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झांसी में विकसित भारत संकल्प सम्मेलन, विकास प्रदर्शनी एवं प्राकृतिक खेती कार्यशाला का भव्य आयोजन

झांसी, उत्तर प्रदेश। केंद्र सरकार के 12 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में “सेवा, संस्कार, सुशासन एवं सम्मान” की भावना पर आधारित विकसित भारत संकल्प सम्मेलन, विकास प्रदर्शनी, प्राकृतिक खेती कार्यशाला (खरीफ उत्पादकता गोष्ठी) एवं किसान दिवस का भव्य आयोजन पंडित दीनदयाल उपाध्याय सभागार में जिला प्रशासन और कृषि विभाग के संयुक्त तत्वावधान में संपन्न हुआ। कार्यक्रम में केंद्र एवं राज्य सरकार की विभिन्न योजनाओं, कृषि विकास, प्राकृतिक खेती और किसान कल्याण से जुड़ी उपलब्धियों तथा आगामी खरीफ सीजन की तैयारियों पर विस्तार से चर्चा की गई। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में विधायक जवाहर लाल राजपूत तथा सदस्य विधान परिषद रमा आर.पी.निरंजन सहित अनेक जनप्रतिनिधि एवं अधिकारी उपस्थित रहे। कृषि विभाग, कृषि रक्षा, फसल बीमा, उद्यान, पशुपालन, कौशल विकास, शिक्षा, स्वास्थ्य, महिला कल्याण, सहकारिता, पंचायत, श्रम, रेशम, पुलिस तथा स्वयं सहायता समूहों और निजी कृषि निवेश कंपनियों द्वारा विकास प्रदर्शनी एवं स्टॉल लगाए गए, जिनका अतिथियों ने अवलोकन किया। उद्घाटन सत्र में उप कृषि निदेशक बुद्ध देव द्विवेदी ने वर्ष 2014-15 से 2025-26 तक कृषि क्षेत्र में हुई प्रगति का विवरण प्रस्तुत करते हुए बताया कि प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना के तहत पात्र किसानों के खातों में डीबीटी के माध्यम से नियमित सहायता राशि पहुंचाई जा रही है। प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के अंतर्गत प्राकृतिक आपदाओं से प्रभावित किसानों को फसल क्षति का मुआवजा सीधे बैंक खातों में दिया गया है। पीएम कुसुम योजना के तहत किसानों को सौर ऊर्जा आधारित पंपों की स्थापना पर 60 प्रतिशत तक अनुदान दिया जा रहा है और जनपद में अब तक 140 सोलर पंप स्थापित किए जा चुके हैं। इसके अलावा कृषि यंत्रीकरण, किसान क्रेडिट कार्ड, मृदा स्वास्थ्य कार्ड तथा प्राकृतिक खेती प्रशिक्षण कार्यक्रमों के माध्यम से किसानों को लाभान्वित किया गया है। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए सदस्य विधान परिषद रमा निरंजन ने कहा कि किसानों, श्रमिकों और महिलाओं का सशक्तिकरण सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है। उन्होंने ग्रामीण महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने में स्वयं सहायता समूहों की भूमिका को महत्वपूर्ण बताया। जिला कृषि अधिकारी ने खरीफ सीजन के लिए पर्याप्त खाद, बीज और कीटनाशकों की उपलब्धता सुनिश्चित होने की जानकारी देते हुए विभिन्न अनुदान योजनाओं का विवरण दिया। वहीं जिला उद्यान अधिकारी, मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी तथा सहकारिता विभाग के अधिकारियों ने भी विभागीय योजनाओं की जानकारी किसानों को दी। कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिकों ने मृदा स्वास्थ्य संरक्षण और प्राकृतिक खेती के महत्व पर जोर देते हुए रासायनिक उर्वरकों एवं कीटनाशकों के दीर्घकालिक दुष्प्रभावों से किसानों को अवगत कराया। पशुपालन विशेषज्ञों ने पशु स्वास्थ्य, टीकाकरण और गोबर आधारित जैविक खाद के लाभों पर प्रकाश डाला। प्राकृतिक खेती कार्यशाला में किसान प्रतिनिधि कमलेश लंबरदार और आचार्य अविनाश ने भी किसानों को प्राकृतिक खेती अपनाने के व्यावहारिक उपाय बताए। मुख्य विकास अधिकारी रामेश्वर सुधाकर सब्बनबाड ने फसल बीमा, प्राकृतिक खेती, मनरेगा, पंचायती राज, ग्रामीण विकास, राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन, समाज कल्याण योजनाओं और स्वरोजगार कार्यक्रमों की विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने कहा कि फैमिली आईडी और फार्मर रजिस्ट्री जैसी डिजिटल पहलें किसानों और आम नागरिकों को सरकारी योजनाओं का पारदर्शी एवं त्वरित लाभ दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं तथा इससे किसानों की आय बढ़ाने में मदद मिलेगी।सम्मेलन के दौरान विभिन्न सरकारी योजनाओं के अंतर्गत पात्र लाभार्थियों को सामग्री, स्वीकृति पत्र और अन्य सहायता का वितरण भी किया गया। कार्यक्रम में प्रगतिशील किसानों, विभिन्न विभागों के अधिकारियों, कृषि विशेषज्ञों तथा बड़ी संख्या में किसानों ने भाग लिया और प्राकृतिक खेती, आधुनिक कृषि तकनीकों तथा सरकारी योजनाओं की जानकारी प्राप्त की। आयोजन का उद्देश्य किसानों को आत्मनिर्भर, तकनीकी रूप से सक्षम और टिकाऊ कृषि पद्धतियों के प्रति जागरूक बनाना था।

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