
मुंबई। सर्पदंश के प्रभावी उपचार विकसित करने और वैश्विक स्वास्थ्य अनुसंधान को नई गति देने के उद्देश्य से मुंबई स्थित हाफकिन प्रशिक्षण, अनुसंधान एवं परीक्षण संस्थान (HITRI) और घाना सरकार के सेंटर फॉर प्लांट मेडिसिन रिसर्च (CPMR) के बीच संभावित रणनीतिक सहयोग को लेकर महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। बुधवार को परेल स्थित हाफकिन संस्थान मुख्यालय में आयोजित इस बैठक में दोनों संस्थाओं ने वैज्ञानिक अनुसंधान, पारंपरिक औषधियों के वैज्ञानिक प्रमाणीकरण और सार्वजनिक स्वास्थ्य क्षेत्र में सहयोग की संभावनाओं पर विस्तृत चर्चा की। बैठक में हाफकिन संस्थान की निदेशक डॉ. सुवर्णा खरात सहित संस्थान के अधिकारी उपस्थित थे, जबकि घाना के उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल में CPMR के अध्यक्ष हेनरी रॉकफेलर निम्बाबोउरा, कार्यकारी निदेशक प्रोफ़ेसर एलेक्स असासे, उपकार्यकारी निदेशक डॉ. जोनास कोफी डॉनकोर, फार्माकोलॉजी एवं टॉक्सिकोलॉजी विभाग प्रमुख डॉ. स्टीफन अँटवी, घाना के नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ वैक्सीन के उपमुख्य कार्यकारी अधिकारी डॉ. फैसल नहू तथा तकनीकी सलाहकार डेविड बोआमा अचेम्पॉंग शामिल थे। बैठक में विशेष रूप से एशिया और अफ्रीका के ग्रामीण एवं वंचित क्षेत्रों में बढ़ती सर्पदंश की समस्या और उससे होने वाली विषाक्तता पर गंभीर चर्चा हुई। दोनों संस्थाओं ने वनस्पति आधारित औषधियों की मदद से सर्पदंश प्रबंधन के लिए नई उपचार पद्धतियां विकसित करने, ज़ेब्राफिश आधारित प्री-क्लिनिकल मॉडल तैयार करने, संयुक्त अनुसंधान परियोजनाएं संचालित करने, अंतरराष्ट्रीय शोध अनुदानों के लिए प्रस्ताव प्रस्तुत करने तथा वैज्ञानिक क्षमता निर्माण के लिए मिलकर कार्य करने पर सकारात्मक सहमति व्यक्त की। डॉ. सुवर्णा खरात ने कहा कि वैश्विक स्वास्थ्य चुनौतियों का सामना करने के लिए अंतरराष्ट्रीय वैज्ञानिक भागीदारी अत्यंत महत्वपूर्ण है और इससे नवोन्मेषी अनुसंधान को बढ़ावा मिलने के साथ-साथ वैज्ञानिक क्षमताएं मजबूत होंगी तथा विश्वभर के लोगों के लिए उपयोगी स्वास्थ्य समाधान विकसित किए जा सकेंगे। प्रस्तावित सहयोग के तहत शोधकर्ताओं और विद्यार्थियों की अदला-बदली, विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम, संयुक्त अध्ययन, तकनीकी हस्तांतरण तथा क्षमता विकास से जुड़े कार्यक्रमों की रूपरेखा भी तैयार की जाएगी, जिससे युवा वैज्ञानिकों को विश्वस्तरीय अनुसंधान पद्धतियों और आधुनिक तकनीकों का अनुभव प्राप्त होगा। यह बैठक भविष्य में औपचारिक सहयोग की मजबूत आधारशिला साबित हुई है और भारत तथा घाना के बीच वैज्ञानिक संबंधों को नई मजबूती देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। सार्वजनिक स्वास्थ्य, जैव-विविधता आधारित औषधि अनुसंधान, विषविज्ञान और ट्रांसलेशनल साइंस जैसे क्षेत्रों में दोनों संस्थाएं मिलकर कार्य करेंगी, जिससे नवीन उपचार पद्धतियों की खोज, अनुसंधान पारिस्थितिकी तंत्र को सुदृढ़ करने और उष्णकटिबंधीय क्षेत्रों में स्वास्थ्य परिणामों को बेहतर बनाने में मदद मिलेगी। विशेषज्ञों का मानना है कि हाफकिन संस्थान और CPMR के बीच यह सहयोग भारत-अफ्रीका वैज्ञानिक साझेदारी का एक उत्कृष्ट उदाहरण बनेगा और वैश्विक स्वास्थ्य अनुसंधान के क्षेत्र में नए मानदंड स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।



