
मुंबई। महाराष्ट्र के आदिवासी क्षेत्रों में मत्स्य व्यवसाय के माध्यम से रोजगार निर्माण और आर्थिक सशक्तिकरण को गति देने के उद्देश्य से लागू की जा रही “धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान योजना” की विस्तृत समीक्षा मत्स्य व्यवसाय एवं बंदरगाह मंत्री नितेश राणे की अध्यक्षता में सोमवार को मंत्रालय में आयोजित बैठक में की गई। बैठक में मत्स्य व्यवसाय आयुक्त प्रेरणा देशभ्रतार, स्थानीय मछुआरा संस्थाओं के प्रतिनिधि तथा संबंधित विभागों के अधिकारी उपस्थित थे। इस दौरान केंद्र सरकार, राज्य सरकार और लाभार्थी सहभागिता के माध्यम से संचालित विभिन्न मत्स्य परियोजनाओं की समीक्षा की गई। बैठक में जानकारी दी गई कि केंद्र सरकार ने वर्ष 2024-25 से 2028-29 तक पांच वर्षों के लिए देशभर में 375 करोड़ रुपये का प्रावधान किया है, जिसमें महाराष्ट्र को भी बड़े पैमाने पर निधि प्राप्त हुई है। मंत्री नितेश राणे ने कहा कि आदिवासी समाज के युवाओं को मत्स्य व्यवसाय से जोड़कर उन्हें आत्मनिर्भर बनाना राज्य सरकार का प्रमुख उद्देश्य है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि केंद्र और राज्य सरकार की योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक प्रभावी ढंग से पहुंचाने के लिए समन्वय के साथ कार्य किया जाए। उन्होंने कहा कि मत्स्य व्यवसाय केवल पूरक रोजगार नहीं बल्कि ग्रामीण और आदिवासी अर्थव्यवस्था को मजबूत करने वाला महत्वपूर्ण उद्योग है। “धरती आबा” अभियान के माध्यम से आदिवासी क्षेत्रों में बायोफ्लॉक, फिश केज कल्चर, फिश वेंडिंग सेंटर और कोल्ड चेन जैसी आधुनिक परियोजनाएं स्थापित कर रोजगार के नए अवसर पैदा किए जाएंगे। बैठक में प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना (PMMSY) के अंतर्गत अनुसूचित जनजाति वर्ग के लाभार्थियों को मंजूर परियोजनाओं की भी समीक्षा की गई। वर्ष 2020-21 से 2024-25 के दौरान अनुसूचित जनजाति घटक के अंतर्गत 180 परियोजनाओं के लिए लगभग 39.11 करोड़ रुपये की मंजूरी दी गई है। वर्ष 2024-25 में राज्यस्तरीय समिति द्वारा 46 पात्र लाभार्थियों के करीब 14.80 करोड़ रुपये के प्रस्ताव केंद्र सरकार को मंजूरी के लिए भेजे गए थे। इनमें बड़े एवं मध्यम आकार के बायोफ्लॉक सिस्टम, जलाशयों में केज कल्चर, इंसुलेटेड वाहन, आइस बॉक्स युक्त मोटरसाइकिल तथा जीवित मछली बिक्री केंद्र शामिल थे। केंद्र सरकार ने इनमें से 9.71 करोड़ रुपये के प्रस्तावों को मंजूरी प्रदान की है। स्वीकृत परियोजनाओं में बायोफ्लॉक यूनिट, इंसुलेटेड वाहन, मछली बिक्री केंद्र तथा जलाशय आधारित मत्स्य संवर्धन परियोजनाओं को प्राथमिकता दी गई है। वर्ष 2025-26 के लिए राज्य सरकार ने 14.96 करोड़ रुपये का संशोधित कार्य आराखड़ा केंद्र सरकार को भेजा था, जिसे मंजूरी मिल चुकी है। इस योजना में फिश हैचरी, रियरिंग पॉण्ड, बायोफ्लॉक, केज कल्चर, कोल्ड स्टोरेज, रेफ्रिजरेटेड वाहन, फिश कियोस्क तथा पारंपरिक मछुआरों के लिए नाव और जाल सहित 17 घटकों को शामिल किया गया है। बैठक में बताया गया कि योजना के तहत लाभार्थी चयन के लिए जारी विज्ञापन को राज्यभर से बड़ा प्रतिसाद मिला है और कुल 14,015 आवेदन प्राप्त हुए हैं। इनमें से 9,316 आवेदनों की जिला स्तरीय समितियों ने अनुशंसा की है। नागपुर, नाशिक और मुंबई विभागों से सबसे अधिक आवेदन प्राप्त हुए हैं। मंत्री नितेश राणे ने अधिकारियों को लाभार्थी चयन प्रक्रिया में पारदर्शिता बनाए रखने और पात्र आदिवासी युवाओं को योजनाओं का शीघ्र लाभ उपलब्ध कराने के निर्देश दिए। साथ ही उन्होंने प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना तथा धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान के अंतर्गत लंबित आवेदकों को “प्रधानमंत्री खनिज क्षेत्र कल्याण योजना” के माध्यम से लाभ देने की प्रक्रिया तेज करने के भी निर्देश दिए।




