
‘टेक थर्सडे’ पहल का शुभारंभ, सरकारी कामकाज में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, क्लाउड और डेटा सेंटर के व्यापक उपयोग पर जोर
मुंबई। महाराष्ट्र सरकार ने सरकारी कामकाज को अधिक तेज, पारदर्शी और नागरिक-केंद्रित बनाने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई), क्लाउड टेक्नोलॉजी और आधुनिक डेटा सेंटर के व्यापक उपयोग की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। मुख्य सचिव राजेश अग्रवाल ने कहा कि राज्य सरकार का लक्ष्य सितंबर 2026 के अंत तक महाराष्ट्र को एआई के उपयोग में देश का अग्रणी राज्य बनाना है। वे गुरुवार को मंत्रालय में सूचना प्रौद्योगिकी विभाग द्वारा शुरू किए गए ‘टेक थर्सडे’ कार्यक्रम के उद्घाटन अवसर पर बोल रहे थे। इस मौके पर इलेक्ट्रॉनिक्स, सूचना प्रौद्योगिकी एवं कृत्रिम बुद्धिमत्ता विभाग के सचिव वीरेंद्र सिंह, आयुक्त एस. भुवनेश्वरी, विभिन्न विभागों के अपर मुख्य सचिव, प्रधान सचिव और अन्य वरिष्ठ अधिकारी मौजूद थे। मुख्य सचिव राजेश अग्रवाल ने कहा कि देश की 50 से 60 प्रतिशत डेटा सेंटर क्षमता और एआई इंफ्रास्ट्रक्चर महाराष्ट्र में मौजूद है। इस नेतृत्व को बनाए रखने के लिए राज्य सरकार हरित (ग्रीन) डेटा सेंटर विकसित करने पर विशेष ध्यान दे रही है। इसके लिए अक्षय ऊर्जा के उपयोग और उपचारित पानी (ट्रीटेड वाटर) के पुन: उपयोग को प्राथमिकता दी जा रही है। उन्होंने बताया कि सरकारी सूचनाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए ‘महा-एआई’ और ‘सर्वम’ जैसे एआई मॉडल राज्य सरकार के अपने सर्वर और जीपीयू इंफ्रास्ट्रक्चर पर संचालित किए जा रहे हैं। इससे संवेदनशील सरकारी डेटा किसी बाहरी क्लाउड या विदेशी सर्वर पर नहीं जाएगा और पूरी सूचना राज्य के नियंत्रण में सुरक्षित रहेगी। कृषि क्षेत्र का उल्लेख करते हुए अग्रवाल ने कहा कि एग्री-स्टैक के माध्यम से एक करोड़ से अधिक किसानों तक एआई आधारित वॉयस बॉट के जरिए कृषि संबंधी सलाह पहुंचाई जा रही है। नंदुरबार जैसे आदिवासी क्षेत्रों में किसानों को भिली भाषा में भी जानकारी उपलब्ध कराई जा रही है। वहीं सरकारी अधिकारियों को मसौदा तैयार करने, शासन निर्णय खोजने और विधानसभा एवं विधान परिषद के प्रश्नों के उत्तर तैयार करने में भी एआई आधारित सहायता दी जा रही है। मुख्य सचिव ने कहा कि महाराष्ट्र सरकार द्वारा विकसित ‘महा-एआई’ पूरी तरह सुरक्षित और स्वायत्त प्लेटफॉर्म है। उन्होंने बताया कि आने वाले समय में ‘एजेंटिक एआई’ नागरिक सेवाओं में क्रांतिकारी बदलाव लाएगा। नागरिकों को सरकारी योजनाओं के लिए आवेदन करने, डिजीलॉकर से दस्तावेज प्राप्त करने या विभिन्न सरकारी सेवाओं का लाभ लेने के लिए केवल एआई से संवाद करना होगा। इसके बाद आवेदन भरने से लेकर पूरी प्रक्रिया स्वयं एआई पूरी करेगा। उन्होंने कहा कि भविष्य में बिजली बिल का भुगतान, सबसे सस्ता यात्रा टिकट खोजकर बुक करना, होटल या रेस्तरां में टेबल आरक्षित करना और ई-मेल का जवाब देने जैसे दैनिक कार्य भी एजेंटिक एआई के माध्यम से स्वचालित रूप से किए जा सकेंगे। इस अवसर पर इलेक्ट्रॉनिक्स, सूचना प्रौद्योगिकी एवं कृत्रिम बुद्धिमत्ता विभाग के सचिव वीरेंद्र सिंह ने कहा कि प्रशासनिक व्यवस्था को बदलती तकनीक के अनुरूप तैयार करने और अधिकारियों में तकनीकी दक्षता बढ़ाने के उद्देश्य से ‘टेक थर्सडे’ पहल शुरू की गई है। उन्होंने बताया कि लगभग 13 वर्ष पहले शुरू हुए ‘टेक सैटरडे’ कार्यक्रम को अब नए स्वरूप में ‘टेक थर्सडे’ के रूप में आगे बढ़ाया गया है। इससे प्रशासन में कृत्रिम बुद्धिमत्ता का उपयोग और अधिक प्रभावी होगा। कार्यक्रम में सबमर इंडिया के एआई डेटा सेंटर डिजाइन एंड बिल्ड के उपाध्यक्ष सलीम सय्यद ने आधुनिक डेटा सेंटर की आवश्यकता पर प्रस्तुति देते हुए कहा कि एआई, क्लाउड कंप्यूटिंग और डिजिटल सेवाओं के तेजी से बढ़ते उपयोग के कारण उच्च क्षमता वाले डेटा सेंटर की मांग लगातार बढ़ रही है। उन्होंने बताया कि टियर-4 डेटा सेंटर सबसे विश्वसनीय माने जाते हैं और बैंक, शेयर बाजार, सरकारी संस्थाएं तथा वित्तीय संगठन इन्हें प्राथमिकता देते हैं। सार्वजनिक क्षेत्र विषय पर सर्वम एआई के जीटीएम साहिल खेतान ने दैनिक जीवन में चैटजीपीटी और जनरेटिव एआई के उपयोग पर विस्तृत जानकारी दी। कार्यक्रम में महाआईटी के मुख्य परिचालन अधिकारी भगवान पाटील, उपाध्यक्ष अमोद कबाड़े तथा अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित थे।

