
मुंबई। राज्य सरकार ने महाराष्ट्र को अंधापन मुक्त बनाने के संकल्प के तहत स्कूली छात्रों की आँखों की जाँच और उन्हें निःशुल्क चश्मे उपलब्ध कराने की एक महत्त्वाकांक्षी पहल शुरू की है। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की अवधारणा पर आधारित इस कार्यक्रम को ‘दृष्टि यज्ञ- सार्वभौमिक स्कूल नेत्र स्वास्थ्य कार्यक्रम’ नाम दिया गया है। अप्रैल 2019 में महाराष्ट्र सरकार, वनसाइट ऐसलर लक्सोटिका फाउंडेशन और रत्न निधि चैरिटेबल ट्रस्ट के बीच हुए समझौते के बाद इस योजना की शुरुआत की गई थी। अब तक 19 जिलों के 1800 स्कूलों के लगभग 7.5 लाख छात्रों की नेत्र जाँच की जा चुकी है। सरकार ने एसियर लक्सोटिका जैसी दुनिया की अग्रणी नेत्र परीक्षण और चश्मा निर्माता कंपनी से साझेदारी की है। इस समझौते के तहत लक्ष्य 2.5 मिलियन (25 लाख) छात्रों की आँखों की जाँच करना और जिन बच्चों को आवश्यकता है, उन्हें उच्च गुणवत्ता वाले निःशुल्क चश्मे उपलब्ध कराना है। अब तक 42,762 छात्रों को उनकी ज़रूरत के अनुसार चश्मे वितरित किए जा चुके हैं। यह अभियान न केवल शहरों तक सीमित है, बल्कि ग्रामीण और आदिवासी अंचलों के स्कूलों तक भी पहुँच रहा है। मोबाइल निरीक्षण इकाइयों और प्रशिक्षित टीमों की मदद से बच्चों को विश्वस्तरीय लेंस उपलब्ध कराए जा रहे हैं। इस पहल ने उन छात्रों के जीवन में बदलाव लाया है जिन्हें धुंधली दृष्टि के कारण पढ़ाई और आत्मविश्वास में कठिनाई होती थी। अब वे अधिक स्पष्टता के साथ पढ़ पा रहे हैं, ध्यान केंद्रित कर रहे हैं और शिक्षा में बेहतर प्रदर्शन कर रहे हैं। इस अभियान का उद्देश्य 2.5 लाख स्कूली छात्रों तक पहुँचना है और पहले चरण में मुंबई, ठाणे, पालघर, सतारा, नासिक, पुणे, नांदेड़, छत्रपति संभाजीनगर, नागपुर, सांगली, बीड, कोल्हापुर, चंद्रपुर, सोलापुर, अकोला, धुले, जालना, बुलढाणा और सिंधुदुर्ग जिलों के स्कूलों में इसकी शुरुआत की गई है। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा कि यह केवल एक नेत्र स्वास्थ्य कार्यक्रम नहीं, बल्कि महाराष्ट्र के भविष्य में एक निवेश है। स्पष्ट दृष्टि सुनिश्चित करके राज्य बेहतर शिक्षा, उच्च लक्ष्यों और उज्ज्वल भविष्य के द्वार खोल रहा है।




