
मुंबई। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने आज मंत्रालय स्थित राज्य आपदा प्रबंधन केंद्र में राज्यभर में वर्षा की स्थिति की समीक्षा की। बैठक में आपदा प्रबंधन मंत्री गिरीश महाजन, सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री एडवोकेट आशीष शेलार, मुख्य सचिव राजेश कुमार, जल संसाधन विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव दीपक कपूर, आपदा प्रबंधन विभाग की अतिरिक्त मुख्य सचिव सोनिया सेठी, कृषि विभाग के प्रधान सचिव विकास चंद्र रस्तोगी, लोक निर्माण विभाग के सचिव संजय दशपुते और अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे। वहीं, बृहन्मुंबई महानगरपालिका आयुक्त भूषण गगरानी, सभी संभागीय आयुक्त और जिला कलेक्टर वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए शामिल हुए। बैठक में संभागीय आयुक्तों ने अपने-अपने क्षेत्रों की वर्षा की स्थिति की जानकारी दी। रत्नागिरी, रायगढ़ और हिंगोली जिलों में अधिक वर्षा दर्ज की गई है। मौसम विभाग ने 17 से 21 अगस्त तक भारी वर्षा की चेतावनी जारी की है, जिसके मद्देनज़र मुख्यमंत्री ने प्रशासन को अगले कुछ दिनों तक पूरी सतर्कता बरतने का आदेश दिया। बीते दो दिनों में वर्षा जनित घटनाओं में सात लोगों की मौत हो चुकी है। कोंकण क्षेत्र की कुछ नदियाँ खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं, जबकि जलगाँव में भारी नुकसान दर्ज हुआ है। अलमट्टी जलाशय की स्थिति पर कर्नाटक सरकार से लगातार संपर्क बनाए रखा जा रहा है। छत्रपति संभाजीनगर संभाग के 800 गाँव प्रभावित हुए हैं, जबकि दक्षिण गढ़चिरौली में प्रशासन अलर्ट पर है। अकोला, चंदूर रेलवे, मेहकर और वाशिम में स्थिति सामान्य हो रही है। प्रारंभिक आकलन के अनुसार, विदर्भ में लगभग 2 लाख हेक्टेयर फसलों को नुकसान पहुँचा है। मुंबई में केवल आठ घंटों में 170 मिमी वर्षा हुई, जिसके चलते दो स्थानों पर जलभराव से यातायात बाधित हुआ। हालाँकि रेलवे, मेट्रो और अन्य परिवहन व्यवस्था सुचारू रही। मुख्यमंत्री ने कहा कि अगले 10 से 12 घंटे मुंबई के लिए बेहद महत्वपूर्ण हैं और इस दौरान प्रशासन को विशेष निगरानी रखनी होगी। स्थानीय प्रशासन और नगरपालिकाओं को कल के मौसम पूर्वानुमान को देखते हुए स्कूलों की छुट्टियाँ घोषित करने का अधिकार दिया गया है।मुख्यमंत्री ने नागरिकों को एसएमएस अलर्ट को गंभीरता से लेने और सावधानी बरतने की अपील की। उन्होंने स्पष्ट किया कि तत्काल सहायता के लिए मंत्रालय से संपर्क करने की आवश्यकता नहीं है, क्योंकि स्थानीय स्तर पर ही धनराशि और अधिकार उपलब्ध कराए गए हैं। घर गिरने पर तुरंत पंचनामा कर सहायता देने, खतरे की स्थिति बढ़ने से पहले पड़ोसी राज्यों से संपर्क बनाए रखने और पर्यटन स्थलों पर पुलिस सतर्कता बढ़ाने के निर्देश दिए गए। साथ ही, भूस्खलन संभावित क्षेत्रों में पहले से व्यवस्थाएँ चालू रखने और आश्रय स्थलों पर भोजन, स्वच्छ पानी व कपड़ों की पर्याप्त व्यवस्था सुनिश्चित करने का आदेश भी दिया गया।




