HomeArchitectureBreakingएसडीजी सूचकांकों में महाराष्ट्र को देश में नंबर-1 बनाने का लक्ष्य

एसडीजी सूचकांकों में महाराष्ट्र को देश में नंबर-1 बनाने का लक्ष्य

मुख्यमंत्री फडणवीस ने विभागों को दिए चार साल का रोडमैप तैयार करने के दिए निर्देश

आकांक्षी 10 जिलों और 177 तालुकों के समग्र विकास पर रहेगा फोकस, हर तीन महीने होगी प्रगति की समीक्षा

मुंबई। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने राज्य के सभी विभागों को अगले चार वर्षों के लिए परिणाम आधारित (आउटकम बेस्ड) विकास योजना तैयार करने के निर्देश देते हुए कहा है कि नीति आयोग के शाश्वत विकास लक्ष्य (एसडीजी) के सभी सूचकांकों में महाराष्ट्र को देश में प्रथम स्थान पर लाना राज्य सरकार का लक्ष्य है। उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र की क्षमता को देखते हुए वर्ष 2030 तक राज्य को विकास के हर पैमाने पर अग्रणी बनाने के लिए योजनाओं का पुनर्गठन और प्रभावी क्रियान्वयन आवश्यक है। गुरुवार को सह्याद्री अतिथि गृह में आयोजित सामाजिक क्षेत्र वॉर रूम की बैठक में मुख्यमंत्री ने नीति आयोग के 17 शाश्वत विकास सूचकांकों पर राज्य की प्रगति की विस्तृत समीक्षा की। इस दौरान मुख्यमंत्री कार्यालय के प्रधान सचिव श्रीकर परदेशी ने विभिन्न सूचकांकों पर प्रस्तुति दी। मुख्यमंत्री फडणवीस ने राज्य सरकार द्वारा घोषित 10 आकांक्षी जिलों और 177 आकांक्षी तालुकों में नीति आयोग के मानकों के अनुरूप व्यापक विकास कार्य करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि आने वाले चार वर्ष महाराष्ट्र के विकास के लिए निर्णायक होंगे और इसी अवधि में योजनाओं को मजबूत बनाकर राज्य को देश में अग्रणी बनाया जा सकता है।
बजट और योजनाओं को एसडीजी लक्ष्यों से जोड़ा जाए
मुख्यमंत्री ने कहा कि आगामी बजट और विभागीय योजनाओं को शाश्वत विकास लक्ष्यों की पूर्ति से जोड़ा जाए। प्रत्येक विभाग अपने संबंधित सूचकांकों का गहन अध्ययन कर कार्यप्रणाली और नीतियों में आवश्यक सुधार करे तथा देश के अग्रणी राज्यों की सर्वोत्तम कार्यपद्धतियों को अपनाए।
रियल टाइम डेटा पर विशेष जोर
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि योजनाओं की प्रभावशीलता बढ़ाने के लिए रियल टाइम डेटा संग्रहण और विश्लेषण को मजबूत किया जाए। उन्होंने कहा कि कई बार वास्तविक स्थिति और उपलब्ध आंकड़ों में अंतर दिखाई देता है। ऐसे मामलों में डेटा गैप की पहचान कर प्राथमिक और रियल टाइम डेटा के आधार पर निर्णय लिए जाएं। उन्होंने कहा कि उपलब्ध विभिन्न डेटाबेस का विश्लेषण कर यह तय किया जाए कि कौन-से जिले, क्षेत्र या सेक्टर विकास में पीछे हैं और वहां तत्काल सुधारात्मक कदम उठाए जाएं।
परिणाम आधारित प्रशासन विकसित करने के निर्देश
देवेंद्र फडणवीस ने कहा कि केवल योजनाएं लागू करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उनके वास्तविक परिणामों का आकलन भी किया जाना चाहिए। उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य विभाग को केवल उपचार की व्यवस्था तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि यह भी देखा जाए कि योजनाओं के बाद मरीजों की संख्या, स्वास्थ्य लाभ और सेवाओं की गुणवत्ता में कितना सुधार हुआ।उन्होंने स्वास्थ्य, शिक्षा, बुनियादी ढांचा और सामाजिक विकास जैसे क्षेत्रों में वास्तविक बदलाव को मापने तथा उसी आधार पर नीतियों में सुधार करने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रशासन में आउटकम और इम्पैक्ट आधारित कार्य संस्कृति विकसित की जानी चाहिए।
हर तीन महीने होगी समीक्षा
मुख्यमंत्री ने कहा कि नीति आयोग के शाश्वत विकास सूचकांक राज्य के विकास का आईना हैं। इसलिए इन सूचकांकों पर राज्य की प्रगति की समीक्षा हर तीन महीने में की जाए। साथ ही मुख्य सचिव स्तर पर भी नियमित निगरानी सुनिश्चित की जाए। उन्होंने निर्देश दिया कि आकांक्षी क्षेत्रों में किए जा रहे निवेश के परिणामों की लगातार समीक्षा की जाए और एसडीजी लक्ष्यों पर प्रदर्शन को सभी अधिकारियों की प्रमुख कार्य निष्पादन सूचकांक (केपीआई) का अनिवार्य हिस्सा बनाया जाए।
जहां राज्य आगे है, वहां बढ़त कायम रखें
मुख्यमंत्री ने कहा कि ऊर्जा, सतत (सस्टेनेबल) शहरों सहित जिन क्षेत्रों में महाराष्ट्र का प्रदर्शन अच्छा है, वहां इस बढ़त को बनाए रखा जाए। वहीं जिन क्षेत्रों में राज्य पीछे है, वहां कमियों की पहचान कर विशेष रणनीति के साथ सुधार किया जाए। बैठक में मुख्य सचिव राजेश अग्रवाल, पुलिस महानिदेशक सदानंद दाते, मुख्यमंत्री के अपर मुख्य सचिव लोकेश चंद्रा, विभिन्न विभागों के अपर मुख्य सचिव, प्रधान सचिव एवं सचिव, सेंटर फॉर इफेक्टिव गवर्नेंस ऑफ इंडियन स्टेट्स के अध्यक्ष एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी शंकर नारायणन, सदस्य विनी महाजन, आलिशा लकड़ावाला सहित कई वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

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