मानसून में बाढ़ का खतरा, बीएमसी अधिकारियों की लापरवाही पर उठे सवाल

मुंबई। बृहन्मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) के आर/दक्षिण विभाग अंतर्गत कांदिवली पश्चिम स्थित पोयसर नदी बी-ब्रांच के किनारे करीब 15 दिन पहले अवैध झोपड़ियों पर कार्रवाई की गई थी। लेकिन कार्रवाई के बाद भी मौके पर पड़ा भारी मात्रा में मलबा (डेब्रिज) अब तक नहीं हटाया गया है, जिससे मानसून के दौरान जलनिकासी बाधित होने और आसपास के क्षेत्रों में बाढ़ का खतरा पैदा हो गया है। स्थानीय रहिवासियों का कहना है कि नदी किनारे पड़े मलबे के कारण पानी का प्रवाह प्रभावित हो सकता है, जिससे भारी बारिश के दौरान जलभराव और बाढ़ जैसी स्थिति उत्पन्न होने की आशंका है। इसके बावजूद बीएमसी प्रशासन इस गंभीर मुद्दे को लेकर उदासीन बना हुआ है। स्थानीय रहिवासी एवं आरटीआई कार्यकर्ता महावीर यादव ने इस विषय को लेकर कई बार वीडियो के माध्यम से बीएमसी प्रशासन तथा स्थानीय जनप्रतिनिधियों का ध्यान आकर्षित करने का प्रयास किया है। उनका कहना है कि कार्रवाई करना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि उसके बाद मलबा हटाना भी उतना ही आवश्यक है। यदि समय रहते डेब्रिज नहीं हटाया गया तो इसका खामियाजा स्थानीय नागरिकों को भुगतना पड़ सकता है। महावीर यादव ने आरोप लगाया कि आर/दक्षिण विभाग की सहायक आयुक्त आरती गोलेकर, सहायक अभियंता अमोल गावित, एसडब्ल्यूडी विभाग के उप अभियंता विजय संभे तथा कनिष्ठ अभियंता सूरज जायसवाल को इस स्थिति की पूरी जानकारी है। इसके बावजूद मलबा हटाने की दिशा में कोई प्रभावी कदम नहीं उठाया जा रहा है।इस संबंध में संवाददाता ने आर/दक्षिण विभाग के सहायक अभियंता अमोल गावित से उनका पक्ष जानने के लिए कार्यालय में संपर्क करने का प्रयास किया, लेकिन वे कार्यालय में उपस्थित नहीं मिले। वहीं विभाग के दुय्यम अभियंता से मुलाकात हुई। उन्होंने बताया कि उनकी नियुक्ति हाल ही में हुई है, इसलिए उन्हें इस मामले की विस्तृत जानकारी नहीं है। ऐसे में सवाल उठता है कि कार्रवाई के 15 दिन बाद भी नदी किनारे पड़ा मलबा हटाने की जिम्मेदारी आखिर किसकी है और संबंधित अधिकारी इस गंभीर मुद्दे पर मौन क्यों हैं।मानसून सिर पर है और ऐसे समय में नदी किनारे पड़ा डेब्रिज अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करता है। स्थानीय नागरिकों ने मांग की है कि बीएमसी प्रशासन तत्काल कार्रवाई कर पोयसर नदी बी-ब्रांच के किनारे जमा मलबा हटाए, ताकि संभावित बाढ़ और जलभराव की स्थिति से क्षेत्रवासियों को बचाया जा सके।अब देखना यह है कि क्या सहायक आयुक्त आरती गोलेकर और संबंधित अधिकारी इस गंभीर मामले का संज्ञान लेकर तत्काल मलबा हटाने की कार्रवाई करेंगे या फिर किसी संभावित बाढ़ और जनहानि के बाद प्रशासन की नींद खुलेगी।



