
पाकिस्तान के रक्षामंत्री ने एक बयान देकर इस्लामिक स्टेट में कि मेरे पूर्वज हिंदू थे, मधुमक्खी के छत्ते पर पत्थर मारने का काम किया है। पाकिस्तानी रक्षा मंत्री ख़्वाजा आसिफ के बयान पर बवाल मचना स्वाभाविक ही है, क्योंकि पाकिस्तानी कट्टरपंथी मुसलमानों, खासकर सुन्नी मुसलमानों को यह बात पचाने में मुश्किल हो रही है। पाकिस्तानी बच्चों को उनके सच्चे इतिहास और संस्कृति की जड़ों से दूर करने के लिए स्कूली पाठ्यक्रम से वास्तविक इतिहास नहीं पढ़ाया जा रहा। ऐसा करके बच्चों के मासूम दिलों में नफरत का ज़हर घोला जा रहा है। रक्षामंत्री ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि हमारी जड़ें सम्राट चन्द्रगुप्त के पहले से ही सांस्कृतिक रूप से स्थापित परंपराओं में हैं। हमारी संस्कृति ही हमारी असली पहचान है। उनकी बेबाकी से यह कहना कि पिछले कई वर्षों से हमारे बच्चों को गलत इतिहास पढ़ाकर भ्रमित करते हुए हमारी मूल जड़ों से दूर किया जा रहा है। सनातनी संस्कृति हमारी पहचान है। हम सभी हिंदुओं की संताने हैं। कोई अरब से आया नहीं है। उनका खुलकर स्वीकार करना है कि उनके पूर्वज हिंदू ही थे, जिन्हें तलवारों के बल पर जबरन मुसलमान बनाकर इस्लाम मंज़ूर करने को मजबूर किया गया है। उनका कहने का सीधा अर्थ मुसलमानों में जातियों का बंटवारा हिंदुत्व के आधार पर ही हुआ है। शेख, सैय्यद जो अपने को श्रेष्ठ मानते हैं, उनके पूर्वज हिंदू ब्राह्मण ही रहे हैं। आज जो खान-पठान खुद को कहते हैं, उनके पूर्वज क्षत्रिय जैसी बहादुर क़ौम है, जिन्होंने डटकर विदेशी हमलावरों का मुकाबला किया था। बाकी जातियां कन्वर्ट होकर उन्हीं जातियों में बंटी हैं, जो हिंदुओं की जातियां हैं। उनके अनुसार हम ईरान या अरब से नहीं आए हैं। हम मूल रूप से भारतीय ही हैं, जिन्हें हमलावरों ने मज़हब बदलने को मजबूर किया था। प्राण रक्षा मनुष्य का प्रथम धर्म है। प्राण की रक्षा के लिए भले हम मुसलमान बन गए हों, लेकिन हमारी जड़ें भारतीय संस्कृति ही हैं, जो मानवता के आरंभिक दिनों से ही हैं। इसी सांस्कृतिक एकता का परिणाम है कि सिंध प्रांत में रहने वाला मुसलमान सिंधी बोलता है और पंजाबी मुसलमान पंजाबी में ही आपस में बात करते हैं। भले ही पाकिस्तान की जुबान उर्दू हम पर थोप दी गई है। यह उर्दू भी कोई भाषा नहीं, बल्कि फौजी जुबान है, जिसमें विभिन्न समुदाय के लोग एक-दूसरे से वार्तालाप करते रहे हैं। पाकिस्तानी रक्षा मंत्री ने खुलकर कहा कि हमारे बच्चों को जड़ों से काटने के लिए आचार्य कौटिल्य द्वारा तराश कर चंद्रगुप्त को मगध का सम्राट बनाया। कालांतर में सम्राट अशोक ने बौद्ध मत का प्रचार-प्रसार पूर्वी एशिया में फैलाया। संकीर्ण विचारधारा के लोगों ने भारतीय इतिहास का सच बताने से बच्चों को मना करते हुए सम्राट चन्द्रगुप्त