
भूपेन्द्र सिंह/उन्नाव, उत्तर प्रदेश। उन्नाव जनपद में नवाबगंज स्थित खण्ड विकास अधिकारी कार्यालय के सभागार में पारिस्थितिक विज्ञान एवं पर्यावरण के अंतर्गत पर्यावरणीय शिक्षा प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में विभिन्न विकास खण्डों से आए ग्राम प्रधानों एवं कृषकों को कीटनाशकों और रासायनिक उर्वरकों के संतुलित एवं सतत उपयोग के बारे में जानकारी दी गई। कार्यक्रम के दौरान विशेषज्ञों ने रासायनिक उर्वरकों के अत्यधिक उपयोग से होने वाले दुष्प्रभावों पर प्रकाश डालते हुए उनके कम प्रयोग का आग्रह किया। प्रशिक्षण सत्र में डॉ. राजीव वर्मा ने ग्राम प्रधानों को जैविक खेती अपनाने के लिए प्रेरित किया और बताया कि अधिक मात्रा में रसायनों के उपयोग से मिट्टी की उर्वरता और पर्यावरण दोनों पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है। उन्होंने गंगा किनारे के गांवों में हो रही जैविक खेती के उदाहरण देते हुए जैविक उत्पादों को बढ़ावा देने पर जोर दिया। जिला कृषि अधिकारी उन्नाव ने भी अपने संबोधन में किसानों से रासायनिक उर्वरकों के स्थान पर गौ-आधारित प्राकृतिक खेती अपनाने का आह्वान किया। उन्होंने जीवामृत, घनजीवामृत, दशपर्णीय अर्क और नीम ऑयल जैसे प्राकृतिक विकल्पों के उपयोग के फायदे बताए और कहा कि इससे खेती की लागत कम होने के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण भी संभव है। कार्यक्रम के अंतर्गत नवाबगंज स्थित गौशाला में ग्राम प्रधानों को जीवामृत तैयार करने की प्रक्रिया का प्रदर्शन किया गया। साथ ही वर्मी कम्पोस्ट, गोबर से बने पेंट और एजोला जैसे वैकल्पिक कृषि संसाधनों के बारे में भी विस्तार से जानकारी दी गई। इस प्रशिक्षण कार्यक्रम का उद्देश्य किसानों और जनप्रतिनिधियों को पर्यावरण अनुकूल खेती के प्रति जागरूक करना और टिकाऊ कृषि प्रणाली को बढ़ावा देना रहा।




