
मुंबई। चिकित्सा क्षेत्र में पांच दशकों से अधिक समय तक निस्वार्थ सेवा करते हुए हजारों मरीजों की जान बचाने, हजारों विद्यार्थियों को प्रशिक्षित करने और चिकित्सा अनुसंधान को नई दिशा देने वाले प्रा. डॉ. चित्तरंजन (सी.एन.) पुरंदरे का कार्य अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ख्यातिप्राप्त है। महिला स्वास्थ्य और प्रसूति चिकित्सा के क्षेत्र में उनके विशेष योगदान, अनुसंधान और अध्यापन ने चिकित्सा जगत की प्रतिष्ठा बढ़ाई है। उनके कार्य के सम्मान में आयोजित समारोह और आत्मकथा का विमोचन गर्व का क्षण है। यह बात खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री छगन भुजबल ने कही। शनिवार को महिला स्वास्थ्य के क्षेत्र में उल्लेखनीय सेवाएं देने वाले प्रा. डॉ. सी.एन.पुरंदरे के सम्मान में मुंबई के यशवंतराव चव्हाण सेंटर में कार्य गौरव समारोह आयोजित किया गया। कार्यक्रम में खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री छगन भुजबल, कौशल, रोजगार, उद्यमिता एवं नवाचार मंत्री मंगलप्रभात लोढा, सार्वजनिक निर्माण मंत्री शिवेंद्रसिंहराजे भोसले और सांसद सुप्रिया सुळे सहित चिकित्सा क्षेत्र के अनेक गणमान्य व्यक्ति तथा डॉ. पुरंदरे के परिजन उपस्थित थे। भुजबल ने कहा कि डॉ. पुरंदरे केवल उत्कृष्ट चिकित्सक ही नहीं, बल्कि शिक्षक और शोधकर्ता के रूप में भी उनका महत्वपूर्ण योगदान रहा है। अंतरराष्ट्रीय चिकित्सा पत्रिकाओं में उनके 140 से अधिक शोध लेख प्रकाशित हो चुके हैं। आत्मकथा केवल किए गए कार्यों की सूची नहीं होती, बल्कि वह एक पूरे दौर का इतिहास होती है। ज्ञान, अनुसंधान और कौशल का उपयोग समाज की सेवा में होना चाहिए, यह प्रेरणादायी संदेश देने वाली डॉ. पुरंदरे की जीवन यात्रा नई पीढ़ी के लिए मार्गदर्शक साबित होगी। कौशल विकास मंत्री मंगलप्रभात लोढा ने कहा कि डॉ. पुरंदरे का चिकित्सा क्षेत्र में योगदान केवल मरीजों के उपचार तक सीमित नहीं रहा, बल्कि उन्होंने महिला स्वास्थ्य के प्रति समाज में जागरूकता पैदा करने का भी महत्वपूर्ण कार्य किया। उनके लंबे अनुभव और सेवाभावी दृष्टिकोण का लाभ असंख्य मरीजों को मिला है। उन्होंने युवा चिकित्सा विद्यार्थियों से डॉ. पुरंदरे के कार्यों से प्रेरणा लेने का आह्वान किया। सार्वजनिक निर्माण मंत्री शिवेंद्रसिंहराजे भोसले ने कहा कि डॉ. पुरंदरे ने अपने कार्य के बल पर दुनिया भर में पहचान बनाई है। उनकी आत्मकथा के माध्यम से उनके जीवन और चिकित्सा सेवा के विभिन्न पहलू लोगों के सामने आएंगे। उन्होंने इस अवसर पर पुरंदरे परिवार के साथ अपने पुराने संबंधों को भी याद किया। सांसद सुप्रिया सुळे ने कहा कि प्रा. डॉ. पुरंदरे का योगदान स्वास्थ्य क्षेत्र के लिए गर्व की बात है। महिलाओं के स्वास्थ्य के लिए काम करते हुए उन्होंने मरीजों की सेवा, चिकित्सा शिक्षा और सामाजिक जिम्मेदारी का बेहतरीन समन्वय किया। महिलाओं के स्वास्थ्य को संवेदनशील दृष्टि से देखने की सोच समाज में विकसित करने में भी उनका बड़ा योगदान रहा है। डॉ. पुरंदरे ने अपने संबोधन में कहा कि महिलाओं की स्वास्थ्य सेवा करने का अवसर मिलना, युवा डॉक्टरों को तैयार करना और मातृ मृत्यु रोकने के प्रयासों में योगदान देना उनके चिकित्सा जीवन की सबसे बड़ी संतुष्टि है। उन्होंने गर्भाशय संबंधी उपचार पद्धतियों, भ्रूण शल्य चिकित्सा तथा गर्भाशय ग्रीवा के कैंसर के शल्य उपचार में कई नए प्रयोग किए। इनमें से कुछ संशोधित चिकित्सा पद्धतियों को अंतरराष्ट्रीय मान्यता मिली और वे ‘पुरंदरे तकनीक’ के नाम से पहचानी जाने लगीं। समारोह में अतिथियों ने डॉ. पुरंदरे और उनकी पत्नी का सम्मान किया। इस अवसर पर डॉ. पुरंदरे की जीवन यात्रा पर आधारित आत्मकथा ‘हैंड्स दैट हील्ड, अ हार्ट दैट लेड’ का भी विमोचन किया गया।

