मामला दर्ज किया गया। जांच के लिए 8 खाद्य नमूने जब्त किए गए। साथ ही लगभग 621 लीटर मिलावटी दूध, जिसकी कीमत करीब ₹36,219 बताई गई है, नष्ट किया गया। यह कार्रवाई खाद्य एवं औषध प्रशासन मंत्री नरहरी झिरवाल, विभागीय सचिव धीरज कुमार तथा खाद्य सुरक्षा आयुक्त श्रीधर दुबे-पाटील के मार्गदर्शन में की गई। खाद्य एवं औषध प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि जनस्वास्थ्य से खिलवाड़ करने वालों के खिलाफ भविष्य में भी इसी तरह सख्त कार्रवाई जारी रहेगी।




