
बीएमसी मुख्यालय की कैंटीन में मिलीं 31 गंभीर खामियां, आयुक्त अश्विनी भिड़े के कार्यकाल में हुई कार्रवाई से बीएमसी स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल
मुंबई। देश की सबसे बड़ी महानगरपालिका कहे जाने वाली बृहन्मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) के मुख्यालय में संचालित कैंटीन का खाद्य पंजीकरण महाराष्ट्र खाद्य एवं औषधि प्रशासन (एफडीए) ने निलंबित कर दिया है। मुंबई की स्वच्छता और सार्वजनिक स्वास्थ्य व्यवस्था की जिम्मेदारी संभालने वाली बीएमसी के मुख्यालय स्थित कैंटीन में गंभीर स्वच्छता संबंधी अनियमितताएं मिलने के बाद यह कार्रवाई की गई है। इस कार्रवाई के बाद बीएमसी की आंतरिक व्यवस्था और निगरानी को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं। 22 जुलाई 2026 को एफडीए ने खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम, 2006 के तहत मुंबई महानगरपालिका मुख्यालय स्थित कमल कैटरर्स प्राइवेट लिमिटेड का खाद्य पंजीकरण प्रमाणपत्र तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। विभाग के अनुसार प्रतिष्ठान का पहली बार 8 जून 2026 को निरीक्षण किया गया था। जांच के दौरान सामान्य स्वच्छता, स्वास्थ्य संबंधी मानकों तथा खाद्य सुरक्षा नियमों के कई उल्लंघन पाए गए, जिसके बाद 9 जून को सुधार नोटिस जारी किया गया। यह नोटिस 16 जून को संबंधित प्रतिष्ठान को प्राप्त हुआ, लेकिन निर्धारित अवधि में न तो कोई लिखित स्पष्टीकरण दिया गया और न ही अनुपालन रिपोर्ट प्रस्तुत की गई। इसके बाद 22 जुलाई 2026 को खाद्य सुरक्षा अधिकारियों ने दोबारा निरीक्षण किया। पुनः जांच में सुधार नोटिस में बताई गई 31 की 31 कमियां यथावत पाई गईं। निरीक्षण के दौरान रसोईघर में मक्खियों का प्रकोप, भोजन तैयार करने वाले क्षेत्र में अपर्याप्त सफाई, उपकरणों का खराब रखरखाव, तापमान नियंत्रण प्रणाली में खामियां, स्वच्छता संबंधी रिकॉर्ड का अभाव, कर्मचारियों के वैध स्वास्थ्य प्रमाणपत्र नहीं होना, FoSTaC प्रशिक्षण प्रमाणपत्रों की कमी, आंतरिक एवं बाहरी खाद्य सुरक्षा ऑडिट का रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं होना तथा आवश्यक दस्तावेजों का रखरखाव नहीं किए जाने जैसी गंभीर अनियमितताएं सामने आईं। इन गंभीर खामियों को देखते हुए परिमंडल-1 की सहायक आयुक्त अनुपमा बालासाहेब पाटिल ने 22 जुलाई 2026 से प्रतिष्ठान का खाद्य पंजीकरण प्रमाणपत्र निलंबित कर दिया। निलंबन अवधि के दौरान प्रतिष्ठान को किसी भी प्रकार का खाद्य पदार्थ खरीदने, तैयार करने, बेचने अथवा वितरित करने पर रोक लगा दी गई है। साथ ही खाद्य सुरक्षा अधिकारियों को प्रतिष्ठान की नियमित निगरानी के निर्देश दिए गए हैं। एफडीए ने स्पष्ट किया है कि यदि निलंबन अवधि के दौरान प्रतिष्ठान ने खाद्य व्यवसाय जारी रखा, तो इसे बिना वैध पंजीकरण के व्यवसाय माना जाएगा और खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम, 2006 के तहत कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
बीएमसी की निगरानी व्यवस्था पर उठे सवाल
बीएमसी के पास एक बड़ा सार्वजनिक स्वास्थ्य विभाग होने के बावजूद उसके मुख्यालय में संचालित कैंटीन में लंबे समय तक स्वच्छता मानकों का पालन नहीं होने और सुधार नोटिस जारी होने के बाद भी कमियां दूर नहीं किए जाने से विभागीय निगरानी पर सवाल उठ रहे हैं। हालांकि, यह स्पष्ट नहीं है कि इन अनियमितताओं की जिम्मेदारी किस अधिकारी या विभाग की थी। ऐसे में यह मामला बीएमसी की आंतरिक निगरानी व्यवस्था को लेकर गंभीर चर्चा का विषय बन गया है।

