
मीरा-भायंदर। मुंबई से सटे मीरा-भायंदर में 1 जुलाई 2025 को हुई एक आपत्तिजनक घटना ने क्षेत्र की सामाजिक और व्यावसायिक स्थिरता को झकझोर कर रख दिया है। जोधपुर मिष्ठान भंडार के मालिक बाबूलाल सीरवी के साथ महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) के कुछ कार्यकर्ताओं द्वारा की गई मारपीट का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद मामला राजनीतिक और सामाजिक रूप से गरमा गया। आरोप है कि बाबूलाल से मराठी में बात न करने पर मारपीट की गई, जिसे लेकर राजस्थानी, उत्तर भारतीय (उत्तर प्रदेश व बिहार) व्यापारी वर्ग में भारी आक्रोश फैल गया है। 3 जुलाई को मीरा-भायंदर के व्यापारियों ने इस घटना के विरोध में अपने प्रतिष्ठान बंद रखे और एकजुटता प्रदर्शित की। क्षेत्र की धर्मशाला में आयोजित व्यापक आमसभा में सैकड़ों व्यापारी और स्थानीय नागरिकों ने भाग लिया, जिसमें वक्ताओं ने इस घटना को सिर्फ एक दुकानदार पर हमला नहीं, बल्कि पूरे गैर-मराठी समुदाय का अपमान करार दिया। व्यापारियों ने दोषियों की त्वरित गिरफ्तारी और मनसे कार्यकर्ताओं की गुंडागर्दी पर सख्त कार्रवाई की मांग की। इस दौरान मीरा-भायंदर के डिप्टी पुलिस कमिश्नर (डीसीपी) प्रकाश गायकवाड़ सभा स्थल पर पहुंचे और व्यापारी संघ के प्रमुख सुरेश राजपुरोहित समेत अन्य प्रतिनिधियों से बातचीत की। उन्होंने कानून-व्यवस्था बनाए रखने की अपील करते हुए भरोसा दिलाया कि आरोपियों को जल्द गिरफ्तार किया जाएगा। डीसीपी के आश्वासन के बाद व्यापारियों ने शांतिपूर्ण तरीके से जुलूस निकालकर अपना विरोध दर्ज कराया और बाबूलाल सीरवी के प्रति एकजुटता प्रकट की। बाबूलाल सीरवी, जो पिछले कई वर्षों से मीरा-भायंदर में दुकान चला रहे हैं, ने घटना पर गहरा दुख व्यक्त करते हुए कहा, “मेरे ग्राहकों में मराठी, हिंदी, गुजराती सभी समुदायों के लोग हैं। सिर्फ मराठी न बोलने पर मुझ पर हमला होना अत्यंत निंदनीय है। दोषियों को सजा मिलनी चाहिए ताकि भविष्य में कोई भी व्यापारी भय के साए में व्यवसाय न करे। इस घटना ने महाराष्ट्र में भाषा आधारित राजनीति और हिंसा पर एक बार फिर गंभीर बहस छेड़ दी है। हालांकि पुलिस प्रशासन के त्वरित हस्तक्षेप और व्यापारियों के संयमपूर्ण विरोध के चलते अब तक क्षेत्र में शांति बनी हुई है, लेकिन यह घटना सामाजिक समरसता और राज्य में गैर-मराठी समुदाय की सुरक्षा को लेकर महत्वपूर्ण सवाल जरूर खड़े करती है।