और महान सम्राट अशोक को ही पाठ्यक्रम से निकाल दिया। हमारे बच्चे यह तक नहीं जान पाते कि सम्राट चन्द्रगुप्त और महान अशोक सम्राट कौन थे। हमारे बच्चों को कट्टर मुसलमान बनाने का षड्यंत्र रचा गया। अरबी-ईरानी संस्कृति हम पर थोपी जा रही है। एक मासूम बच्चा जब बकरे को ज़िबह करते देखता है, तो उसमें क्रूरता की भावना आने लगती है। वही मासूम उसी माहौल में बड़ा होता है, तो उसके जेहन में हिंसा और क्रूरता भर जाती है, जिससे वह आतंकी बनकर मानवता का खात्मा करने पर तुल जाता है। पाकिस्तानी रक्षा मंत्री का परोक्ष संदेश भारत में रहने वाले मुसलमानों को भी है, जो अपनी मूल जड़ों से दूर होते जा रहे हैं। जो भारत को अपना मुल्क तो मानते हैं, लेकिन भारतीय हिंदुओं को अपना सगा नहीं मानते। अरब के लोग भारत, पाकिस्तान और बांग्लादेश के मुसलमानों को मुसलमान मानते ही नहीं। रक्षा मंत्री के कथन का आशय भारत में हिंदुत्व के कट्टरपन पर भी संकेत किया है। नफ़रत की आग जनता को ही जलाती है। हिंदू-मुस्लिम एकता के कारण ही भारत को अंग्रेजों से मुक्त कराने के लिए हिंदू-मुस्लिमों ने संयुक्त होकर बलिदान साथ-साथ दिया था। दोनों कौम हिंदू ही हैं, तो उनके साथ भेदभाव करना, शत्रुता रखना राजनीतिक नफा-नुकसान के लिए सत्ता द्वारा बांटकर आपस में लड़ाने का काम सत्ता-लोलुप लोगों द्वारा कराया जाता है। रक्षामंत्री का कथन इंगित करता है कि इसी कट्टरता का दुष्परिणाम रहा कि जो दोनों कौमें अंग्रेजों को भगाने के लिए एक सूत्र में बंधी थीं, वही भारत के बंटवारे के समय एक-दूसरे की शत्रु क्यों हो गईं। यह धार्मिक कट्टरता का ही नतीजा था कि लाखों हिंदुओं-मुसलमानों का कत्लेआम किया गया। गनीमत यह थी कि पाकिस्तान और भारत के शासकों ने दूरदर्शिता दिखाई, जो आबादी का संपूर्ण बंटवारा नहीं किया गया, ताकि समय बीतने के साथ दोनों कौमों में पुनः एकता स्थापित हो सके, लेकिन दुर्भाग्य कि ऐसा हो नहीं सका। रक्षा मंत्री द्वारा पाकिस्तानी कट्टरपंथी शासकों पर भी सवाल उठता है कि पूर्वी पाकिस्तान के मुजीबुर्रहमान की पार्टी को बहुमत मिलने के बावजूद पश्चिमी पाकिस्तान के कट्टरपंथियों ने सत्ता नहीं सौंपी और जनसंहार शुरू कर दिया, जिसका नतीजा निकला कि भारतीय नायिका इंदिरा गांधी ने पाकिस्तान के दो टुकड़े कर इतिहास ही नहीं, बांग्लादेश जैसा नया राष्ट्र बनाकर भूगोल रच दिया। अभी भी दोनों कौमों, हिंदू-मुसलमानों को शांतिपूर्वक असलियत समझने की जरूरत है। यह भी सोचना होगा कि भारतीयता खत्म कैसे हुई। कट्टरपंथी चाहे हिंदू हो या मुसलमान, अपनी जड़ों की ओर लौट जाएं और भारतीयता ही नहीं, भारतीय संस्कृति की जड़ों की ओर लौटकर पुनः भारतवर्ष बनाने के लिए कदम उठाएं। यह तभी संभव होगा, जब मुसलमान यह मान लेंगे कि उनके पूर्वज हिंदू ही थे।



