
सोलापुर। समाजवादी पार्टी के विधायक अबू आसिम आजमी एक बार फिर अपने विवादास्पद बयान को लेकर सुर्खियों में हैं। वारी यात्रा को लेकर दिए गए बयान में आजमी ने कहा कि “वारी की वजह से सड़कों पर जाम लग जाता है, लेकिन मुसलमान कभी इसका विरोध नहीं करते, जबकि जब नमाज अदा की जाती है तो उस पर आपत्ति जताई जाती है। इस टिप्पणी से धार्मिक आयोजनों को लेकर तुलना और राजनीतिक हलकों में तीखी प्रतिक्रिया की आशंका बढ़ गई है।
आजमी ने सोलापुर में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा, “मस्जिद के बाहर नमाज नहीं पढ़ी जा सकती, हम हमेशा हिंदू भाइयों के साथ मिलकर चलते हैं, लेकिन जब नमाज सड़क पर पढ़ी जाती है तो यूपी सरकार कहती है कि पासपोर्ट और ड्राइविंग लाइसेंस रद्द कर देंगे। जबकि वारी यात्रा में जाम लगता है, पर मुसलमान कभी विरोध नहीं करते। मुसलमानों को जानबूझकर जगह नहीं दी जाती।”
वारकरी परंपरा के बीच बयान से खलबली
यह बयान ऐसे समय आया है जब संत ज्ञानेश्वर और संत तुकाराम महाराज की पालखी यात्रा पुणे से पंढरपुर की ओर प्रस्थान कर रही है। लाखों श्रद्धालु इस यात्रा में भाग लेते हैं और इसे महाराष्ट्र की सबसे पवित्र परंपराओं में गिना जाता है। ऐसे में आजमी के बयान को भावनाओं को आहत करने वाला मानते हुए राजनीतिक विवाद गहराने के आसार हैं।
ईरान-इस्राइल युद्ध पर भारत सरकार को घेरा
आजमी ने अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर भी केंद्र सरकार को आड़े हाथों लिया। उन्होंने कहा, “इस्राइल ने ईरान पर हमला कर बच्चों की हत्या की, अमेरिका उसका समर्थन कर रहा है। ईरान ने जवाब दिया, यह सही था। भारत को भी इंसाफ करना चाहिए, लेकिन प्रधानमंत्री ने इस्राइल के समर्थन में दस्तखत नहीं किए, यह भारत की परंपरा के अनुसार ठीक भी है।”
चुनाव आयोग पर पक्षपात का आरोप
विधायक आजमी ने चुनाव आयोग को सरकार की “कठपुतली” बताते हुए कहा कि “लोकतंत्र खतरे में है। बड़े नेताओं की हार पर भी कोई जांच नहीं होती। चुनाव आयोग निष्पक्ष नहीं रहा।”
शाहरुख शेख एनकाउंटर पर उठाए सवाल
सोलापुर एनकाउंटर में मारे गए शाहरुख शेख के मामले में आजमी ने कहा कि “उसकी मां ने मुझे बताया कि बेटे के सिर पर रिवॉल्वर रखकर गोली मारी गई। कसाब को भी जिंदा पकड़ा गया था, फिर शाहरुख को क्यों मारा गया?”
राज-उद्धव एकता और हिंदी-मराठी बहस
राज और उद्धव ठाकरे की एकता पर कहा कि “राज ठाकरे की कोई ताकत नहीं है, वे सिर्फ नफरत की राजनीति करते हैं। अगर दोनों साथ आए, तो शिवसेना कमजोर होगी।”
हिंदी-मराठी विवाद पर आजमी बोले, “मराठी का सम्मान जरूरी है, लेकिन हिंदी का अपमान नहीं होना चाहिए। महाराष्ट्र में तीन भाषाएं हों– मराठी, हिंदी और अंग्रेजी। अब देखना होगा कि अबू आजमी के इन बयानों पर भाजपा, शिवसेना और अन्य दलों की क्या प्रतिक्रिया आती है, खासकर वारी यात्रा जैसे संवेदनशील विषय पर की गई टिप्पणी को लेकर।




