
मुंबई। राम मंदिर निर्माण के लिए एकत्र किए गए चंदे को लेकर राजनीतिक बहस तेज हो गई है। समाजवादी पार्टी के विधायक अबू आज़मी ने चंदा संग्रह और उसके उपयोग को लेकर गंभीर सवाल उठाते हुए सरकार तथा संबंधित व्यवस्थाओं पर निशाना साधा है। उन्होंने आरोप लगाया कि भगवान राम के नाम पर जुटाए गए चंदे के प्रबंधन में पारदर्शिता की कमी रही है और जनता को यह स्पष्ट रूप से नहीं बताया गया कि एकत्रित धनराशि का उपयोग किस प्रकार किया गया। उनके अनुसार, मंदिर निर्माण के लिए प्राप्त चंदे के संबंध में विस्तृत और सार्वजनिक लेखा-जोखा सामने आना चाहिए ताकि लोगों की शंकाओं का समाधान हो सके। अबू आज़मी ने यह भी आरोप लगाया कि राम मंदिर और भगवान राम के नाम का उपयोग राजनीतिक लाभ तथा चुनावी रणनीति के लिए किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि यदि करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़े किसी अभियान के तहत बड़ी मात्रा में धन एकत्र किया गया है, तो उसके उपयोग को लेकर पूर्ण पारदर्शिता सुनिश्चित की जानी चाहिए। उनके मुताबिक, चंदा प्रबंधन में कथित अनियमितताओं की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए ताकि सच्चाई सामने आ सके। यह मामला इसलिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि राम मंदिर देश के करोड़ों लोगों की आस्था का केंद्र है। ऐसे में चंदे के उपयोग को लेकर उठने वाले सवाल सीधे तौर पर जनविश्वास और वित्तीय जवाबदेही से जुड़े हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि विपक्ष इस मुद्दे के जरिए सरकार को घेरने का प्रयास कर रहा है, जबकि आम जनता भी यह जानना चाहती है कि मंदिर निर्माण के लिए दिए गए दान का उपयोग किस प्रकार किया गया। फिलहाल इन आरोपों पर संबंधित पक्षों की ओर से क्या प्रतिक्रिया आती है, इस पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं।

