Wednesday, April 22, 2026
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ईरान में सत्ता संतुलन बदला: IRGC के हाथों में सैन्य और कूटनीतिक नियंत्रण, वैश्विक तनाव बढ़ा

तेहरान (ईरान)। ईरान में हालिया घटनाक्रम के बीच सत्ता संतुलन में बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। अमेरिकी मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, कट्टरपंथी संगठन Islamic Revolutionary Guard Corps (IRGC) ने देश की सैन्य व्यवस्था और कूटनीतिक वार्ता तंत्र पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित कर लिया है। रिपोर्ट के मुताबिक, IRGC कमांडर Ahmad Vahidi और उनके करीबी सहयोगियों ने इस्लामिक रिपब्लिक के नेतृत्व में अहम भूमिका संभाल ली है। इस बदलाव के संकेत हाल ही में Strait of Hormuz में बढ़ी समुद्री गतिविधियों और अमेरिका के साथ प्रस्तावित शांति वार्ता को टालने के फैसले से भी मिलते हैं। वॉशिंगटन स्थित Institute for the Study of War (ISW) ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि इस बदलाव के चलते अपेक्षाकृत नरम रुख रखने वाले नेताओं, जैसे विदेश मंत्री Abbas Araghchi, को किनारे किया जा रहा है। बताया गया कि अराघची ने अमेरिका के साथ बातचीत के दौरान होरमुज़ जलडमरूमध्य को खोलने का संकेत दिया था, लेकिन IRGC ने इस फैसले को पलटते हुए इसे बंद रखने पर जोर दिया। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि वाहीदी को Mohammad Bagher Zolghadr का समर्थन मिला है, जो राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के सचिव हैं। इस गठजोड़ ने होरमुज़ जैसे अहम समुद्री मार्ग पर IRGC की पकड़ और मजबूत कर दी है। वर्तमान में ईरान की नौसेना में तेज़ हमला करने वाले जहाजों की संख्या अधिक है, क्योंकि पारंपरिक बल हालिया संघर्षों में नुकसान झेल चुके हैं। स्थिति तब और तनावपूर्ण हो गई जब ईरान ने जलडमरूमध्य से गुजरने की कोशिश कर रहे कम से कम तीन जहाजों को निशाना बनाया। इस कार्रवाई के बाद फारस की खाड़ी में सैकड़ों जहाज फंस गए हैं, जिससे वैश्विक तेल आपूर्ति पर असर पड़ने की आशंका बढ़ गई है। कूटनीतिक मोर्चे पर भी IRGC का प्रभाव साफ नजर आ रहा है। रिपोर्ट के अनुसार, जोलग़धर को ईरानी वार्ता टीम में शामिल किया गया ताकि IRGC और सर्वोच्च नेतृत्व के निर्देशों का पालन सुनिश्चित किया जा सके। इस दौरान आंतरिक मतभेद भी सामने आए, जहां अराघची पर अपनी सीमाओं से आगे जाकर लचीलापन दिखाने का आरोप लगाया गया। बताया जा रहा है कि इस विवाद के बाद वार्ता टीम को वापस तेहरान बुला लिया गया। रिपोर्ट में यह भी संकेत है कि Mojtaba Khamenei के साथ मिलकर वाहीदी अब प्रमुख निर्णयकर्ता बन गए हैं, जिससे पारंपरिक राजनीतिक नेतृत्व की भूमिका सीमित हो गई है। विश्लेषकों का मानना है कि इस नए सत्ता ढांचे के कारण पश्चिमी देशों के साथ किसी भी तरह की सार्थक बातचीत मुश्किल हो जाएगी, क्योंकि नरम रुख वाले नेताओं के पास अब निर्णय लेने की वास्तविक शक्ति नहीं बची है। फिलहाल, क्षेत्र में अस्थिरता बनी हुई है और यह स्पष्ट नहीं है कि युद्धविराम कितने समय तक कायम रहेगा। आने वाले दिनों में ईरान की रणनीति और वैश्विक प्रतिक्रिया इस संकट की दिशा तय करेगी।

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