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अहिल्यानगर में शुरू हुआ एआई आधारित डेयरी विकास प्रोजेक्ट, पशुपालन को नई दिशा देगा: मंत्री पंकजा मुंडे

मुंबई। महाराष्ट्र की ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने और पशुपालकों की आय बढ़ाने के उद्देश्य से अहिल्यानगर जिले में ‘एकीकृत डेयरी विकास पहल’ (इंटीग्रेटेड डेयरी डेवलपमेंट इनिशिएटिव) की शुरुआत की गई है। इस अवसर पर राज्य की पशुसंवर्धन मंत्री पंकजा मुंडे ने कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई), मानवीय संवेदनाओं और पारंपरिक ज्ञान के समन्वय से महाराष्ट्र के पशुपालन क्षेत्र में नई क्रांति लाई जा सकती है। यह परियोजना कारगिल, सिंजेन्टा फाउंडेशन इंडिया और डिजिटल ग्रीन इंडिया की साझेदारी में शुरू की गई है। सोमवार को मंत्रालय में आयोजित उद्घाटन कार्यक्रम में विभाग के वरिष्ठ अधिकारी, उद्योग प्रतिनिधि तथा अहिल्यानगर जिले के पशुपालक किसान ऑनलाइन माध्यम से शामिल हुए। पंकजा मुंडे ने कहा कि राज्य सरकार का हमेशा से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने और किसानों की आमदनी बढ़ाने पर जोर रहा है। पशुपालन और दुग्ध व्यवसाय ग्रामीण जीवन का प्रमुख आधार हैं। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि यह संयुक्त पहल ‘विकसित महाराष्ट्र’ और ‘विकसित भारत’ के लक्ष्य को गति देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। उन्होंने कहा कि आधुनिक तकनीक, ‘फार्मरचैट’ जैसे एआई आधारित डिजिटल सलाह मंच और किसानों के घर तक पहुंचने वाली ‘पशु आरोग्य मित्र’ मोबाइल पशु चिकित्सा सेवा के माध्यम से हजारों पशुपालकों को सीधा लाभ मिलेगा। साथ ही ‘पशु सखी’ कार्यक्रम के जरिए महिलाओं की बढ़ती भागीदारी ग्रामीण महिला सशक्तिकरण को भी नई दिशा देगी।
26 गांवों में पहुंचेगी मोबाइल पशु चिकित्सा सेवा
इस परियोजना के तहत अहिल्यानगर जिले के राहुरी, राहता और श्रीरामपुर तहसीलों के 26 गांवों में तीन हजार से अधिक किसानों तक मोबाइल पशु चिकित्सा सेवाएं पहुंचाई जा रही हैं। इसके अलावा 120 गांवों के करीब पांच हजार किसानों को एआई आधारित डिजिटल सलाह और क्षमता निर्माण प्रशिक्षण उपलब्ध कराया जाएगा। परियोजना के अंतर्गत दो अत्याधुनिक मोबाइल पशु चिकित्सालय भी उपलब्ध कराए गए हैं। इन वाहनों में आधुनिक जांच उपकरण, आवश्यक दवाएं तथा वैक्सीन के लिए कोल्ड-चेन सुविधा मौजूद होगी। इससे पशुओं को समय पर उपचार मिलने के साथ-साथ पशु मृत्यु दर में कमी आने की उम्मीद है।
‘फार्मरचैट’ देगा स्थानीय भाषा में सलाह
परियोजना के अंतर्गत किसानों के लिए ‘फार्मरचैट’ नामक एआई संचालित वॉयस प्लेटफॉर्म भी शुरू किया गया है। यह प्लेटफॉर्म स्थानीय भाषा में पशुओं के रोग, पोषण, देखभाल और सरकारी योजनाओं से जुड़ी जानकारी उपलब्ध कराएगा। इसके अलावा ‘डिजिटल ग्रीन’ द्वारा ‘पशु सखी’ और पैरावेट कर्मियों को मास्टर ट्रेनर के रूप में प्रशिक्षित किया जाएगा, जो गांव-गांव जाकर पशु पोषण, बछड़ों की देखभाल, स्वच्छता और दुग्ध प्रबंधन संबंधी प्रशिक्षण देंगे। इस अवसर पर कारगिल एनिमल न्यूट्रिशन एंड हेल्थ के वरिष्ठ प्रबंध निदेशक रविंदर बलाईन ने कहा कि महाराष्ट्र की ग्रामीण अर्थव्यवस्था पशुपालन से गहराई से जुड़ी हुई है और यह पहल डेयरी क्षेत्र को और अधिक सशक्त बनाएगी। वहीं डिजिटल ग्रीन इंडिया की मुख्य कार्यकारी अधिकारी निधि भसीन तथा सिनजेंटा फाउंडेशन इंडिया के मुख्य कार्यकारी अधिकारी विक्रम बोराडे ने विश्वास जताया कि यह परियोजना किसानों की आय बढ़ाने और जलवायु-अनुकूल कृषि को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

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