मुंबई। किसानों को खेती के लिए पर्याप्त पानी उपलब्ध कराने हेतु जलसंचय बढ़ाना, सिंचन क्षमता का विस्तार करना और जल प्रबंधन को प्रभावी बनाना बेहद आवश्यक है। इसके लिए सभी संबंधित विभागों को समन्वय के साथ काम करना चाहिए। यह निर्देश महाराष्ट्र की जलापूर्ति राज्यमंत्री मेघना साकोरे-बोर्डीकर ने दिए। सोमवार को निर्मल भवन स्थित एमएसआरडीसी कार्यालय में आयोजित समीक्षा बैठक में वे बोल रही थीं। बैठक में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से जिलाधिकारी संजय चव्हाण, जिला परिषद के मुख्य कार्यकारी अधिकारी तथा संबंधित विभागों के अधिकारी शामिल हुए। बैठक में भूजल स्तर बढ़ाने के लिए व्यापक उपाययोजनाओं की आवश्यकता पर जोर दिया गया। किसानों को सिंचाई के लिए अधिक से अधिक नहर का पानी उपलब्ध कराने, जलसंचय क्षमता बढ़ाने के लिए तालाब, झील, बांध और नहरों की मरम्मत एवं सुदृढ़ीकरण के कार्य तेज गति से पूर्ण करने के निर्देश दिए गए। बाढ़ के पानी के प्रभावी संचयन पर जोर राज्यमंत्री साकोरे-बोर्डीकर ने कहा कि हर वर्ष बड़ी मात्रा में बारिश और बाढ़ का पानी बहकर व्यर्थ चला जाता है। इसे रोकने के लिए नदियों और तालाबों का गहरीकरण, नए चेकडैम और बांध निर्माण, नालों का सुधार तथा बाढ़ के पानी के वैज्ञानिक संचयन की योजना बनाई जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि कई गांवों को नदी में बाढ़ आने से खतरा रहता है, इसलिए ऐसे क्षेत्रों में स्थायी और त्वरित उपाय किए जाएं। गांवों की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए बाढ़ नियंत्रण के कार्य गुणवत्ता और मानक के अनुसार पूरे किए जाएं। जलसंकट को देखते हुए नियमित ऑडिट के निर्देश बैठक में जलसंकट की स्थिति को देखते हुए सभी परियोजनाओं का नियमित ऑडिट करने के निर्देश भी दिए गए। साथ ही जलयुक्त शिवार अभियान और ‘गाळमुक्त धरण, गाळयुक्त शिवार’ योजना को अधिक प्रभावी तरीके से लागू करने पर जोर दिया गया। बांधों से निकाली जाने वाली गाद को खेती में उपयोग करने के लिए किसानों को आगे आने का आवाहन भी किया गया। कई गांव अभी भी टैंकरों पर निर्भर बैठक में जानकारी दी गई कि राज्य के कई गांव अभी भी टैंकरों के जरिए पानी आपूर्ति पर निर्भर हैं। कुछ गांवों में नियमित रूप से दो से तीन टैंकर चलाए जा रहे हैं। यदि जलसंचय व्यवस्था में सुधार नहीं हुआ तो भविष्य में और अधिक गांवों को टैंकरों की जरूरत पड़ सकती है।राज्यमंत्री ने कहा कि जहां पहले के कार्य अधूरे हैं, उन्हें तत्काल पूरा किया जाए। नदी पात्रों का वैज्ञानिक तरीके से चौड़ीकरण, गाद निकालना और बारिश से पहले नियोजनबद्ध कार्य पूरे करने के निर्देश भी दिए गए। पाइपलाइन और ड्रिप सिंचाई को बढ़ावा किसानों के लिए सिंचन क्षेत्र बढ़ाने के उद्देश्य से पाइपलाइन के जरिए पानी वितरण, प्रेशर इरिगेशन सिस्टम, ड्रिप सिंचाई और जल संरक्षण तकनीकों के उपयोग पर विशेष जोर दिया गया। उन्होंने कहा कि बंद पाइपलाइन प्रणाली से पानी की बर्बादी कम होगी और अधिक क्षेत्र को सिंचाई के दायरे में लाया जा सकेगा। जल बचत, जलसंचय वृद्धि और टिकाऊ सिंचन व्यवस्था से कृषि उत्पादन में भी बढ़ोतरी होगी।