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झांसी सीजीएसटी कार्यालय में रिश्वतखोरी रैकेट का पर्दाफाश, सीबीआई ने आईआरएस अधिकारी समेत पांच को किया गिरफ्तार

नए साल की पूर्व संध्या पर बड़ी कार्रवाई, 1.60 करोड़ नकद और सोना-चांदी बरामद

झांसी। भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस नीति के तहत केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) ने उत्तर प्रदेश के झांसी स्थित केंद्रीय वस्तु एवं सेवा कर (सीजीएसटी) कार्यालय में सक्रिय एक बड़े रिश्वतखोरी रैकेट का खुलासा किया है। नए साल की पूर्व संध्या पर हुई इस कार्रवाई से पूरे विभाग में हड़कंप मच गया है। सीबीआई ने एक आईआरएस अधिकारी, दो अधीक्षकों, एक वकील और एक निजी कंपनी के मालिक सहित कुल पांच लोगों को गिरफ्तार किया है। आरोप है कि यह गिरोह जीएसटी चोरी से जुड़े मामलों को दबाने और फाइलों को रफा-दफा करने के बदले मोटी रिश्वत वसूल रहा था। सीबीआई के अनुसार, झांसी सीजीएसटी में तैनात डिप्टी कमिश्नर प्रभा भंडारी ने निजी फर्मों को अनुचित लाभ पहुंचाने के एवज में करीब 1.5 करोड़ रुपये की रिश्वत की मांग की थी। शिकायत मिलने के बाद सीबीआई ने जाल बिछाया और डिप्टी कमिश्नर के निर्देश पर रिश्वत की पहली किस्त के रूप में 70 लाख रुपये स्वीकार करते समय दो अधीक्षकों- अनिल तिवारी और अजय कुमार शर्मा को रंगे हाथों गिरफ्तार कर लिया। इसके तुरंत बाद सीबीआई ने पूरे नेटवर्क पर कार्रवाई करते हुए अन्य आरोपियों को भी हिरासत में ले लिया। गिरफ्तार किए गए अन्य आरोपियों में राजू मंगतानी, मालिक, मैसर्स जय दुर्गा हार्डवेयर (निजी व्यक्ति) और नरेश कुमार गुप्ता, अधिवक्ता, शामिल हैं, जिन पर इस पूरे सौदे में बिचौलिये की भूमिका निभाने का आरोप है। जांच एजेंसी का कहना है कि यह गिरोह जीएसटी चोरी से जुड़े मामलों में प्रभाव का इस्तेमाल कर कंपनियों को राहत दिलाने और बदले में मोटी रकम वसूलने का काम कर रहा था। गिरफ्तारी के बाद सीबीआई ने आरोपियों के विभिन्न ठिकानों पर व्यापक छापेमारी की, जिसमें अब तक लगभग 1.60 करोड़ रुपये नकद (ट्रैप मनी सहित) बरामद किए जा चुके हैं। इसके अलावा बड़ी मात्रा में सोने के आभूषण, सोने की ईंटें (बुलियन) और कई अचल संपत्तियों से जुड़े दस्तावेज भी जब्त किए गए हैं। सीबीआई अधिकारियों के मुताबिक छापेमारी की कार्रवाई अभी जारी है और बरामदगी का आंकड़ा और बढ़ सकता है। सीबीआई ने मामले में भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम और अन्य संबंधित धाराओं के तहत केस दर्ज कर आगे की जांच शुरू कर दी है। एजेंसी का कहना है कि इस कार्रवाई के जरिए यह स्पष्ट संदेश दिया गया है कि सरकारी तंत्र में भ्रष्टाचार को किसी भी स्तर पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

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