तुकाराम मुंढे की ताबड़तोड़ कार्रवाई ने खोलीं करोड़ों के अवैध कारोबार की परतें, पूर्व आयुक्तों की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल

मुंबई। महाराष्ट्र में खाद्य एवं औषधि प्रशासन (एफडीए) की लगातार हो रही बड़ी कार्रवाइयों ने राज्यभर में हलचल मचा दी है। आयुक्त तुकाराम मुंढे के पदभार संभालने के बाद मिलावटी खाद्य पदार्थों, मिलावटी दूध, प्रतिबंधित गुटखा-पान मसाला, अवैध दवा निर्माण, भ्रामक दावे करने वाले कॉस्मेटिक उत्पादों तथा बिना लेबल वाले उत्पादों के खिलाफ व्यापक अभियान चलाया जा रहा है। कई वर्षों से महाराष्ट्र की जनता के स्वास्थ्य के साथ किस प्रकार का खिलवाड़ होता रहा, इसका अंदाजा तुकाराम मुंढे के कार्यभार संभालने के बाद लगातार सामने आ रही कार्रवाइयों से लगाया जा सकता है। बीते पिछले एक महीने में करोड़ों रुपये के प्रतिबंधित खाद्य पदार्थ, लाखों लीटर संदिग्ध व मिलावटी दूध, अवैध दवाएं, बिना लाइसेंस चल रहे औषधि निर्माण और नियमों का उल्लंघन करने वाले कॉस्मेटिक उत्पादों पर एफडीए ने लगातार कार्रवाई की है। इन खुलासों के बाद विभाग की पूर्व एफडीए आयुक्तों की कार्यप्रणाली को लेकर भी कई सवाल उठने लगे हैं कि यदि इतनी बड़ी मात्रा में अनियमितताएं मौजूद थीं, तो उन पर पहले प्रभावी कार्रवाई क्यों नहीं हुई। एफडीए की हालिया कार्रवाइयों में दूध में मिलावट करने वाले गिरोहों पर छापे मारकर लाखों लीटर मिलावटी दूध नष्ट किया गया। करोड़ों रुपये के प्रतिबंधित गुटखा और पान मसाला जब्त किए गए। पाकिस्तान निर्मित कॉस्मेटिक उत्पादों, बिना लाइसेंस आयुर्वेदिक दवा निर्माण इकाइयों और भ्रामक दावे करने वाले सौंदर्य प्रसाधनों के खिलाफ भी कठोर कार्रवाई की गई। कई मेडिकल स्टोरों के लाइसेंस निलंबित अथवा रद्द किए गए तथा अस्पतालों में मरीजों को जबरन दवाएं खरीदने के लिए मजबूर किए जाने के मामलों में भी कार्रवाई की गई। बता दें कि 14 जुलाई 2026 को मुंबई के जोगेश्वरी स्थित जे.के.सोप बाजार पर एफडीए ने छापा मारकर लगभग 10.94 लाख रुपये मूल्य का बिना लेबल वाला टॉयलेट साबुन जब्त किया। जांच में पाया गया कि उत्पादों पर बैच नंबर, निर्माण तिथि, उपयोग की अंतिम तिथि, उत्पादन लाइसेंस नंबर तथा निर्माता का नाम और पता जैसी अनिवार्य जानकारी अंकित नहीं थी। एफडीए ने साबुन के नमूने जांच के लिए भेजते हुए संबंधित आरोपी के विरुद्ध कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी है। इसी प्रकार हाल ही में प्रसिद्ध दवा ब्रांड Aciloc 150+ और Aciloc 300+ के लगभग 2.45 करोड़ रुपये मूल्य के स्टॉक पर भी एफडीए ने प्रतिबंधात्मक कार्रवाई करते हुए कंपनी को बाजार से दवा वापस मंगाने (रिकॉल) के निर्देश दिए। जांच में दवा के नाम और उसके सक्रिय घटक (एक्टिव इंग्रीडिएंट) में बदलाव के कारण डॉक्टरों, दवा विक्रेताओं और मरीजों के भ्रमित होने की आशंका जताई गई। एफडीए आयुक्त तुकाराम मुंढे ने स्पष्ट किया है कि नागरिकों के स्वास्थ्य से किसी भी प्रकार का समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा कि खाद्य पदार्थों, दवाओं और सौंदर्य प्रसाधनों से जुड़े नियमों का उल्लंघन करने वाले निर्माता, वितरक और विक्रेताओं के खिलाफ कठोर कानूनी कार्रवाई आगे भी जारी रहेगी। लगातार हो रही इन कार्रवाइयों से यह स्पष्ट संकेत मिला है कि महाराष्ट्र में खाद्य एवं औषधि प्रशासन अब मिलावटखोरों, अवैध कारोबारियों और नियमों की अनदेखी करने वालों के खिलाफ सख्त रुख अपनाए हुए है। विभाग की सक्रियता से उपभोक्ताओं में भरोसा बढ़ा है, वहीं मिलावट और अवैध कारोबार करने वालों में भय का माहौल भी दिखाई दे रहा है।

