
मुंबई। बांद्रा-वर्ली सी लिंक को मुंबई का एक महत्वपूर्ण इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट बताते हुए बॉम्बे हाई कोर्ट ने सी लिंक पर टोल वसूली के लिए जारी नई टेंडर प्रक्रिया पर रोक लगाने से इनकार कर दिया है। अदालत ने कहा कि यह परियोजना पूरी तरह जनहित से जुड़ी हुई है और याचिकाकर्ता नई टेंडर प्रक्रिया में भाग लेने के लिए स्वतंत्र है। शुक्रवार को जस्टिस अद्वैत सेठना और संदेश पाटिल की वेकेशन बेंच सहकार ग्लोबल लिमिटेड द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई कर रही थी। याचिका में राजीव गांधी सी लिंक टोल प्लाजा पर यूज़र फीस वसूलने के लिए टोल ऑपरेटर नियुक्त करने संबंधी पुराने टेंडर को रद्द किए जाने को चुनौती दी गई थी। याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता सोली कूपर ने दलील दी कि 29 अप्रैल 2026 को जारी किया गया टेंडर रद्द करने का आदेश मनमाना था और उसमें केवल “प्रशासनिक कारणों” का उल्लेख किया गया था। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि अधिकारियों का उद्देश्य किसी अन्य संस्था को फायदा पहुंचाना था। वहीं, महाराष्ट्र राज्य सड़क विकास निगम (एमएसआरडीसी) की ओर से वरिष्ठ वकील वेंकटेश धोंड ने अदालत को बताया कि सहकार ग्लोबल लिमिटेड सबसे ऊंची बोली लगाने वाली कंपनी घोषित होने के बाद बातचीत प्रक्रिया में शामिल हुई थी और उसने 20 फरवरी 2026 को संशोधित अनुबंध शर्तों को स्वीकार भी कर लिया था। अदालत ने टेंडर की शर्तों के खंड 23 और 27 का हवाला देते हुए कहा कि एमएसएलएल को अनुबंध दिए जाने से पहले किसी भी बोली को अस्वीकार करने या पूरी प्रक्रिया रद्द करने का अधिकार प्राप्त है। बेंच ने कहा कि प्रथम दृष्टया ऐसा प्रतीत होता है कि विवादित आदेश टेंडर शर्तों के अनुरूप ही पारित किया गया है। हालांकि, हाई कोर्ट ने यह स्पष्ट किया कि 29 अप्रैल 2026 को जारी नई टेंडर प्रक्रिया इस याचिका के अंतिम फैसले के अधीन रहेगी। अदालत ने प्रतिवादियों को निर्देश दिया कि नई टेंडर प्रक्रिया में भाग लेने वाले सभी पक्षों को मामले के लंबित होने की जानकारी दी जाए। हाई कोर्ट ने प्रतिवादियों को 8 जून तक जवाबी हलफनामा दाखिल करने के निर्देश दिए हैं।




