
नाशिक। महाराष्ट्र के भ्रष्टाचार प्रतिबंधक विभाग (ACB) ने नाशिक ग्रामीण के येवला तालुका पुलिस थाने से जुड़े रिश्वतखोरी के एक मामले में बड़ी कार्रवाई की है। एक मामले में आरोपी न बनाने और गिरफ्तारी से बचाने के बदले कथित तौर पर ₹4 लाख की रिश्वत मांगी गई थी। शिकायत के सत्यापन के बाद एसीबी ने जाल बिछाया और कथित रिश्वत की रकम में से ₹50 हजार स्वीकार करते हुए एक निजी व्यक्ति को रंगेहाथ पकड़ा। सोमवार को एसीबी की ओर से जारी प्रेस नोट के मुताबिक इस मामले में हर्षवर्धन दिलीप बहीर, पुलिस उपनिरीक्षक, तत्कालीन नियुक्ति येवला तालुका पुलिस थाना, नाशिक ग्रामीण को आरोपी क्रमांक 1 बनाया गया है। वहीं सुनील शिवाजी बोराडे, उम्र 34 वर्ष, व्यवसाय खेती, निवासी पाटोदा, तालुका येवला, जिला नाशिक को आरोपी क्रमांक 2 तथा जगदीश तुकाराम बोराडे, उम्र 37 वर्ष, व्यवसाय हार्डवेयर दुकान, निवासी पाटोदा, तालुका येवला, जिला नाशिक को आरोपी क्रमांक 3 बताया गया है। प्रेस नोट में दर्ज जानकारी के अनुसार, शिकायतकर्ता के भाई के खिलाफ येवला तालुका पुलिस थाने में दर्ज एक अपराध के सिलसिले में कार्रवाई चल रही थी। आरोप है कि शिकायतकर्ता का नाम उस मामले में आरोपी के रूप में शामिल न करने तथा उसे गिरफ्तार न करने के बदले पुलिस उपनिरीक्षक हर्षवर्धन दिलीप बहीर ने ₹4 लाख की रिश्वत की मांग की। शिकायत मिलने के बाद एसीबी ने मामले का सत्यापन किया। प्रेस नोट के अनुसार, सत्यापन के दौरान शिकायतकर्ता से रिश्वत मांगे जाने की बात सामने आने के बाद जाल बिछाने की कार्रवाई की गई। इसी दौरान आरोपी सुनील थोराडे ने कथित तौर पर पुलिस उपनिरीक्षक हर्षवर्धन बहीर के कहने पर शिकायतकर्ता से रिश्वत की रकम में से ₹50 हजार स्वीकार किए, जिसके बाद एसीबी की टीम ने उसे रंगेहाथ पकड़ लिया।एसीबी की प्रेस नोट में यह भी कहा गया है कि रिश्वत की रकम शिकायतकर्ता से पुलिस उपनिरीक्षक तक पहुंचाने के लिए निजी व्यक्तियों की भूमिका सामने आई। इसके आधार पर संबंधित आरोपियों के खिलाफ भ्रष्टाचार प्रतिबंध अधिनियम, 1988 की संबंधित धाराओं के तहत येवला तालुका पुलिस थाने में मामला दर्ज किया गया है। इस कार्रवाई का नेतृत्व नाशिक भ्रष्टाचार प्रतिबंधक विभाग की पुलिस निरीक्षक प्रणम केदार ने किया। प्रेस नोट में कार्रवाई और जांच से जुड़े अन्य पुलिस अधिकारियों एवं कर्मचारियों का भी उल्लेख किया गया है। एसीबी ने नागरिकों से अपील की है कि यदि कोई सरकारी अधिकारी या कर्मचारी सरकारी काम करने के बदले रिश्वत की मांग करता है, तो इसकी सूचना भ्रष्टाचार प्रतिबंधक विभाग को दें। पुलिस महकमे से जुड़ा मामला, उठे गंभीर सवालजिस पुलिस व्यवस्था पर अपराध रोकने और कानून लागू करने की जिम्मेदारी होती है, उसी व्यवस्था से जुड़े अधिकारी पर किसी व्यक्ति को आरोपी न बनाने और गिरफ्तारी से बचाने के बदले लाखों रुपये मांगने का आरोप गंभीर चिंता का विषय है। हालांकि आरोपों की अंतिम पुष्टि न्यायिक प्रक्रिया और जांच पूरी होने के बाद ही होगी। एसीबी की कार्रवाई से यह भी सामने आता है कि रिश्वत के मामलों में कथित तौर पर बिचौलियों के इस्तेमाल की जांच कितनी महत्वपूर्ण है। अब जांच में यह स्पष्ट होना बाकी है कि पूरे मामले में किस आरोपी की क्या भूमिका थी और रिश्वत की कथित मांग तथा रकम स्वीकार करने से जुड़े घटनाक्रम में अन्य कोई व्यक्ति शामिल था या नहीं।

