
मुंबई। महाराष्ट्र में इस वर्ष 11 करोड़ पौधे लगाने के लक्ष्य को समयबद्ध और प्रभावी ढंग से पूरा करने के लिए आधुनिक तकनीक, सार्वजनिक-निजी भागीदारी (पीपीपी), ग्राम पंचायतों की सक्रिय भागीदारी तथा विभिन्न विभागों के समन्वय पर विशेष जोर दिया जाएगा। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने मंगलवार को हरित महाराष्ट्र अभियान की समीक्षा बैठक में अधिकारियों को यह निर्देश दिए। मुख्यमंत्री ने कहा कि वृक्षारोपण अभियान को केवल पौधे लगाने तक सीमित न रखकर उसे दीर्घकालिक और टिकाऊ बनाया जाए। इसके लिए प्रत्येक ग्राम पंचायत उपलब्ध भूमि का सर्वेक्षण कर ग्रामसभा के प्रस्ताव के माध्यम से वृक्षारोपण की कार्ययोजना तैयार करे और उसे केंद्र सरकार के पोर्टल पर अपलोड करे। उन्होंने कहा कि समय पर योजना अपलोड होने पर वृक्षारोपण की लागत का एक हिस्सा केंद्र सरकार से भी प्राप्त किया जा सकता है। बैठक में वन मंत्री गणेश नाईक, मुख्यमंत्री के मुख्य आर्थिक सलाहकार एवं ‘मित्रा’ के मुख्य कार्यकारी अधिकारी प्रवीण परदेशी, वन विभाग के अपर मुख्य सचिव मिलिंद म्हैसकर, कृषि सचिव परिमल सिंह, कृषि आयुक्त सूरज मांढरे तथा अन्य वरिष्ठ अधिकारी मौजूद थे। राज्य के सभी जिलाधिकारी और वन अधिकारी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से बैठक में शामिल हुए। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि मुख्य कार्यकारी अधिकारी, जिलाधिकारी और वन अधिकारी संयुक्त रूप से प्रत्येक गांव के लिए वृक्षारोपण का विस्तृत खाका तैयार करें तथा लक्ष्य निर्धारित करें। साथ ही ग्रामीण स्तर पर जनजागरूकता अभियान चलाकर लोगों की भागीदारी सुनिश्चित की जाए। उन्होंने बताया कि राज्य में वृक्षारोपण के लिए उपयुक्त भूमि की पहचान कर जीआईएस आधारित ‘लैंड बैंक’ तैयार किया गया है, जिसे सभी जिलाधिकारियों और संबंधित विभागों को उपलब्ध कराया जा चुका है। विभागीय आयुक्तों को नियमित समीक्षा कर शासन को प्रगति रिपोर्ट भेजने के निर्देश भी दिए गए हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि अगले वृक्षारोपण सत्र से पहले पर्याप्त पौधों की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए निजी संस्थाओं, स्वयंसेवी संगठनों तथा कृषि विश्वविद्यालयों के सहयोग से व्यापक योजना बनाई जाए। कृषि विश्वविद्यालयों और अन्य संस्थानों के पास उपलब्ध बड़ी भूमि का उपयोग भी वृक्षारोपण के लिए किया जाए। उन्होंने बताया कि वृक्षारोपण अभियान में निजी क्षेत्र की भागीदारी बढ़ाने के लिए पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (पीपीपी) मॉडल तैयार किया गया है। इस मॉडल को नगर निगमों में भी लागू करने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि बड़े पैमाने पर पौधारोपण और उसके संरक्षण को गति मिल सके। बैठक में अधिकारियों ने बताया कि पौधारोपण की निगरानी के लिए ड्रोन, उपग्रह तकनीक और जीआईएस प्रणाली का उपयोग किया जाएगा। इसके माध्यम से लगाए गए पौधों की छह महीने तक वास्तविक समय (रियल-टाइम) में निगरानी की जा सकेगी। इसके लिए महाराष्ट्र रिमोट सेंसिंग एप्लीकेशन सेंटर के माध्यम से आवश्यक तकनीकी व्यवस्था विकसित की गई है। वन विभाग ने जानकारी दी कि वर्तमान में विभाग के पास लगभग 6 करोड़ पौधे उपलब्ध हैं और अगले वर्ष तक यह क्षमता बढ़ाकर 10 करोड़ पौधों तक पहुंचाने की योजना है। इसके लिए निजी नर्सरियों को भी पीपीपी मॉडल के तहत जोड़ा जाएगा। पौधों के उत्पादन, वितरण और बिक्री में निजी निवेश बढ़ेगा, जबकि गुणवत्ता नियंत्रण और समग्र योजना की जिम्मेदारी वन विभाग निभाएगा। कृषि विभाग ने भी बताया कि कृषि विश्वविद्यालयों की नर्सरियों में करीब 15 लाख पौधे तैयार किए जा रहे हैं, जबकि मान्यता प्राप्त निजी नर्सरियों के माध्यम से 2 करोड़ 66 लाख पौधों का उत्पादन किया जा रहा है। इससे राज्य के 11 करोड़ पौधारोपण लक्ष्य को पूरा करने में पर्याप्त सहायता मिलेगी।



