
मुंबई। पालघर जिले के डहाणू तालुका स्थित दापचरी में अंतरराष्ट्रीय स्तर का अत्याधुनिक कृषि बाजार स्थापित किया जाएगा। इसके लिए दापचरी दुग्ध परियोजना की 558.43 हेक्टेयर जमीन महाराष्ट्र राज्य कृषि विपणन मंडल को निःशुल्क देने का महत्वपूर्ण निर्णय राज्य मंत्रिमंडल ने लिया है। मंगलवार को मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की अध्यक्षता में हुई मंत्रिमंडल की बैठक में इस प्रस्ताव को मंजूरी दी गई। दापचरी के इस अंतरराष्ट्रीय कृषि बाजार को फ्रांस के विश्व प्रसिद्ध रुंगिस बाजार की तर्ज पर विकसित किया जाएगा। परियोजना में आधुनिक थोक बाजार, कोल्ड चेन, निर्यात पैक हाउस, गोदाम, ई-नाम से जुड़ा एकीकृत नीलामी प्लेटफॉर्म और किसानों तथा व्यापारियों के लिए विभिन्न सुविधाएं विकसित की जाएंगी। सरकार का मानना है कि इस परियोजना से महाराष्ट्र के किसानों, मछुआरों और कृषि व्यापारियों को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक सीधी पहुंच मिलेगी। दापचरी के निकट विकसित हो रहा वाढवण बंदर इस परियोजना के लिए महत्वपूर्ण साबित होगा। केंद्र और राज्य सरकार ने वाढवण बंदर को विश्व के शीर्ष दस बंदरगाहों में शामिल करने का लक्ष्य रखा है। बंदरगाह के आसपास लॉजिस्टिक्स और वेयरहाउसिंग सुविधाओं का भी बड़े पैमाने पर विकास किया जाएगा। सरकार का अनुमान है कि इन परियोजनाओं से मुंबई महानगर क्षेत्र की अर्थव्यवस्था वर्ष 2030 तक 140 बिलियन डॉलर से बढ़कर 300 बिलियन डॉलर तक पहुंच सकती है। वाढवण क्षेत्र को ‘चौथी मुंबई’ के रूप में विकसित करने की योजना के तहत बुलेट ट्रेन कॉरिडोर और मुंबई कोस्टल रोड का विस्तार पालघर तक करने की योजना है। इसके साथ ही देश के सबसे बड़े बंदरगाह और नए अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के विकास को भी मंजूरी दी गई है। वाढवण बंदर की प्रस्तावित कार्ययोजना के दूसरे चरण में दापचरी टर्मिनल मार्केट, कोल्ड चेन और निर्यात पैक हाउस को शामिल किया गया है। दापचरी क्षेत्र कृषि और समुद्री उत्पादों की दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जाता है। पालघर जिले का प्रसिद्ध डहाणू चिकू, आम, शिमला मिर्च, सब्जियां, धान, नागली और वरी जैसी फसलें यहां बड़े पैमाने पर उत्पादित होती हैं। इसके अलावा मछुआरा समुदाय और समुद्री खाद्य प्रसंस्करण उद्योग की भी यहां व्यापक संभावनाएं हैं। दापचरी की भौगोलिक स्थिति भी अंतरराष्ट्रीय कृषि बाजार के लिए अनुकूल मानी जा रही है। प्रस्तावित बाजार से वाढवण बंदर लगभग 40 किलोमीटर, पालघर 62 किलोमीटर, ठाणे 118 किलोमीटर, मुंबई हवाई अड्डा 128 किलोमीटर और नवी मुंबई अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा 149 किलोमीटर की दूरी पर है। इसके अलावा नाशिक, पुणे, सूरत, वडोदरा और अहमदाबाद जैसे प्रमुख शहरों से भी इस क्षेत्र की सीधी कनेक्टिविटी उपलब्ध है। अंतरराष्ट्रीय कृषि बाजार में ई-नाम से जुड़ा एकीकृत नीलामी प्लेटफॉर्म, कोल्ड स्टोरेज, रिपनिंग चैंबर, आधुनिक गोदाम, कस्टम और क्वारंटाइन सुविधाएं, कंटेनर बे, किसान छात्रावास, प्रशिक्षण केंद्र और सुविधा कक्ष विकसित किए जाएंगे। इसके अलावा सौर ऊर्जा, जल पुनर्चक्रण, कचरा प्रबंधन, अग्नि सुरक्षा, सीसीटीवी और आधुनिक सुरक्षा व्यवस्था भी उपलब्ध कराई जाएगी। सरकार के अनुसार, इस परियोजना से किसानों और मछुआरों की आय बढ़ने के साथ उन्हें खरीदारों और निर्यातकों तक सीधी पहुंच मिलेगी। आधुनिक भंडारण और कोल्ड चेन सुविधाओं से फसल कटाई के बाद होने वाले नुकसान में 15 से 30 प्रतिशत तक कमी आने की संभावना है। परियोजना से 8 हजार से 15 हजार से अधिक प्रत्यक्ष रोजगार पैदा होने का अनुमान है। कौशल विकास कार्यक्रमों के माध्यम से स्थानीय युवाओं, महिलाओं और आदिवासी समुदायों को रोजगार के नए अवसर उपलब्ध कराए जाएंगे। वाढवण बंदर की कनेक्टिविटी और अंतरराष्ट्रीय स्तर की बुनियादी सुविधाओं के कारण डहाणू चिकू, अल्फांसो आम, फल-सब्जियों और समुद्री उत्पादों के निर्यात को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। पारदर्शी मूल्य निर्धारण और डिजिटल प्लेटफॉर्म से उत्पादकों और ग्राहकों दोनों को लाभ मिलेगा। फ्रांस के रुंगिस में स्थित दुनिया के सबसे बड़े ताजा खाद्य पदार्थों के थोक बाजार की तर्ज पर दापचरी बाजार को विकसित किया जाएगा। रुंगिस बाजार 234 हेक्टेयर क्षेत्र में फैला है और वहां हर वर्ष 29 लाख टन से अधिक खाद्य पदार्थों का कारोबार होता है। इसी वैश्विक मॉडल को अपनाकर दापचरी को महाराष्ट्र के प्रमुख कृषि, मत्स्य, निर्यात और लॉजिस्टिक्स केंद्र के रूप में विकसित करने की योजना है।

