बीएमसी सभागृह में नगरसेवक अमेय घोले ने उठाया मुद्दा, अवैध होर्डिंग और अधिकारियों की कार्यशैली पर लगाए गंभीर आरोप

मुंबई। बृहन्मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) के सभागृह में एच/पूर्व विभाग की सहायक आयुक्त मृदुला अंडे की कार्यप्रणाली का मुद्दा गूंजा। वार्ड क्रमांक 178 के नगरसेवक अमेय घोले ने सभागृह में सहायक आयुक्त मृदुला अंडे की कार्यशैली पर गंभीर सवाल उठाते हुए उनके कार्यकाल के दौरान हुए कामकाज की जांच कराने की मांग की। नगरसेवक अमेय घोले ने सवाल उठाया कि एच/पूर्व विभाग की सहायक आयुक्त के कार्यालय में दो एंटी चेंबर किस उद्देश्य से बनाए गए हैं? उन्होंने मृदुला अंडे के कार्यकाल के दौरान लिए गए निर्णयों और विभागीय कामकाज की जांच की मांग करते हुए प्रशासन से जवाबदेही तय करने को कहा।सभागृह में अवैध होर्डिंग का मुद्दा उठाते हुए अमेय घोले ने सहायक आयुक्त मृदुला अंडे और लाइसेंस विभाग के अधिकारियों पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने आरोप लगाया कि संबंधित अधिकारियों की कथित मिलीभगत से एच/पूर्व विभाग की सीमा में अवैध रूप से होर्डिंग लगाए जा रहे हैं। उन्होंने इस पूरे मामले की जांच कर जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। अमेय घोले ने बीएमसी के सहायक आयुक्तों की कार्यशैली पर भी सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में कई अधिकारी वातानुकूलित कार्यालयों से बाहर निकलकर क्षेत्र की वास्तविक समस्याओं को देखने तक नहीं जाते। पहले वार्ड ऑफिसर स्थानीय नगरसेवकों के साथ क्षेत्र का दौरा करते थे, नागरिकों की समस्याओं को प्रत्यक्ष रूप से समझते थे और उनके समाधान के लिए आवश्यक कदम उठाते थे, लेकिन अब यह कार्यसंस्कृति दिखाई नहीं दे रही है। विशेष बात यह है कि वार्ड क्रमांक 178 बीएमसी के एच/पूर्व विभाग के अंतर्गत नहीं आता है। इसके बावजूद नगरसेवक अमेय घोले ने एच/पूर्व विभाग की जनसमस्याओं और प्रशासनिक कार्यप्रणाली का मुद्दा बीएमसी सभागृह में उठाया। ऐसे में सवाल यह भी खड़ा हो रहा है कि जिन स्थानीय नगरसेवकों के वार्ड सीधे एच/पूर्व विभाग के अंतर्गत आते हैं, उन्हें क्षेत्र की समस्याओं और सहायक आयुक्त की कार्यप्रणाली का मुद्दा जिस प्रमुखता से उठाना चाहिए था, वह आवाज दूसरे विभाग के नगरसेवक को क्यों उठानी पड़ी? नगरसेवक अमेय घोले द्वारा बीएमसी सभागृह में उठाए गए सवालों के बाद अब एच/पूर्व विभाग की सहायक आयुक्त मृदुला अंडे की कार्यप्रणाली को लेकर नई बहस शुरू हो गई है। अब देखना यह होगा कि बीएमसी प्रशासन इन आरोपों और जांच की मांग को कितनी गंभीरता से लेता है तथा सहायक आयुक्त के कार्यकाल और अवैध होर्डिंग से जुड़े आरोपों की निष्पक्ष जांच कराता है या नहीं।



