
पीपीपी नीति से छूट को मंत्रिमंडल की मंजूरी; 49+49 वर्ष के लीज मॉडल पर होगा विकास, परिवहन मंत्री की अध्यक्षता वाली उच्चस्तरीय समिति करेगी निगरानी
मुंबई। महाराष्ट्र राज्य मार्ग परिवहन महामंडल (एसटी) की अतिरिक्त जमीनों के व्यावसायिक विकास का रास्ता साफ हो गया है। मंगलवार को मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की अध्यक्षता में हुई राज्य मंत्रिमंडल की बैठक में एसटी की जमीनों के विकास के लिए महाराष्ट्र सार्वजनिक-निजी भागीदारी (पीपीपी) नीति से छूट देने के प्रस्ताव को मंजूरी दी गई। सरकार के इस निर्णय से एसटी की जमीनों पर प्रस्तावित विकास परियोजनाओं को गति मिलने के साथ महामंडल के लिए नियमित आय का नया स्रोत तैयार होने की उम्मीद है। एसटी महामंडल के पास राज्यभर में करीब 850 स्थानों पर लगभग 3,500 एकड़ जमीन है। इनमें से कई जमीनें शहरों और महत्वपूर्ण क्षेत्रों के मध्यवर्ती स्थानों पर स्थित हैं। इन जमीनों को सार्वजनिक-निजी भागीदारी के तहत विकसित कर एसटी महामंडल की आय बढ़ाने की योजना बनाई गई है। महामंडल की कुछ जमीनों पर बस स्टेशन और उससे जुड़ी व्यावसायिक सुविधाएं विकसित की जाएंगी, जबकि कुछ स्थानों का पूरी तरह आवासीय विकास किया जा सकेगा। इसके अलावा व्यावसायिक जमीनों पर वाणिज्यिक परिसरों के साथ आवासीय और अन्य उपयोग की अनुमति मिलने से जमीन की पूरी व्यावसायिक क्षमता का इस्तेमाल किया जा सकेगा। इससे एसटी महामंडल को बड़े पैमाने पर आर्थिक लाभ मिलने की संभावना है। राज्य सरकार ने 1 सितंबर 2025 के शासन निर्णय के माध्यम से एसटी महामंडल की जमीनों को व्यावसायिक आधार पर विकसित करने की मंजूरी दी थी। इसके बाद 8 अप्रैल 2026 के शासन निर्णय के तहत महामंडल की आय बढ़ाने के लिए जमीनों को विभिन्न व्यावसायिक उद्देश्यों के लिए 49+49 वर्ष के लीज मॉडल पर विकसित करने की अनुमति दी गई। इसके तहत एसटी की जमीनों का आवासीय, गैर-आवासीय, व्यावसायिक और औद्योगिक सहित विभिन्न उद्देश्यों के लिए सार्वजनिक-निजी भागीदारी के आधार पर विकास किया जा सकेगा। परियोजनाओं को आगे बढ़ाने के लिए महामंडल ने परियोजना प्रबंधन सलाहकार, व्यवहार्यता सलाहकार, वास्तु सलाहकार और कानूनी सलाहकारों की नियुक्ति भी की है। राज्य सरकार ने 5 मार्च 2026 को महाराष्ट्र सार्वजनिक-निजी भागीदारी नीति घोषित की थी। इस नीति के तहत प्रक्रिया पूरी करने पर एसटी महामंडल की विकास परियोजनाओं में देरी होने की संभावना थी। इसे देखते हुए मंत्रिमंडल ने एसटी महामंडल की परियोजनाओं को इस नीति से छूट देने का निर्णय लिया है। एसटी महामंडल ने राज्य के कुल 213 स्थानों के विकास का प्रस्ताव सरकार के समक्ष प्रस्तुत किया है। इन सभी जमीनों के विकास के लिए मंत्रिमंडल पायाभूत सुविधा समिति और अधिकार प्राप्त समिति की मंजूरी लेने की प्रक्रिया से भी छूट दी गई है। हालांकि प्रत्येक परियोजना के लिए राज्य सरकार से अंतिम मंजूरी लेना अनिवार्य होगा। परियोजनाओं की निविदा प्रक्रिया, रियायत समझौते, संपत्ति हस्तांतरण, परियोजना क्रियान्वयन और अन्य महत्वपूर्ण मामलों में परिवहन मंत्री की अध्यक्षता वाली उच्चस्तरीय समिति के निर्देशों के अनुसार एसटी महामंडल का संचालक मंडल आगे की कार्रवाई करेगा। सरकार के इस फैसले से एसटी की वर्षों से अनुपयोगी या कम उपयोग वाली जमीनों की व्यावसायिक क्षमता का इस्तेमाल संभव हो सकेगा। इससे एक ओर बस स्टेशनों और यात्री सुविधाओं का आधुनिकीकरण होगा, वहीं दूसरी ओर एसटी महामंडल को नियमित आय का स्रोत मिलने से उसकी आर्थिक स्थिति मजबूत होने की उम्मीद है।



