Monday, April 20, 2026
Google search engine
HomeIndiaपाकिस्तान को अलग-थलग करने में नाकाम रही भारत की कूटनीति: कांग्रेस सांसद...

पाकिस्तान को अलग-थलग करने में नाकाम रही भारत की कूटनीति: कांग्रेस सांसद जयराम रमेश

नई दिल्ली। कांग्रेस सांसद जयराम रमेश ने सोमवार को एक बार फिर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की विदेश नीति पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि पहलगाम आतंकी हमले के बाद भी भारत पाकिस्तान को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अलग-थलग करने में असफल रहा है। जयराम रमेश ने कहा कि आर्थिक संकट से जूझ रहे पाकिस्तान की स्थिति बेहद खराब है, लेकिन इसके बावजूद वह अमेरिका-ईरान संघर्ष में मध्यस्थ की भूमिका निभा रहा है। रिपोर्ट्स के अनुसार, ईरान-अमेरिका युद्धविराम वार्ता का दूसरा दौर इस्लामाबाद में आयोजित होने वाला है, जो भारत के लिए चिंता का विषय है। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान, जिसने ओसामा बिन लादेन जैसे आतंकियों को पनाह दी और हाल ही में पहलगाम हमले में 26 लोगों की जान गई, अब वैश्विक मंच पर नई छवि बनाने में सफल हो रहा है। कांग्रेस सांसद ने 2008 के मुंबई आतंकी हमले के बाद तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की कूटनीति का उदाहरण देते हुए कहा कि उस समय पाकिस्तान को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अलग-थलग कर दिया गया था, जबकि वर्तमान सरकार ऐसा करने में विफल रही है। जयराम रमेश ने Asim Munir और अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति Donald Trump के संबंधों पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि असिम मुनीर, जिनके बयान पहलगाम हमले को बढ़ावा देने वाले रहे, वे ट्रंप के करीबी बन गए हैं, जो भारत के लिए एक बड़ा कूटनीतिक झटका है। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान ने ट्रंप और उनके सहयोगियों के साथ बेहतर तालमेल बैठाया है, जबकि भारत इस मामले में पिछड़ता नजर आ रहा है। कांग्रेस सांसद ने इस्लामाबाद में प्रस्तावित वार्ता को प्रधानमंत्री मोदी की विदेश नीति के लिए “बड़ा झटका” करार दिया और भारत की कूटनीतिक रणनीति में व्यापक बदलाव की मांग की। उन्होंने कहा कि देश को अपनी विदेश नीति में पूर्ण बदलाव की आवश्यकता है, लेकिन वर्तमान नेतृत्व इसके लिए सक्षम नहीं है। गौरतलब है कि ईरान और अमेरिका के बीच जारी दो सप्ताह का युद्धविराम 22 अप्रैल को समाप्त होने वाला है। पहले दौर की वार्ता में Strait of Hormuz और ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर सहमति नहीं बन पाई थी। ऐसे में इस्लामाबाद में होने वाली दूसरी वार्ता को बेहद अहम माना जा रहा है, क्योंकि यह संभावित बड़े सैन्य टकराव को टालने का आखिरी कूटनीतिक प्रयास हो सकता है। वैश्विक समुदाय की नजरें अब इस बैठक पर टिकी हैं, जहां आगे की दिशा तय होगी।

RELATED ARTICLES

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

- Advertisment -
Google search engine

Most Popular

Recent Comments