
अहिल्यानगर। महाराष्ट्र में देवेंद्र फडणवीस सरकार के वरिष्ठ मंत्री राधाकृष्ण विखे पाटिल और पद्मश्री विखे पाटिल सहकारी चीनी मिल के पूर्व अध्यक्षों, निदेशकों और दो बैंकों के अधिकारियों सहित कुल 54 लोगों पर फर्जी दस्तावेजों के जरिए करीब 9 करोड़ रुपये का ऋण प्राप्त करने का आरोप लगा है। पुलिस अधिकारी ने बताया कि सभी आरोपियों के खिलाफ राहता की एक अदालत ने केस दर्ज करने का निर्देश दिया, जिसके बाद सोमवार को लोनी पुलिस स्टेशन में धोखाधड़ी का मामला दर्ज किया गया है। उन्होंने बताया कि आरोपियों में पद्मश्री विखे पाटिल सहकारी कारखाना (सहकारी चीनी मिल) के तत्कालीन अध्यक्ष और निदेशकों के साथ-साथ यूनियन बैंक ऑफ इंडिया और बैंक ऑफ इंडिया के अधिकारी शामिल हैं। शिकायतकर्ता बालासाहेब विखे, जो कि एक गन्ना किसान और सहकारी मिल के सदस्य हैं, ने आरोप लगाया कि वर्ष 2004 में मिल के तत्कालीन अध्यक्ष और निदेशकों ने किसानों के नाम पर जाली दस्तावेजों से लोन पास करवाया।
कर्ज किसानों के खातों में नहीं गया
शिकायत में बताया गया कि यूनियन बैंक ऑफ इंडिया और बैंक ऑफ इंडिया के कुछ अधिकारियों की मिलीभगत से दो चरणों में – एक बार 3.11 करोड़ और दूसरी बार 5.74 करोड़ – कुल 8.85 करोड़ का ऋण पास करवाया गया। लेकिन यह राशि उन किसानों के खातों में कभी नहीं पहुँची जिनके नाम पर कर्ज लिया गया था। इसके बजाय, रकम को मिल और बैंक के अधिकारियों ने खुद निकाल लिया। आरोपियों ने इस घोटाले के तहत कथित रूप से सरकारी कृषि ऋण माफी योजना का भी गलत तरीके से फायदा उठाया। इस घोटाले की पुष्टि होने पर संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है।
कोर्ट के आदेश के बाद दर्ज हुई FIR
पुलिस ने बताया कि यह मामला दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 156(3) के तहत मजिस्ट्रेट कोर्ट में याचिका दायर करने के बाद सामने आया। कोर्ट ने पुलिस को मामले की जांच शुरू करने के निर्देश दिए हैं। इसके आधार पर अब भारतीय दंड संहिता की कई धाराओं के तहत केस दर्ज किया गया है।




